शिक्षा, संस्कार और पर्यावरण संरक्षण की मिसाल बनीं श्रद्धांजलि सभाएं
राजपुर प्रखंड में सोमवार को आयोजित दो अलग-अलग श्रद्धांजलि सभाएं केवल स्मृति कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। एक ओर दिवंगत शिक्षक पारसनाथ उर्फ दयाशंकर पांडेय की स्मृति में पौधरोपण के माध्यम से हरियाली बचाने का संकल्प लिया गया, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ समाजसेवी पंडित दीनानाथ चौबे को लोक-संस्कृति और निर्गुण भजनों के माध्यम से श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए।
-- राजपुर प्रखंड में दो विभूतियों को याद कर समाज ने लिया हरियाली और सांस्कृतिक संरक्षण का संकल्प
केटी न्यूज/राजपुर
राजपुर प्रखंड में सोमवार को आयोजित दो अलग-अलग श्रद्धांजलि सभाएं केवल स्मृति कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उन्होंने शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया। एक ओर दिवंगत शिक्षक पारसनाथ उर्फ दयाशंकर पांडेय की स्मृति में पौधरोपण के माध्यम से हरियाली बचाने का संकल्प लिया गया, वहीं दूसरी ओर वरिष्ठ समाजसेवी पंडित दीनानाथ चौबे को लोक-संस्कृति और निर्गुण भजनों के माध्यम से श्रद्धा सुमन अर्पित किए गए।

-- शिक्षक की स्मृति में हरियाली का संदेश
मंगराव पंचायत के घरारी गांव में आयोजित श्रद्धांजलि सभा की शुरुआत वैदिक हवन और पूजा-अर्चना के साथ हुई। दिवंगत शिक्षक के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया गया। इस अवसर पर आगंतुक अतिथियों को पौधा भेंट कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया। उपस्थित लोगों ने पौधरोपण कर जल-जीवन-हरियाली अभियान को सफल बनाने का सामूहिक संकल्प लिया।वक्ताओं ने कहा कि स्वर्गीय पारसनाथ पांडेय ने अपने जीवन का अधिकांश समय बच्चों की शिक्षा और नैतिक निर्माण में लगाया। उनकी स्मृति में पौधरोपण जैसे रचनात्मक कार्य न केवल उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा है। जदयू जिलाध्यक्ष अशोक सिंह ने कहा कि बदलते मौसम और जलवायु संकट से निपटने के लिए समाज को आगे आना होगा और हर अवसर पर पौधरोपण को जीवन का हिस्सा बनाना होगा।

-- संस्कृति और लोकगीतों से दी गई समाजसेवी को श्रद्धांजलि
वहीं देवढ़िया पंचायत के सैथू गांव में वरिष्ठ समाजसेवी एवं संस्कृत विद्यालय के संस्थापक पंडित दीनानाथ चौबे की श्रद्धांजलि सभा में समाजसेवियों और बुद्धिजीवियों की उपस्थिति रही। लोक गीत कलाकारों ने निर्गुण भजनों की प्रस्तुति देकर वातावरण को भावुक बना दिया। वक्ताओं ने उनके सामाजिक योगदान, शिक्षा के प्रति समर्पण और सांस्कृतिक चेतना को याद करते हुए उनके विचारों को आत्मसात करने का संकल्प लिया।दोनों सभाओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि सच्ची श्रद्धांजलि वही है, जो समाज को सकारात्मक दिशा दे और आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्ग प्रशस्त करे।

