आवास की आस में बैठे 643 परिवार, आमसभा में सूची से गायब मिले नाम

प्रधानमंत्री आवास योजना (आवास प्लस 2024) के जरिए गरीबों को पक्का मकान देने की कवायद डुमरांव प्रखंड की कोरानसराय पंचायत में विवादों के घेरे में आ गई है। 29 सितंबर को आयोजित आमसभा में आवास योजना की सूची का वाचन शुरू हुआ तो बड़ी संख्या में ऐसे आवेदकों के नाम सूची से गायब मिले, जिनका नाम पहले सर्वे और पोर्टल पर दर्ज बताया जा रहा था।

आवास की आस में बैठे 643 परिवार, आमसभा में सूची से गायब मिले नाम

__ कोरानसराय में आवास प्लस 2024 की सूची पर उठे गंभीर सवाल, दिव्यांग परिवार भी चयन से बाहर; ग्रामीणों ने जांच में गड़बड़ी का लगाया आरोप

केटी न्यूज/डुमरांव।

प्रधानमंत्री आवास योजना (आवास प्लस 2024) के जरिए गरीबों को पक्का मकान देने की कवायद डुमरांव प्रखंड की कोरानसराय पंचायत में विवादों के घेरे में आ गई है। 29 सितंबर को आयोजित आमसभा में आवास योजना की सूची का वाचन शुरू हुआ तो बड़ी संख्या में ऐसे आवेदकों के नाम सूची से गायब मिले, जिनका नाम पहले सर्वे और पोर्टल पर दर्ज बताया जा रहा था। करीब 643 नामों के गायब होने के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और पूरी चयन प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए।

__ 1330 नाम दर्ज, आमसभा में पढ़े गए महज 687

जानकारी के अनुसार, कोरानसराय पंचायत में आवास प्लस 2024 के तहत कुल 1,330 लाभार्थियों के नाम जोड़े गए थे। इनमें 741 नाम आवास सहायक के माध्यम से तथा 589 नाम सेल्फ सर्वे के जरिए पोर्टल पर दर्ज किए गए थे। लेकिन आमसभा में महज 687 नामों का ही वाचन किया गया। ऐसे में करीब 643 आवेदकों के नाम सूची से बाहर होने को लेकर ग्रामीणों ने आपत्ति जताई। ग्रामीणों का आरोप है कि पात्रता की जांच के दौरान वास्तविक जरूरतमंदों के नाम हटाकर कुछ अपात्र लोगों को सूची में जगह दी गई है।

__ जिसे बीडीओ ने खुद देखा, उसका नाम भी गायब

मामले की गंभीरता का अंदाजा वार्ड संख्या 10 की गोड बस्ती के गणेश गौड़ के परिवार से लगाया जा सकता है। परिवार के करीब आधा दर्जन सदस्य आज भी झोपड़ी में रहने को मजबूर हैं। परिवार में तीन सदस्य दिव्यांग बताए जाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, तत्कालीन बीडीओ संदीप कुमार पांडेय ने स्वयं मौके पर पहुंचकर परिवार की स्थिति का जायजा लिया था और आवास सहायक को गणेश गौड़ का नाम प्राथमिकता के आधार पर जोड़ने का निर्देश दिया था। दावा है कि निर्देश के बाद नाम सूची में दर्ज भी हुआ, लेकिन आमसभा में वही नाम गायब मिला।

__ तीन स्तर की जांच पर उठे सवाल

ग्रामीणों का कहना है कि यदि सर्वे, सत्यापन और जांच के बाद नाम पोर्टल पर दर्ज किए गए थे तो अंतिम सूची में इतनी बड़ी संख्या में नाम कैसे गायब हो गए। इससे आवास प्लस 2024 की चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्रामीणों ने वरीय अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, पात्र परिवारों के नाम दोबारा सत्यापित करने और अपात्र लाभार्थियों को सूची से हटाने की मांग की है। खासकर दिव्यांग एवं अत्यंत गरीब परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर आवास योजना का लाभ देने की मांग जोर पकड़ रही है।