40 हजार के वाटर कूलर पर 2.75 लाख का भुगतान, आरटीआई से खुला खरीद का मामला
सरकारी स्कूलों में बच्चों को शुद्ध और ठंडा पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खर्च की गई पंचायत की राशि अब सवालों के घेरे में है। डुमरांव प्रखंड की अरियाव पंचायत में 15वें वित्त आयोग की योजना से छह विद्यालयों में लगाए गए वाटर कूलर की कीमत को लेकर आरटीआई से मिली जानकारी के बाद वित्तीय अनियमितता के आरोप सामने आए हैं।

__ अरियाव के छह स्कूलों में 15वें वित्त आयोग से लगे वाटर कूलर पर उठे सवाल, शिकायतकर्ता ने मांगी उच्चस्तरीय जांच; मुखिया व बीपीआरओ ने नियमों के तहत जेम पोर्टल से खरीद की दी दलील
__ अरियाव पंचायत में वाटर कूलर खरीद पर उठे सवाल
केटी न्यूज/डुमरांव।
सरकारी स्कूलों में बच्चों को शुद्ध और ठंडा पेयजल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खर्च की गई पंचायत की राशि अब सवालों के घेरे में है। डुमरांव प्रखंड की अरियाव पंचायत में 15वें वित्त आयोग की योजना से छह विद्यालयों में लगाए गए वाटर कूलर की कीमत को लेकर आरटीआई से मिली जानकारी के बाद वित्तीय अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। मामला सामने आने के बाद खरीद प्रक्रिया, भुगतान और निर्धारित दर को लेकर जांच की मांग तेज हो गई है।आरटीआई से प्राप्त जानकारी के मुताबिक पंचायत के छह विद्यालयों में ब्लू स्टार कंपनी के 40 लीटर क्षमता वाले वाटर कूलर लगाए गए हैं।

दस्तावेजों में प्रत्येक वाटर कूलर की कीमत 2 लाख 75 हजार रुपये दर्शाई गई है। इनकी खरीद वित्तीय वर्ष 2025-26 में ‘कुमार एंड कंपनी’ नामक एजेंसी के माध्यम से किए जाने की बात सामने आई है।पहले चरण में कन्या प्राथमिक विद्यालय, हाई स्कूल अरियाव, मध्य विद्यालय भादी और मध्य विद्यालय डुभकी में वाटर कूलर लगाने के लिए 11 लाख रुपये का प्राक्कलन तैयार किया गया था। इसके विरुद्ध 10 लाख 72 हजार 034 रुपये का भुगतान किया गया। वहीं दूसरे चरण में प्राथमिक विद्यालय भादी और मध्य विद्यालय अरियाव उत्तर टोला में वाटर कूलर लगाने पर 5.50 लाख रुपये खर्च किए गए।

__ बाजार दर और भुगतान के बीच बड़ा अंतर
आरटीआई कार्यकर्ता विपिन कुमार सिंह ने खरीद की कीमत पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि बाजार में 40 लीटर क्षमता के इसी कंपनी के वाटर कूलर की कीमत करीब 40 से 45 हजार रुपये के आसपास है। ऐसे में एक यूनिट के लिए 2.75 लाख रुपये का भुगतान किए जाने से कीमत में भारी अंतर दिखाई देता है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि खरीद प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराई जाए तो प्रखंड और जिले की अन्य पंचायतों में भी ऐसी खरीदारी के मामले सामने आ सकते हैं।

__ जेम पोर्टल पर खरीद का हवाला
हालांकि, आरोपों पर अरियाव पंचायत के मुखिया विजय बारी ने कहा कि पंचायत के सभी विकास कार्य विभागीय नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत कराए गए हैं। वाटर कूलर की खरीदारी भी सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप जेम पोर्टल के माध्यम से की गई है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया केवल अरियाव पंचायत में नहीं, बल्कि अन्य पंचायतों में भी लागू है। उनके अनुसार विद्यालयों में लगाए गए सभी वाटर कूलर फिलहाल चालू हालत में हैं।वहीं बीपीआरओ रोहिणी कुमारी ने बताया कि वाटर कूलर की खरीद जेम पोर्टल के माध्यम से नियमानुसार हुई है। एजेंसी को भुगतान की गई राशि में मशीन की कीमत के अलावा पांच वर्षों का मेंटेनेंस और इंस्टॉलेशन चार्ज भी शामिल है।

उन्होंने कहा कि किसी विद्यालय में मशीन खराब मिलने पर ग्रामीण शिकायत कर सकते हैं, जिसके बाद संबंधित एजेंसी से उसकी मरम्मत कराई जाएगी।अब सवाल यह है कि जेम पोर्टल पर हुई खरीद में वाटर कूलर की मूल कीमत, इंस्टॉलेशन और पांच वर्षों के रखरखाव पर वास्तविक कितना खर्च निर्धारित था और कुल भुगतान की राशि कैसे तय हुई। यही बिंदु इस पूरे मामले की जांच का आधार बन सकता है।

