चौसा के अखाड़े से एशियन गेम्स तक पहुंचा अविनाश का सफर
जिस मिट्टी में कभी कुश्ती के दांव-पेच सीखने के लिए अविनाश कुमार ने अखाड़े का रुख किया था, उसी चौसा की मिट्टी का यह लाल अब अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर भारत के साथ खड़ा नजर आएगा। जापान में आयोजित होने वाले एशियन गेम्स में अविनाश कुमार भारतीय कुश्ती टीम के स्पोर्टिंग स्टाफ का हिस्सा होंगे।

__ जापान में भारतीय कुश्ती दल के साथ दिखेंगे बक्सर के लाल, स्पोर्टिंग स्टाफ के रूप में मिली अहम जिम्मेदारी
केटी न्यूज/बक्सर।
जिस मिट्टी में कभी कुश्ती के दांव-पेच सीखने के लिए अविनाश कुमार ने अखाड़े का रुख किया था, उसी चौसा की मिट्टी का यह लाल अब अंतरराष्ट्रीय खेल मंच पर भारत के साथ खड़ा नजर आएगा। जापान में आयोजित होने वाले एशियन गेम्स में अविनाश कुमार भारतीय कुश्ती टीम के स्पोर्टिंग स्टाफ का हिस्सा होंगे। उनकी इस उपलब्धि ने न सिर्फ चौसा, बल्कि पूरे बक्सर और बिहार के कुश्ती जगत को गौरवान्वित किया है।ग्रामीण परिवेश से निकलकर एशियाई खेलों जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन तक पहुंचने की अविनाश की यात्रा संघर्ष, अनुशासन और लगातार मेहनत की कहानी है। खिलाड़ी के रूप में कुश्ती से जुड़े अविनाश ने वर्षों तक इस खेल को करीब से समझा और अपने अनुभव तथा मेहनत के बल पर अब भारतीय कुश्ती दल की जिम्मेदारियों में शामिल होने का मुकाम हासिल किया है।

एशियन गेम्स में भारतीय टीम के साथ स्पोर्टिंग स्टाफ के रूप में जिम्मेदारी मिलना उनके लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। यह अवसर उन्हें भारतीय कुश्ती से जुड़े खिलाड़ियों के साथ अंतरराष्ट्रीय मंच पर काम करने का मौका देगा। बक्सर के कुश्ती प्रेमियों का कहना है कि अविनाश की यह उपलब्धि जिले की खेल प्रतिभाओं के लिए उत्साह बढ़ाने वाली है।बक्सर कुश्ती संघ के अनुसार, बिहार की धरती से भारतीय कुश्ती टीम के स्पोर्टिंग स्टाफ के रूप में एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों में अविनाश कुमार की उपलब्धि महत्वपूर्ण है। उनकी सफलता से ग्रामीण क्षेत्रों में कुश्ती को लेकर युवाओं का उत्साह बढ़ने की उम्मीद है।

अविनाश की उपलब्धि पर भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष संजय सिंह, पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह, बिहार कुश्ती संघ के अध्यक्ष विशाल सिंह, सचिव विनय कुमार, बक्सर कुश्ती संघ के अध्यक्ष अशोक सिंह और सचिव विकास राज समेत कुश्ती से जुड़े लोगों ने बधाई दी है।कुश्ती संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि अविनाश की सफलता यह साबित करती है कि सीमित संसाधनों के बीच ग्रामीण और छोटे शहरों से निकलने वाली प्रतिभाएं भी निरंतर मेहनत और समर्पण के बूते राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं। चौसा से जापान तक पहुंचे अविनाश की यह उपलब्धि बक्सर की खेल प्रतिभाओं के लिए नई राह और नई उम्मीद का संदेश लेकर आई है।

