तुलसी की साधना स्थली रघुनाथपुर को पर्यटन मानचित्र पर लाने की पहल तेज
बक्सर की धार्मिक पहचान के साथ अब उसकी साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान दिलाने की कवायद तेज हो गई है। ब्रह्मपुर प्रखंड के रघुनाथपुर स्थित तुलसी आश्रम इसी विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह वही स्थल है, जहां गोस्वामी तुलसीदास ने प्रवास कर रामभक्ति, साधना और रामकथा वाचन किया था।

__ तुलसी आश्रम के संरक्षण और विकास की उठी मांग, रामायण सर्किट से जोड़ने सहित कई प्रस्ताव; प्रशासनिक स्तर पर भी शुरू हुई पहल
केटी न्यूज/ब्रह्मपुर।
बक्सर की धार्मिक पहचान के साथ अब उसकी साहित्यिक और सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान दिलाने की कवायद तेज हो गई है। ब्रह्मपुर प्रखंड के रघुनाथपुर स्थित तुलसी आश्रम इसी विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है। स्थानीय मान्यता के अनुसार यह वही स्थल है, जहां गोस्वामी तुलसीदास ने प्रवास कर रामभक्ति, साधना और रामकथा वाचन किया था। तुलसीदास से जुड़ी लोकस्मृतियों के कारण रघुनाथपुर को लंबे समय से उनकी साधना स्थली के रूप में देखा जाता है।बताया जाता है कि रघुनाथपुर का पुराना नाम बेला पतवत था। यहां स्थित प्राचीन राम मंदिर और एकांत वातावरण से प्रभावित होकर तुलसीदास के यहां ठहरने और साधना करने की परंपरा स्थानीय जनश्रुतियों में मिलती है। बोधिवृक्ष के नीचे साधना तथा रामकथा वाचन से जुड़ी स्मृतियां आज भी लोगों के बीच प्रचलित हैं।

हालांकि तुलसीदास के रघुनाथपुर प्रवास से जुड़े विभिन्न दावों के व्यापक ऐतिहासिक सत्यापन और शोध की जरूरत है।इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व को लेकर 1966 के शाहाबाद गजेटियर में भी तुलसीदास के रघुनाथपुर प्रवास का उल्लेख होने की बात सामने आती है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर आश्रम के संरक्षण, दस्तावेजीकरण और विकास की मांग लगातार जोर पकड़ रही है।तुलसी आश्रम को विकसित कराने की दिशा में तुलसी विचार मंच के संयोजक शैलेश कुमार ओझा लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री सचिवालय के सहयोग पोर्टल, पर्यटन विभाग, कला एवं संस्कृति विभाग, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों तक प्रस्ताव पहुंचाकर स्थल के विकास की मांग उठाई है।

प्रशासनिक स्तर पर स्थल की भूमि, ऐतिहासिक महत्व और विकास की संभावनाओं से संबंधित जानकारी जुटाने की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी है।जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी की ओर से सकारात्मक मंतव्य और रिपोर्ट भेजे जाने के बाद यहां तुलसी महोत्सव शुरू होने की उम्मीद बढ़ी है।मंच की ओर से आश्रम को रामायण सर्किट से जोड़ने, परिसर की घेराबंदी, सड़क निर्माण, तुलसीदास स्मारक, मानस पुस्तकालय एवं पार्क की स्थापना, तुलसी सरोवर के सौंदर्यीकरण तथा बाबा ब्रह्मेश्वरनाथ धाम से आश्रम तक धार्मिक कॉरिडोर बनाने की मांग की गई है।आश्रम परिसर में प्राचीन राम-जानकी मंदिर और महाकालेश्वर मंदिर श्रद्धालुओं के प्रमुख आस्था केंद्र हैं। यहां रामोत्सव, तुलसी जयंती, रामकथा, सुंदरकांड पाठ और गंगा महाआरती जैसे आयोजन भी होते हैं।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि रघुनाथपुर को योजनाबद्ध तरीके से विकसित किया जाए तो यह धार्मिक पर्यटन के साथ साहित्य और संस्कृति का भी प्रमुख केंद्र बन सकता है। सड़क, प्रकाश, पेयजल, शौचालय, पार्किंग और स्वच्छता जैसी सुविधाओं के विस्तार से श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।विशेषज्ञों के अनुसार तुलसी आश्रम से जुड़ी मान्यताओं का वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, पुराने अभिलेखों और गजेटियर का अध्ययन तथा स्थानीय परंपराओं का संरक्षण इस दिशा में अहम कदम होगा। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासनिक पहल कब धरातल पर उतरती है और रघुनाथपुर को तुलसी की विरासत के अनुरूप नई पहचान मिलती है।

