डेढ़ साल बाद खुला रामगढ़ बधार के ‘लावारिस शव’ का राज, डीएनए ने खोला विमल की मौत का रहस्य

करीब डेढ़ साल से रहस्य बनी रामगढ़ बधार में मिले अज्ञात शव की गुत्थी आखिरकार डीएनए रिपोर्ट ने सुलझा दी। पुलिस ने वैज्ञानिक जांच और मिले अहम सुरागों के आधार पर शव की पहचान ब्रह्मपुर गांव निवासी 27 वर्षीय विमल कुमार के रूप में की है। विमल भारतीय रेलवे में ग्रुप-डी कर्मचारी थे और महाराष्ट्र में कार्यरत थे।

डेढ़ साल बाद खुला रामगढ़ बधार के ‘लावारिस शव’ का राज, डीएनए ने खोला विमल की मौत का रहस्य

__ मोबाइल फोन के सुराग से जुड़ी जांच, डीएनए मिलान में हुई मृतक की पहचान; रेलवे कर्मचारी की मौत को लेकर हत्या की आशंका, संदिग्धों से पूछताछ और संपर्कों की पड़ताल तेज

केटी न्यूज/ब्रह्मपुर

करीब डेढ़ साल से रहस्य बनी रामगढ़ बधार में मिले अज्ञात शव की गुत्थी आखिरकार डीएनए रिपोर्ट ने सुलझा दी। पुलिस ने वैज्ञानिक जांच और मिले अहम सुरागों के आधार पर शव की पहचान ब्रह्मपुर गांव निवासी 27 वर्षीय विमल कुमार के रूप में की है। विमल भारतीय रेलवे में ग्रुप-डी कर्मचारी थे और महाराष्ट्र में कार्यरत थे। उनकी पहचान सामने आने के बाद अब पुलिस की पूरी जांच का फोकस इस बात पर है कि आखिर विमल की मौत कैसे हुई और उन्हें रामगढ़ बधार तक कौन लेकर आया।जानकारी के अनुसार, 5 जनवरी 2025 को ब्रह्मपुर थाना पुलिस को रामगढ़ गांव से करीब 500 मीटर पश्चिम और एनएच-922 से लगभग 500 मीटर दक्षिण अहरा के समीप झाड़ियों में शव पड़े होने की सूचना मिली थी। तत्कालीन थानाध्यक्ष सुरेश कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे थे।

शव की स्थिति काफी खराब होने के कारण उसकी पहचान तत्काल नहीं हो सकी थी। घटनास्थल से जूते और फटे काले जींस समेत कुछ अन्य सामान भी मिले थे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया और चौकीदार के बयान पर अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की थी।मामले की गंभीरता को देखते हुए एफएसएल टीम ने घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य भी जुटाए थे। हालांकि, मृतक की पहचान नहीं होने के कारण जांच को आगे बढ़ाने में पुलिस को लंबे समय तक चुनौती का सामना करना पड़ा।इसी बीच जांच की कड़ी विमल कुमार की गुमशुदगी से जुड़ गई।

परमहंस प्रसाद के पुत्र विमल 30 नवंबर 2024 से लापता थे। उनके परिजनों ने महाराष्ट्र में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि विमल का मोबाइल फोन रामगढ़ क्षेत्र की एक युवती के पास इस्तेमाल हो रहा था। मोबाइल से मिले इस सुराग ने पुलिस को मामले की तह तक पहुंचने की नई दिशा दी।इसके बाद पुलिस ने मृतक की पहचान पुख्ता करने के लिए विमल के पिता परमहंस प्रसाद का डीएनए सैंपल लिया और उसे बरामद शव के नमूने से मिलान के लिए भेजा। लंबी प्रक्रिया के बाद आई डीएनए रिपोर्ट ने पुष्टि कर दी कि रामगढ़ बधार से बरामद शव विमल कुमार का ही था।

_अब ‘किसने और क्यों’ पर पुलिस का फोकस

पहचान सामने आने के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ा दिया है। थानाध्यक्ष ब्रजेश कुमार के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफएसएल जांच, मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पुलिस विमल के मोबाइल से जुड़े संपर्कों और घटनाक्रम के दौरान उनके संपर्क में रहे लोगों की पड़ताल कर रही है। व्यक्तिगत विवाद, प्रेम प्रसंग अथवा किसी आपराधिक साजिश समेत विभिन्न संभावित कारणों को ध्यान में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। संदिग्धों से पूछताछ और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पुलिस जल्द ही मामले की अगली कड़ी तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है।