काली बाबू चौक के नाम पर सियासी संग्राम, राजपूत समाज ने खोला मोर्चा

बक्सर के गोलंबर स्थित काली बाबू चौक का नाम बदलकर ‘सेवा ज्योति चौक’ करने के प्रस्ताव ने स्थानीय राजनीति और सामाजिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। प्रस्ताव के विरोध में शनिवार को राजपूत समाज के दर्जनों लोगों ने चौक पर सांकेतिक प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई।

काली बाबू चौक के नाम पर सियासी संग्राम, राजपूत समाज ने खोला मोर्चा

__ प्रतिमा स्थल के ऐतिहासिक महत्व का हवाला देकर नाम बदलने के प्रस्ताव का विरोध, सरकार को आंदोलन की चेतावनी

केटी न्यूज/बक्सर।

बक्सर के गोलंबर स्थित काली बाबू चौक का नाम बदलकर ‘सेवा ज्योति चौक’ करने के प्रस्ताव ने स्थानीय राजनीति और सामाजिक हलकों में हलचल तेज कर दी है। प्रस्ताव के विरोध में शनिवार को राजपूत समाज के दर्जनों लोगों ने चौक पर सांकेतिक प्रदर्शन कर सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारियों ने इसे स्वतंत्रता सेनानी काली बाबू की ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा मामला बताते हुए नाम बदलने के किसी भी प्रयास का विरोध किया। साथ ही चेतावनी दी कि यदि प्रस्ताव पर आगे कार्रवाई हुई, तो समाज व्यापक आंदोलन छेड़ने को बाध्य होगा।शनिवार सुबह करीब आठ बजे चौक पर जुटे लोगों ने बैठक कर विरोध की रणनीति पर चर्चा की। इस दौरान भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की गई।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि चौक का नाम केवल पहचान नहीं, बल्कि बक्सर के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन की स्मृतियों से जुड़ा है। ऐसे में नाम बदलने का प्रस्ताव स्वीकार्य नहीं है।राजपूत समाज के वरिष्ठ नेता योगेंद्र सिंह ने कहा कि शहर में पहले से कई चौक हैं, लेकिन उनके नाम बदलने की पहल नहीं की जा रही है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि सरकार नाम बदलने को लेकर गंभीर है, तो अंबेडकर चौक और ज्योति प्रकाश चौक का नाम बदलकर दिखाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज अपने महापुरुषों के सम्मान से समझौता नहीं करेगा।समाजसेवी अरविंद सिंह ने काली बाबू के योगदान को याद करते हुए कहा कि वे अगस्त 1942 के क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष करने के साथ गरीबों और नाविकों के हितों के लिए भी आवाज उठाई थी।

उनके अनुसार, काली बाबू ने तत्कालीन अनुमंडलाधिकारी को तिरंगा सौंपकर शहर में भ्रमण कराया था तथा बक्सर में बड़ा बाजार की स्थापना में भी योगदान दिया था।रामजी सिंह ने तंज कसते हुए कहा कि यदि नाम बदलने से ही विकास संभव है, तो भाजपा कार्यालय का नाम भी ‘सेवा ज्योति भवन’ कर दिया जाना चाहिए।गौरतलब है कि स्वर्गीय काली प्रसाद सिंह के प्रतिमा स्थल का शिलान्यास नौ अक्टूबर 1993 को तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने किया था। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सांसद महाराजा कमल सिंह ने की थी, जबकि तत्कालीन जल संसाधन मंत्री जगदानंद सिंह और न्यायमूर्ति उदय प्रताप सिंह भी मौजूद थे।प्रदर्शन में अरविंद सिंह, रामराज सिंह, कृष्णा सिंह, पप्पू सिंह, गणेश सिंह, रामनाथ सिंह, संजय सिंह, संतोष सिंह, डॉ. ए.के. सिंह, विजय प्रताप सिंह और रामजी सिंह सहित कई लोग शामिल रहे।