प्रेम प्रसंग, मातृत्व और कानून के बीच फंसा तीन वर्षीय मासूम, थाना में घंटों चली पंचायत
डुमरांव थाना परिसर शुक्रवार की शाम एक पारिवारिक विवाद का केंद्र बन गया, जहां वैवाहिक संबंध, प्रेम प्रसंग और एक मासूम बच्चे की अभिरक्षा को लेकर घंटों तक हाईवोल्टेज ड्रामा चलता रहा। मामला उस समय और संवेदनशील हो गया, जब एक महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर तीन वर्षीय पुत्र को जबरन अपने से अलग करने का आरोप लगाया, जबकि दूसरी ओर पति पक्ष ने महिला पर परिवार छोड़कर प्रेमी के साथ चले जाने की बात कही।


केटी न्यूज/डुमरांव
डुमरांव थाना परिसर शुक्रवार की शाम एक पारिवारिक विवाद का केंद्र बन गया, जहां वैवाहिक संबंध, प्रेम प्रसंग और एक मासूम बच्चे की अभिरक्षा को लेकर घंटों तक हाईवोल्टेज ड्रामा चलता रहा। मामला उस समय और संवेदनशील हो गया, जब एक महिला ने अपने पति और ससुराल पक्ष पर तीन वर्षीय पुत्र को जबरन अपने से अलग करने का आरोप लगाया, जबकि दूसरी ओर पति पक्ष ने महिला पर परिवार छोड़कर प्रेमी के साथ चले जाने की बात कही।जानकारी के अनुसार थाना क्षेत्र की रहने वाली महिला बीते तीन दिनों से घर से गायब थी। परिजनों का कहना है कि महिला अपने छोटे बेटे को साथ लेकर बिना किसी सूचना के घर छोड़कर चली गई थी।

काफी खोजबीन के बाद परिवार को सूचना मिली कि वह थाना क्षेत्र के ही एक गांव में एक युवक के साथ रह रही है। इसके बाद पति और ससुराल पक्ष वहां पहुंचे, जहां दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस और विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गई।बताया जाता है कि इसी दौरान परिवार के लोग बच्चे को अपने साथ लेकर वापस घर आ गए। कुछ देर बाद महिला सीधे थाना पहुंची और पुलिस से शिकायत करते हुए कहा कि उसका बच्चा उससे छीन लिया गया है। महिला अपने प्रेमी के साथ रहने की बात पर अड़ी रही, जबकि पति पक्ष बच्चे की परवरिश और भविष्य का हवाला देता रहा। थाना परिसर में देर शाम तक दोनों पक्षों के बीच समझौते और कानूनी अधिकारों को लेकर बहस चलती रही।

पुलिस अधिकारियों ने मामले को केवल पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि बच्चे की अभिरक्षा और वैवाहिक अधिकारों से जुड़ा संवेदनशील मामला मानते हुए तत्काल कोई कठोर निर्णय लेने से परहेज किया। थानाध्यक्ष संजय कुमार सिन्हा ने बताया कि बच्चे के हित को प्राथमिकता देते हुए फिलहाल उसे पिता और दादी के संरक्षण में भेजा गया है। वहीं महिला अपनी इच्छा से कथित प्रेमी के साथ चली गई।पुलिस ने दोनों पक्षों को सलाह दी है कि वे बच्चे की कस्टडी, वैवाहिक विवाद और साथ रहने के अधिकार जैसे मुद्दों पर न्यायालय की शरण लें, ताकि कानून के दायरे में स्थायी समाधान निकल सके। घटना के बाद इलाके में सामाजिक, नैतिक और कानूनी पहलुओं को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।

