राम-वियोग में दशरथ ने त्यागे प्राण, भरत की भक्ति ने जीत लिया श्रद्धालुओं का दिल

कहीं पुत्र-वियोग में महाराज दशरथ का करुण विलाप, कहीं प्रभु श्रीराम को अयोध्या वापस ले जाने के लिए भरत की मार्मिक विनती, तो कहीं बचपन की मित्रता निभाते भगवान श्रीकृष्ण की अपने सखा सुदामा पर असीम कृपा। भक्ति, प्रेम, त्याग और समर्पण के इन अनुपम दृश्यों ने मंगलवार को बक्सर के विजयादशमी महोत्सव को भावनाओं के सागर में बदल दिया।

राम-वियोग में दशरथ ने त्यागे प्राण, भरत की भक्ति ने जीत लिया श्रद्धालुओं का दिल

__ विजयादशमी महोत्सव के दसवें दिन दशरथ मरण और भरत मनावन का भावपूर्ण मंचन, सुदामा चरित्र में दिखी कृष्ण-सुदामा की अनुपम मित्रता

केटी न्यूज/बक्सर।

कहीं पुत्र-वियोग में महाराज दशरथ का करुण विलाप, कहीं प्रभु श्रीराम को अयोध्या वापस ले जाने के लिए भरत की मार्मिक विनती, तो कहीं बचपन की मित्रता निभाते भगवान श्रीकृष्ण की अपने सखा सुदामा पर असीम कृपा। भक्ति, प्रेम, त्याग और समर्पण के इन अनुपम दृश्यों ने मंगलवार को बक्सर के विजयादशमी महोत्सव को भावनाओं के सागर में बदल दिया। श्रीरामलीला समिति, बक्सर के तत्वावधान में आयोजित 20 दिवसीय महोत्सव के दसवें दिन रामलीला और कृष्णलीला के मंचन को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। देर रात तक पूरा पंडाल ‘जय श्रीराम’ और ‘जय श्रीकृष्ण’ के जयघोष से गूंजता रहा।

रामलीला मंच पर रात्रिकालीन कार्यक्रम की शुरुआत ‘दशरथ मरण’ प्रसंग से हुई। कथा के अनुसार, मंत्री सुमंत प्रभु श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण को गंगा तट पर छोड़कर अयोध्या लौटते हैं। वनगमन का वृत्तांत सुनते ही महाराज दशरथ राम-वियोग में व्याकुल हो उठते हैं। पुत्र के वियोग का असह्य दुख उन्हें भीतर तक तोड़ देता है और विलाप करते-करते वे प्राण त्याग देते हैं। कलाकारों ने अपने सजीव अभिनय और प्रभावशाली संवादों से इस प्रसंग को इतना मार्मिक बना दिया कि दर्शकों की आंखें नम हो गईं।

__ भरत की विनती, राम की मर्यादा और चरण पादुका का संदेश

इसके बाद चित्रकूट में भरत मनावन का प्रसंग मंचित हुआ। पिता महाराज दशरथ के निधन का समाचार मिलने पर भरत ननिहाल से अयोध्या लौटते हैं। अंतिम संस्कार संपन्न करने के बाद वे प्रभु श्रीराम को वापस अयोध्या लाने के लिए चित्रकूट रवाना होते हैं।इस प्रसंग को जीवंत बनाने के लिए शाम चार बजे किला मैदान स्थित रामलीला मंच से भरत जी की रथयात्रा निकाली गई। नगर भ्रमण करते हुए यात्रा स्टेशन रोड स्थित कमलदह पहुंची, जहां प्रसंगों के मंचन के बाद कार्यक्रम आगे बढ़ा। मार्ग में निषादराज से भेंट और फिर चित्रकूट में प्रभु श्रीराम से मिलन का दृश्य दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहा।

भरत बार-बार श्रीराम से अयोध्या लौटकर राजकाज संभालने की विनती करते हैं, लेकिन पिता के वचन की मर्यादा निभाने के लिए श्रीराम वनवास पूरा करने के अपने संकल्प पर अडिग रहते हैं। अंततः वे भरत को अपनी चरण पादुका सौंप देते हैं। भरत उन पादुकाओं को अयोध्या ले जाकर राजसिंहासन पर स्थापित करते हैं और स्वयं श्रीराम के प्रतिनिधि के रूप में राजकाज संभालने का संकल्प लेते हैं। यह प्रसंग त्याग, भ्रातृप्रेम और मर्यादा का संदेश देकर दर्शकों को भावविभोर कर गया।

__ सुदामा के मुट्ठीभर चावल पर बरसी कृपा

दिन में श्री बाल कृष्ण रासलीला रामलीला मंडल, वृंदावन के कलाकारों ने स्वामी मोहन श्याम भारद्वाज के निर्देशन में ‘सुदामा चरित्र भाग-2’ का मंचन किया। गरीबी से जूझ रहे सुदामा पत्नी वसुंधरा के आग्रह पर अपने बालसखा श्रीकृष्ण से मिलने द्वारका पहुंचते हैं। सुदामा द्वारा प्रेमपूर्वक भेंट किए गए मुट्ठीभर चावल को श्रीकृष्ण बड़े आनंद से स्वीकार करते हैं और अपने सखा पर कृपा बरसाते हैं। कृष्ण-सुदामा की निस्वार्थ मित्रता और भगवान के प्रेम का यह दृश्य दर्शकों के लिए भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभूति का केंद्र बना रहा।

__ संस्कृति और आस्था का संगम है रामलीला महोत्सव

रामलीला समिति के संयुक्त सचिव सह मीडिया प्रभारी हरिशंकर गुप्ता ने कहा कि रामलीला और कृष्णलीला केवल मनोरंजन के साधन नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत, नैतिक मूल्यों और आध्यात्मिक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम हैं। उन्होंने कहा, “दशरथ मरण, भरत मनावन और सुदामा चरित्र जैसे प्रसंग हमें त्याग, मर्यादा, सच्ची मित्रता और पारिवारिक प्रेम का संदेश देते हैं। समिति का प्रयास है कि विजयादशमी महोत्सव के माध्यम से बक्सर की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपरा और अधिक समृद्ध हो।”मंचन के दौरान बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। भीड़ का आलम यह था कि पंडाल के बाहर तक लोग खड़े होकर लीला का आनंद लेते रहे। आयोजन में समिति के सचिव बैकुंठनाथ शर्मा, कोषाध्यक्ष सुरेश संगम, सुशील मानसिंहका, राजेश चौरसिया, ब्रजमोहन सेठ, पवन चौरसिया और उदय सर्राफ जोखन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।