रुक्मिणी विवाह और कृष्ण–सुदामा मित्रता से भावविभोर हुए श्रद्धालु

ब्रह्मलीन पूज्य संत अनन्त श्री विभूषित श्रीरामचरित्रदास जी महाराज की स्मृति में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन मंगलवार को भावपूर्ण वातावरण में हुआ। इस अवसर पर श्रीमद्भागवत महापुराण एवं श्रीरामचरितमानस के पारायण पाठ की पूर्णाहुति संपन्न हुई। कार्यक्रम के समापन के साथ ही श्रद्धालु भक्ति और ज्ञान की गंगा में सराबोर दिखे। आज 31 दिसंबर को चरण पादुका पूजन एवं विशाल भंडारे के साथ स्मृति महोत्सव का विधिवत समापन होगा।

रुक्मिणी विवाह और कृष्ण–सुदामा मित्रता से भावविभोर हुए श्रद्धालु

__ चरण पादुका पूजन व भव्य भंडारे के साथ आज होगा स्मृति महोत्सव का समापन

केटी न्यूज/बक्सर

ब्रह्मलीन पूज्य संत अनन्त श्री विभूषित श्रीरामचरित्रदास जी महाराज की स्मृति में आयोजित नौ दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन मंगलवार को भावपूर्ण वातावरण में हुआ। इस अवसर पर श्रीमद्भागवत महापुराण एवं श्रीरामचरितमानस के पारायण पाठ की पूर्णाहुति संपन्न हुई। कार्यक्रम के समापन के साथ ही श्रद्धालु भक्ति और ज्ञान की गंगा में सराबोर दिखे। आज 31 दिसंबर को चरण पादुका पूजन एवं विशाल भंडारे के साथ स्मृति महोत्सव का विधिवत समापन होगा।

रुक्मिणी विवाह और उद्धव–गोपी संवाद का भावपूर्ण वर्णन

अंतिम दिन की कथा में कथावाचक उमेश भाई ओझा ने भगवान श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण प्रसंगों का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने माता रुक्मिणी और भगवान कृष्ण के विवाह प्रसंग को विस्तार से प्रस्तुत करते हुए बताया कि यह विवाह केवल लौकिक नहीं, बल्कि आत्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है।इसके साथ ही उद्धव–गोपी संवाद के माध्यम से ज्ञान और भक्ति के अंतर को सरल शब्दों में समझाया गया। कथावाचक ने कहा कि उद्धव जैसे महान ज्ञानी भी गोपियों के निस्वार्थ प्रेम और अनन्य भक्ति के सामने नतमस्तक हो गए। उन्होंने बताया कि प्रथम कोटि के भक्त वही हैं, जो अपने आराध्य के सुख को ही अपना सर्वस्व मानते हैं, जैसे गोपियां और भरत जी।

कृष्ण–सुदामा मित्रता: करुणा और प्रेम की मिसाल

कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की अटूट मित्रता का प्रसंग सुनकर श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। नरोत्तमदास जी की पंक्तियों “देखि सुदामा की दीन दसा, करुणा करि कै करुणानिधि रोये” के माध्यम से बताया गया कि संसार के किसी भी ग्रंथ में ऐसी निस्वार्थ और निर्मल मित्रता का दूसरा उदाहरण नहीं मिलता।कथावाचक ने कहा कि सुदामा के पास देने के लिए कुछ भी नहीं था, लेकिन उनके पास अटूट श्रद्धा और निष्काम भाव था। यही कारण है कि भगवान श्रीकृष्ण ने उन पर अपनी असीम कृपा बरसाई और उनके जीवन को आनंद और समृद्धि से भर दिया।

सनातन धर्म और ऋषि विज्ञान ही विश्व शांति का आधार

समापन सत्र में वक्ताओं ने सनातन धर्म की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यही धर्म विश्व में शांति और मानव कल्याण का एकमात्र मार्ग है। उन्होंने कहा कि आज के युग में मानवता को विनाश से बचाने का कार्य केवल ऋषियों के विज्ञान और हमारी प्राचीन संस्कृति ही कर सकती है। हरिकथा को भव-बाधाओं से मुक्ति का साधन बताते हुए श्रद्धालुओं से धर्म, संस्कार और सेवा के मार्ग पर चलने का आह्वान किया गया।

भजन संध्या में झूमे श्रद्धालु

संध्या भजन कार्यक्रम में रोहित प्रधान, बटेश्वर यादव, नंद बिहारी, सीताराम चतुर्वेदी और विंध्याचल शुक्ला समेत कई भजन गायकों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं, जिस पर श्रद्धालु देर रात तक झूमते रहे।कार्यक्रम में ट्रस्ट के मीडिया सहयोगी नीतीश सिंह, अशोक मिश्रा, जयशंकर तिवारी, प्रिंस, रविलाल, साध्वी विनीता सहित बड़ी संख्या में साधु-संत, ग्रामीण और श्रद्धालु उपस्थित रहे। पूरे आयोजन का वातावरण भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास से परिपूर्ण बना रहा।