साइबर ठगों ने बक्सर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के नाम पर फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल बनाकर अधिवक्ताओं-कर्मियों से मांगे रुपये

बक्सर में साइबर अपराधियों ने अब ठगी के लिए न्यायपालिका की साख को भी हथियार बनाना शुरू कर दिया है। इस बार निशाने पर रहीं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश काजल झांब, जिनकी तस्वीर और नाम का इस्तेमाल कर साइबर जालसाजों ने फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल तैयार कर ली।

साइबर ठगों ने बक्सर के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के नाम पर फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल बनाकर अधिवक्ताओं-कर्मियों से मांगे रुपये

__ थाईलैंड नंबर से भेजे गए संदेश, सतर्क हुआ प्रशासन 

केटी न्यूज/बक्सर

बक्सर में साइबर अपराधियों ने अब ठगी के लिए न्यायपालिका की साख को भी हथियार बनाना शुरू कर दिया है। इस बार निशाने पर रहीं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश काजल झांब, जिनकी तस्वीर और नाम का इस्तेमाल कर साइबर जालसाजों ने फर्जी व्हाट्सएप प्रोफाइल तैयार कर ली। इसके जरिए जिले के अधिवक्ताओं और न्यायालय कर्मियों को पैसे मांगने वाले संदेश भेजे गए, जिससे कुछ देर के लिए कोर्ट परिसर में हड़कंप जैसी स्थिति बन गई।जानकारी के अनुसार, विदेशी नंबर से संचालित इस व्हाट्सएप अकाउंट से कई लोगों को मैसेज भेजकर तत्काल 50 हजार रुपये की जरूरत बताई गई।

संदेश भेजने वाले ने खुद को प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश बताते हुए भरोसा जीतने की कोशिश की। न्यायिक अधिकारी की तस्वीर लगी होने के कारण शुरुआत में कुछ लोग भ्रमित भी हो गए, लेकिन जल्द ही मामला संदिग्ध प्रतीत होने लगा।जैसे ही इसकी जानकारी न्यायालय प्रशासन तक पहुंची, अधिकारियों ने तत्काल सतर्कता दिखाते हुए पुलिस और साइबर थाना को सूचना दी। तकनीकी जांच में शुरुआती तौर पर यह सामने आया कि जिस नंबर से संदेश भेजे गए, वह थाईलैंड कंट्री कोड (+66) से जुड़ा हुआ है। इसके बाद साइबर पुलिस ने नंबर की ट्रैकिंग और डिजिटल जांच शुरू कर दी है।पुलिस अधिकारियों का कहना है कि साइबर अपराधी अब लोगों का भरोसा जीतने के लिए बड़े अधिकारियों, डॉक्टरों, पुलिस पदाधिकारियों और न्यायिक अधिकारियों की पहचान का दुरुपयोग कर रहे हैं।

उनका मकसद सामने वाले को मानसिक दबाव में डालकर जल्द पैसे ट्रांसफर करवाना होता है। इस मामले में समय रहते सच्चाई सामने आ जाने से किसी बड़े वित्तीय नुकसान की सूचना नहीं मिली है।अविनाश कुमार ने लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए कहा कि सोशल मीडिया या व्हाट्सएप पर आने वाले किसी भी पैसे मांगने वाले संदेश पर तुरंत भरोसा न करें। यदि कोई परिचित, अधिकारी या रिश्तेदार अचानक पैसे मांगता है, तो पहले कॉल या अन्य माध्यम से उसकी पुष्टि जरूर करें। उन्होंने कहा कि साइबर ठग लगातार नए तरीके अपना रहे हैं, इसलिए डिजिटल सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।इस घटना के बाद न्यायिक महकमे में भी चिंता बढ़ गई है। सवाल यह उठ रहा है कि जब साइबर अपराधी न्यायपालिका जैसे संवेदनशील संस्थानों की पहचान का दुरुपयोग करने से नहीं हिचक रहे, तब आम लोगों को और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।