दुष्कर्म के आरोपी दोनों शिक्षकों की नौकरी गई, सरकारी सेवा के रास्ते भी बंद

कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र के सरकारी स्कूल में छात्रा से दुष्कर्म के आरोप में जेल में बंद दोनों शिक्षकों पर शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभागीय जांच में आरोपों के संबंध में दिए गए दोनों शिक्षकों के जवाब को असंतोषजनक पाए जाने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी इंद्र कुमार कर्ण ने शिक्षक अरविंद कुमार और वीरेंद्र पाल को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है।

दुष्कर्म के आरोपी दोनों शिक्षकों की नौकरी गई, सरकारी सेवा के रास्ते भी बंद

__ विभागीय जांच में जवाब असंतोषजनक मिलने पर डीईओ ने की बर्खास्तगी की कार्रवाई, नियम-14 (XI) के तहत भविष्य की सरकारी नौकरी पर भी रोक

केटी न्यूज/डुमरांव।

कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र के सरकारी स्कूल में छात्रा से दुष्कर्म के आरोप में जेल में बंद दोनों शिक्षकों पर शिक्षा विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। विभागीय जांच में आरोपों के संबंध में दिए गए दोनों शिक्षकों के जवाब को असंतोषजनक पाए जाने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी इंद्र कुमार कर्ण ने शिक्षक अरविंद कुमार और वीरेंद्र पाल को सरकारी सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इसके साथ ही नियम-14 (XI) के तहत दोनों के भविष्य में सरकारी नौकरी करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। बर्खास्तगी से संबंधित रिपोर्ट शिक्षा विभाग को भेज दी गई है।मामला 29 अगस्त को उस समय सामने आया, जब ग्रामीण अचानक विद्यालय पहुंचे और दोनों शिक्षकों के मोबाइल की जांच की। मोबाइल में आपत्तिजनक वीडियो मिलने के बाद मामला तूल पकड़ गया और वीडियो वायरल होने लगा।

घटना की जानकारी विद्यालय के प्रधानाध्यापक मो. इमाम अली अंसारी ने डुमरांव बीईओ को दी। बीईओ की रिपोर्ट के आधार पर डीईओ ने दो सितंबर को दोनों शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था।इसके बाद वायरल वीडियो के आधार पर एक छात्रा की मां ने तीन सितंबर को कृष्णाब्रह्म थाने में दोनों शिक्षकों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। प्राथमिकी में प्रधानाध्यापक पर भी घटना की जानकारी होने के बावजूद उसे छिपाने का आरोप लगाया गया। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए प्रधानाध्यापक सहित दोनों शिक्षकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जांच के दौरान पुलिस ने पटना के चार होटल के कमरों को भी सील किया है।

इधर, शिक्षा विभाग ने निलंबन के बाद बर्खास्तगी की विभागीय प्रक्रिया शुरू की। डीपीओ (समग्र) अनन्या को संचालन पदाधिकारी तथा डीपीओ (माध्यमिक) सुरेश प्रसाद को स्थापना पदाधिकारी बनाया गया। जेल में बंद होने के कारण दोनों शिक्षकों को केंद्रीय कारा के जेलर के माध्यम से आरोप पत्र उपलब्ध कराया गया। दोनों ने जेल प्रशासन के जरिए अपना लिखित पक्ष विभाग को भेजा।विभागीय जांच अधिकारियों ने प्राप्त जवाब और मामले से जुड़े तमाम पहलुओं की समीक्षा की। जांच में दोनों शिक्षकों का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। रिपोर्ट के आधार पर डीईओ ने बर्खास्तगी का आदेश जारी कर दिया। विभाग की इस कार्रवाई के बाद दोनों शिक्षकों की सरकारी सेवा समाप्त होने के साथ ही भविष्य में सरकारी नौकरी का रास्ता भी बंद हो गया है।