बड़ो को प्रणाम करने वालों की बढ़ती है आयु, विद्या, यश और बल- गंगा पुत्र

- सिमरी में श्रीलक्ष्मीनारायण महायज्ञ के आयोजन से माहौल हुआ भक्तिमय
केटी न्यूज/ सिमरी
सिमरी में चल रहे श्रीलक्ष्मी नारायण महायज्ञ के तीसरे दिन अपने प्रवचन के दौरान पूज्य श्री गंगा पुत्र जी महाराज ने महाभारत के एक कथा का वर्णन करते हुए कहा कि बड़ो को प्रणाम करने मात्र से आयु, विद्या, यश और बल की वृद्धि होती है। उन्होंने बाण सैय्या पर पड़े भीष्म पितामह से पांडवों की बातचीत के अंश को उद्धृत करते हुए बताया कि भगवान कृष्ण ने पांडवों के साथ कुरुक्षेत्र में बावन दिनों से बाण की सैया पर पड़े गंगा पुत्र भीष्म पितामह के चरणों में प्रणाम किया। क्योंकि अपने से बड़ों को प्रणाम करने से चार चीजें बढ़ जाती हैं, आयु, विद्या, यश और बल। भगवान कृष्ण ने भीष्म से निवेदन किया आप इन्हें धर्म का उपेश दे, तब भीष्म जी ने पांडवों को धर्म का उपदेश दिया
दान धर्मान राज धर्मान,मोक्ष धर्मान विभागसर :।
स्त्री धर्मान भगवत धर्मान समास व्यास योगातः।।
हे युधिष्ठिर आप सब गृहस्थ है, गृहस्थ आश्रम में अधिक से अधिक धन कमाना चाहिए और उसका दशांश धर्म में लगाना चाहिए, दशांश का मतलब अपने गृहस्त आश्रम की जितनी व्यवस्था हो जैसे बच्चे का फिश देना है, दूध, बिजली का बिल जमा करना है,उसके उपरांत जो धन बचता है,उसका दशांश धर्म में लगाना चाहिए। क्योंकि धन से धर्म नहीं करोगे तो रोग में चला जाएगा। उन्होंने कहा कि स्वामीजी महाराज ने राज धर्म के बारे में बताते हुए कहा कि राजा का कोई माता, पिता, भाई नहीं होता पूरी प्रजा ही उसकी संतान होती है। इसलिए सब की बराबर सेवा करना ही राजा का कर्तव्य होता है। राजा के राज्य में अगर कोई अपराध कर रहा हो तो अपराध के अनुसार उसेे दंड देना चाहिए या शिर नीचे कर के चले जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब पितामह पांडवों को ऐसा उपदेश दे रहे थे तब द्रौपदी मुस्कुरा दी।
भीष्म ने उनके मुस्कुराने का कारण पूछा तो द्रौपदी ने कहा कि आप बाण सैया पर पड़ने के बाद धर्म का उपदेश दे रहे है। लेकिन चिरहरण के समय आपको धर्म का ख्याल नहीं आया। तब मैंने सबसे पहले आपको पुकारा हे भीष्म हमारी रक्षा करो। आप सिर नीचे कर के बैठे रहे। भीष्म ने कहा पुत्री मैंने दुष्ट दुर्याेधन का अन्न खाया था इसीलिए बुद्धि खराब हो चुकी थी। स्वामी जी ने कहा कि जैसा खाओगे अन्न वैसा होगा मन।,लेकिन आज हमारी बुद्धि बड़ी सात्विक है। द्रौपदी ने क्षमा मांगा है। मोक्ष धर्म ,स्त्री धर्म के बारे में बताया स्त्री को पति के अनुकूल रहना चाहिए। स्त्री को शास्त्र में गज गामिनी कहा गया है जैसे हाथी बगल से गुजर जाता है पता नहीं चलता। ऐसे ही स्त्री को चलना चाहिए और शास्त्र में चंद्रमुखी कहा गया है। जैसे चंद्रमा संसार को शीतलता प्रदान करता है, वैसे ही पति जब घर में खेती, नौकरी व्यापार कर के आवे, तो उसे ठंढा पानी देना चाहिए। ऐसा नहीं करने वाली स्त्री पति धर्म से विमुख मानी जाएगी। इसके अलावे भी उन्होंने प्रवचन के दौरान कई सारगर्भित बातें कही। जबकि महायज्ञ स्थल पर पूरे दिन हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ लगी रही। प्रवचन के साथ ही रामलीला व रासलीला के मंचन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिलाएं उपस्थित थी।