डॉक्टर अस्पताल में मौजूद, फिर भी मरीजों को नहीं मिला इलाज

बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) के आह्वान पर चिकित्सकों की कार्यबंदी का असर अब सीधे मरीजों की परेशानी के रूप में सामने आने लगा है। पांच सूत्री मांगों को लेकर गुरुवार से शुरू अनिश्चितकालीन ओपीडी बहिष्कार के दूसरे दिन शुक्रवार को भी सदर अस्पताल की नियमित चिकित्सा व्यवस्था लगभग ठप रही।

डॉक्टर अस्पताल में मौजूद, फिर भी मरीजों को नहीं मिला इलाज

__ दूसरे दिन भी ओपीडी में पसरा सन्नाटा, पर्ची काउंटर खाली; मौसमजनित बीमारियों से परेशान मरीज लौटे बैरंग, इमरजेंसी में जारी रही चिकित्सा सेवा

केटी न्यूज/बक्सर

बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ (भासा) के आह्वान पर चिकित्सकों की कार्यबंदी का असर अब सीधे मरीजों की परेशानी के रूप में सामने आने लगा है। पांच सूत्री मांगों को लेकर गुरुवार से शुरू अनिश्चितकालीन ओपीडी बहिष्कार के दूसरे दिन शुक्रवार को भी सदर अस्पताल की नियमित चिकित्सा व्यवस्था लगभग ठप रही। अस्पताल में चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद रहे, लेकिन ओपीडी सेवा बंद होने के कारण सामान्य बीमारी से परेशान मरीजों को बिना इलाज कराए ही लौटना पड़ा। दूसरी ओर, आकस्मिक विभाग में मरीजों की आवाजाही और चिकित्सा सेवा सामान्य रूप से जारी रही।शुक्रवार की सुबह करीब साढ़े नौ बजे सदर अस्पताल के ओपीडी परिसर का नजारा आम दिनों से बिल्कुल अलग था।

जिस परिसर में मरीजों की लंबी कतारें लगी रहती थीं, वहां इक्का-दुक्का लोग ही नजर आए। पर्ची काउंटर भी लगभग खाली पड़ा था। इसके विपरीत आकस्मिक विभाग में मरीजों और उनके परिजनों की चहल-पहल बनी हुई थी।इलाज की उम्मीद लेकर पहुंची चौसा की करीब 50 वर्षीय दुर्गावती देवी ने अस्पताल के गार्ड से पर्ची कटाने के संबंध में जानकारी ली। उन्हें ओपीडी सेवा बंद होने की जानकारी देकर वापस जाने को कहा गया। बनारपुर निवासी लालमुनि सिंह करीब आधे घंटे से अस्पताल में चिकित्सक से मिलने की कोशिश कर रहे थे। उन्होंने बताया कि अक्सर सिर में दर्द रहता है और चिकित्सक से जांच कराने के लिए अस्पताल आए थे, लेकिन ओपीडी बंद होने के कारण उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका।

नाट मंझरिया से अपनी बहन का इलाज कराने पहुंचे अलगू अंसारी को भी निराश होकर लौटना पड़ा। इसी तरह उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती कोटवा से इलाज के लिए पहुंचीं शीतला देवी को भी ओपीडी बंद रहने के कारण वापस जाना पड़ा।ओपीडी सेवा ठप रहने का असर ऐसे समय में पड़ रहा है, जब जिले में मौसम बदलने के साथ सर्दी, खांसी, बुखार समेत अन्य मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। सामान्य तौर पर ऐसे मरीज सदर अस्पताल की ओपीडी में ही चिकित्सकीय परामर्श लेते हैं। गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए सरकारी अस्पताल इलाज का प्रमुख सहारा है। ऐसे में लगातार दूसरे दिन ओपीडी बंद रहने से उनकी परेशानी और बढ़ गई है।

आर्थिक रूप से सक्षम मरीज निजी चिकित्सकों का रुख कर रहे हैं, लेकिन गरीब मरीजों के सामने विकल्प सीमित हैं।भासा की बक्सर जिला इकाई के सचिव डॉ. संजय सिंह ने कहा कि मरीजों की सेवा करना चिकित्सकों का धर्म है और डॉक्टर भी मरीजों का इलाज करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि कार्यस्थल को भयमुक्त बनाने सहित पांच सूत्री मांगों को लेकर चिकित्सकों ने कार्यबंदी का निर्णय लिया है। उनके अनुसार 72 घंटे बीतने के बावजूद सरकार की ओर से मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होने के कारण अनिश्चितकालीन ओपीडी बहिष्कार जारी रखने का फैसला लिया गया है।