शिव धनुष भंग की गूंज से गुंजायमान हुआ पश्चिम पोखरा परिसर

स्थानीय प्रखंड क्षेत्र के ठोरी पांडेयपुर गांव स्थित गौरीशंकर, राधेकृष्ण मंदिर पश्चिम पोखरा परिसर में आयोजित पांच दिवसीय श्रीराम कथा के चौथे दिन शुक्रवार को आस्था और अध्यात्म का अद्वितीय दृश्य देखने को मिला। कथा का मुख्य आकर्षण रहा भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष भंग का पावन प्रसंग, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति भाव में सराबोर कर दिया।

शिव धनुष भंग की गूंज से गुंजायमान हुआ पश्चिम पोखरा परिसर

-- धनुष यज्ञ प्रसंग ने जगाई श्रद्धा की ज्योति, ‘जय सियाराम’ से थर्राया वातावरण

केटी न्यूज/चौगाईं

स्थानीय प्रखंड क्षेत्र के ठोरी पांडेयपुर गांव स्थित गौरीशंकर, राधेकृष्ण मंदिर पश्चिम पोखरा परिसर में आयोजित पांच दिवसीय श्रीराम कथा के चौथे दिन शुक्रवार को आस्था और अध्यात्म का अद्वितीय दृश्य देखने को मिला। कथा का मुख्य आकर्षण रहा भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष भंग का पावन प्रसंग, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं को भक्ति भाव में सराबोर कर दिया।जैसे ही राष्ट्रीय कथावाचक पं. मधुसूदन बिहारी जी ने जनकपुर की उस ऐतिहासिक सभा का वर्णन आरंभ किया, श्रोतागण मानो त्रेता युग की उसी दिव्य बेला में पहुंच गए। उन्होंने बताया कि मिथिला नरेश राजा जनक ने माता सीता के स्वयंवर के लिए शिव धनुष को उठाने की शर्त रखी थी।

देश-विदेश से आए बलशाली राजा और महारथी धनुष को हिलाने तक में असमर्थ रहे। सभा में निराशा का वातावरण व्याप्त हो गया।उसी समय महर्षि विश्वामित्र के संकेत पर मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने गुरु आज्ञा का पालन करते हुए सहज भाव से शिव धनुष को उठाया। कथावाचक ने उस क्षण का ऐसा सजीव चित्रण किया कि पूरा पंडाल मंत्रमुग्ध हो उठा। श्रीराम द्वारा धनुष को प्रत्यंचा चढ़ाते ही वह भंग हो गया। धनुष टूटते ही मानो धरती-आकाश एक साथ गूंज उठेकृदेवताओं ने पुष्पवर्षा की, ऋषि-मुनियों ने स्तुति गाई और जनकपुर नगरी उल्लास से भर उठी।कथा स्थल पर भी वही आलौकिक दृश्य साकार हो उठा। “जय सियाराम” और “हर-हर महादेव” के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय हो गया।

श्रद्धालु हाथ जोड़कर खड़े हो गए और कई लोगों की आंखें भावविभोर होकर नम हो उठीं।कथावाचक ने अपने प्रवचन में कहा कि धनुष यज्ञ केवल पराक्रम का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह धर्म, मर्यादा और विनम्रता की विजय का प्रतीक है। श्रीराम ने यह संदेश दिया कि सच्चा बल अहंकार में नहीं, बल्कि संयम, आज्ञाकारिता और कर्तव्यनिष्ठा में निहित है। उन्होंने कहा कि जब शक्ति के साथ शील और संस्कार जुड़े हों, तभी वह दिव्यता का रूप लेती है।धनुष भंग के साथ ही माता सीता और प्रभु श्रीराम के दिव्य मिलन की भूमिका भी बनी। इस प्रसंग ने कथा को और अधिक भावुक बना दिया।

विवाह की पूर्व बेला का वर्णन सुनकर श्रद्धालु आनंद और भक्ति के भाव में डूब गए।पूरे परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया था। भजन-कीर्तन और मंगल ध्वनियों के बीच भक्तगण देर शाम तक कथा श्रवण करते रहे। आयोजकों ने बताया कि कथा के आगामी दिनों में श्रीराम-सीता विवाह और अन्य महत्वपूर्ण प्रसंगों का रसपान कराया जाएगा।शिव धनुष भंग की यह गाथा न केवल आस्था का उत्सव बनी, बल्कि जीवन में मर्यादा और धर्म के पालन का प्रेरक संदेश भी दे गई। पश्चिम पोखरा परिसर में गूंजती भक्ति की यह ध्वनि श्रद्धालुओं के हृदय में लंबे समय तक स्मरणीय बनी रहेगी।