खेतों की मेड़ से राष्ट्रीय मैदान तक पहुंचा नया भोजपुर का नसीम, हुआ जोरदार स्वागत

डुमरांव स्टेशन मंगलवार को खेल प्रेमियों के उत्साह, नारों और तालियों से गूंज उठा। मौका था नया भोजपुर गांव के उभरते फुटबॉल खिलाड़ी मोहम्मद नसीम के स्वागत का, जिन्होंने लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय स्तर की अंडर-20 फुटबॉल प्रतियोगिता में बिहार टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए कप्तानी का जिम्मा संभाला।

खेतों की मेड़ से राष्ट्रीय मैदान तक पहुंचा नया भोजपुर का नसीम, हुआ जोरदार स्वागत

__ किसान के बेटे ने दूसरी बार बिहार टीम की कमान संभाल बढ़ाया डुमरांव का गौरव, स्टेशन पर हुआ जोरदार स्वागत

केटी न्यूज/डुमरांव

डुमरांव स्टेशन मंगलवार को खेल प्रेमियों के उत्साह, नारों और तालियों से गूंज उठा। मौका था नया भोजपुर गांव के उभरते फुटबॉल खिलाड़ी मोहम्मद नसीम के स्वागत का, जिन्होंने लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय स्तर की अंडर-20 फुटबॉल प्रतियोगिता में बिहार टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए कप्तानी का जिम्मा संभाला। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में आयोजित स्वामी विवेकानंद अंडर-20 राष्ट्रीय पुरुष फुटबॉल चैंपियनशिप से लौटने पर स्थानीय युवाओं, खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों ने फूल-मालाओं से उनका भव्य अभिनंदन किया।स्टेशन परिसर में नसीम के स्वागत के दौरान युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। “डुमरांव का लाल कैसा हो, नसीम भाई जैसा हो” जैसे नारों के बीच लोगों ने उन्हें कंधों पर उठाकर सम्मान दिया।

स्वागत कार्यक्रम में बक्सर राजद के जिला युवा महासचिव सोनू खान, पूर्व राष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी इस्लाम अंसारी, कोच चांद खान समेत कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। सभी ने नसीम की उपलब्धि को जिले के लिए गर्व की बात बताया।राष्ट्रीय प्रतियोगिता में बिहार टीम ने कुल चार मुकाबले खेले, जिसमें एक मैच में जीत, दो मुकाबलों में ड्रॉ और एक में हार का सामना करना पड़ा। पूरे टूर्नामेंट में नसीम ने कप्तान के रूप में अपनी नेतृत्व क्षमता, अनुशासन और खेल कौशल का प्रभाव छोड़ा। लगातार दूसरी बार राष्ट्रीय चैंपियनशिप के लिए चयनित होना उनकी मेहनत और प्रतिभा का बड़ा प्रमाण माना जा रहा है। इससे पहले वर्ष 2025 में भी वे बिहार टीम का हिस्सा रह चुके हैं।

नया भोजपुर वार्ड संख्या-5 निवासी नसीम का सफर संघर्ष और मेहनत की मिसाल है। साधारण किसान परिवार से आने वाले नसीम के पिता मोहम्मद कलाम खान खेती-बाड़ी कर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि माता फमीदा खातून गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने बेटे के सपनों को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया। चार भाइयों में सबसे छोटे नसीम को बड़े भाई नदीम, जसीम और वसीम का लगातार सहयोग मिलता रहा।नसीम ने फुटबॉल की शुरुआती ट्रेनिंग डुमरांव के डीके कॉलेज मैदान से शुरू की थी। यही मैदान उनके सपनों की पहली उड़ान बना। उनके कोच चांद खान बताते हैं कि नसीम शुरू से ही मेहनती और अनुशासित खिलाड़ी रहे हैं।

कठिन परिस्थितियों में भी उन्होंने अभ्यास नहीं छोड़ा और हर दिन खुद को बेहतर बनाने का प्रयास किया।हाल ही में मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले नसीम पढ़ाई और खेल दोनों में संतुलन बनाकर आगे बढ़ रहे हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि उन्हें सही अवसर और संसाधन मिले तो वे आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर सकते हैं। नसीम की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण इलाकों में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं, जरूरत सिर्फ उन्हें सही मंच देने की है।