एमवी कॉलेज में आणविक जीव विज्ञान पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय (एमवी कॉलेज), बक्सर के मानस सभागार में सोमवार को जंतु विज्ञान एवं वनस्पति विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘जीवन विज्ञान में आणविक जीव विज्ञान का अंतरविषयक दृष्टिकोण’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई।

एमवी कॉलेज में आणविक जीव विज्ञान पर राष्ट्रीय संगोष्ठी

__ आणविक जीव विज्ञान से खुले जीवन विज्ञान के नए आयाम

__ एमवी कॉलेज में राष्ट्रीय संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने डीएनए, जीन अभियांत्रिकी, कैंसर अनुसंधान और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग पर डाला प्रकाश

केटी न्यूज/बक्सर।

महर्षि विश्वामित्र महाविद्यालय (एमवी कॉलेज), बक्सर के मानस सभागार में सोमवार को जंतु विज्ञान एवं वनस्पति विज्ञान विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘जीवन विज्ञान में आणविक जीव विज्ञान का अंतरविषयक दृष्टिकोण’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित हुई। संगोष्ठी में देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे विशेषज्ञों ने आणविक जीव विज्ञान के बदलते स्वरूप और चिकित्सा, कृषि, पर्यावरण तथा जैव प्रौद्योगिकी में इसके बढ़ते महत्व पर विस्तार से चर्चा की।कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि, मुख्य वक्ता, प्राचार्य एवं अन्य अतिथियों ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। कार्यक्रम का संचालन स्नातकोत्तर इतिहास विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. नवीन शंकर पाठक ने किया।

प्राचार्य एवं संरक्षक प्रो. (डॉ.) कृष्णा कांत सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि 21वीं सदी अंतरविषयक शोध और उच्च शिक्षा की है। जीवन विज्ञान की विभिन्न शाखाओं का समन्वय मानव स्वास्थ्य, कृषि और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा कर रहा है।वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. नवी रंजन ने कहा कि आणविक जीव विज्ञान ने वनस्पति और जंतु विज्ञान के बीच की पारंपरिक सीमाओं को काफी हद तक समाप्त कर दिया है। वहीं संगोष्ठी के संयोजक एवं जंतु विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. अनुराग कुमार ने कहा कि जीन विज्ञान, प्रतिरक्षा विज्ञान, जैव-सूचना विज्ञान और चिकित्सा के समन्वय से गंभीर रोगों के निदान, टीका निर्माण और लक्षित उपचार में क्रांतिकारी बदलाव आया है।वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय, आरा के स्नातकोत्तर वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रो. (डॉ.) आनंद किशोर ने दृश्य-श्रव्य प्रस्तुति के माध्यम से आणविक जीव विज्ञान के मूल सिद्धांतों को समझाया।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग प्रजातियों में विविधता के बावजूद कोशिकीय और आणविक स्तर पर जीवन की मूल संरचना में गहरी समानता है। उन्होंने डीएनए से आरएनए और आरएनए से प्रोटीन निर्माण की प्रक्रिया को समझाते हुए प्रतिलोम अनुलेखन तथा कैंसर अनुसंधान में इसके महत्व पर प्रकाश डाला।स्नातकोत्तर जंतु विज्ञान विभाग के प्रो. दीनानाथ पंडित ने आणविक जीव विज्ञान को विज्ञान की विभिन्न शाखाओं को जोड़ने वाला महासेतु बताया।उन्होंने प्रतिकृति, अनुलेखन, अनुवादन और जीन नियंत्रण को इसके चार प्रमुख आधार स्तंभ बताया। उन्होंने कृत्रिम आठ-क्षारीय डीएनए, अंतरिक्ष जीव विज्ञान, जैव-विविधता संरक्षण में पर्यावरणीय डीएनए तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग की चर्चा की। उन्होंने आगाह किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग विवेकपूर्ण ढंग से किया जाना चाहिए।

मुख्य अतिथि एवं वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. (डॉ.) एन.के. साह ने आणविक जीव विज्ञान, आनुवंशिक अभियांत्रिकी और जैव प्रौद्योगिकी के विकास की यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने 1953 में डीएनए की दोहरी कुंडली संरचना की खोज में एक्स-रे तकनीक के योगदान, आनुवंशिक अभियांत्रिकी, हरित क्रांति तथा आधुनिक फसल प्रजातियों के विकास को रेखांकित किया। उन्होंने कोशिकाओं की प्राकृतिक मृत्यु की प्रक्रिया और कैंसर जैसे रोगों से इसके संबंध को भी समझाया।संगोष्ठी के समापन चरण में वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष डॉ. नवी रंजन द्वारा लिखित दो पुस्तकों का अतिथियों ने विमोचन किया। प्राचार्य ने इसे महाविद्यालय के लिए गौरवपूर्ण अवसर बताया। अंत में हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज कुमार चौधरी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। राष्ट्रगान और अल्पाहार के साथ संगोष्ठी का समापन हुआ।