एक हिन्दी दैनिक अखबार पर एक करोड़ की मानहानि के मुकदमे से बक्सर में हलचल, खबरों की भाषा पर उठे सवाल

एक करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे ने बक्सर में पत्रकारिता की भाषा, खबरों की तथ्यात्मक शुद्धता और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। वैष्णवी ग्रुप के चेयरमैन सह भाजपा नेता एवं समाजसेवी प्रदीप राय ने एक दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित खबरों को असत्य, भ्रामक और मानहानिकारक बताते हुए उसके खिलाफ बक्सर न्यायालय में मुकदमा दाखिल किया है।

एक हिन्दी दैनिक अखबार पर एक करोड़ की मानहानि के मुकदमे से बक्सर में हलचल, खबरों की भाषा पर उठे सवाल

__ कर बकाया को ‘टैक्स चोरी’ बताने पर वैष्णवी ग्रुप के चेयरमैन सह भाजपा नेता  प्रदीप राय ने जताई आपत्ति, अधिवक्ता विष्णुदत्त द्विवेदी के मुताबिक संपादक से ब्यूरो चीफ तक आठ लोग प्रतिवादी

केटी न्यूज/बक्सर।

एक करोड़ रुपये के मानहानि मुकदमे ने बक्सर में पत्रकारिता की भाषा, खबरों की तथ्यात्मक शुद्धता और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। वैष्णवी ग्रुप के चेयरमैन सह भाजपा नेता एवं समाजसेवी प्रदीप राय ने एक दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित खबरों को असत्य, भ्रामक और मानहानिकारक बताते हुए उसके खिलाफ बक्सर न्यायालय में मुकदमा दाखिल किया है। मामले में अखबार के ब्यूरो चीफ, संपादक, प्रादेशिक प्रभारी, मालिक, मुद्रक एवं प्रकाशक समेत कुल आठ लोगों को प्रतिवादी बनाया गया है। वादी के अधिवक्ता विष्णुदत्त द्विवेदी के अनुसार, प्रकाशित खबरों से उनके मुवक्किल की सामाजिक प्रतिष्ठा, व्यावसायिक छवि और सार्वजनिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

__ 'कर बकाया’ और ‘कर चोरी’ में अंतर का सवाल

अधिवक्ता विष्णुदत्त द्विवेदी के अनुसार, विवाद की मुख्य वजह खबरों में कथित कर बकाया को ‘टैक्स चोरी’ जैसे गंभीर शब्दों के साथ प्रस्तुत करना है। उन्होंने बताया कि संबंधित समाचार पत्र में 6, 7, 8, 9, 10, 12 और 13 फरवरी 2026 को लगातार खबरें प्रकाशित की गई थीं। इसके बाद 8, 9, 10 और 11 सितंबर 2026 को भी पेट्रोल पंप में होल्डिंग टैक्स तथा भू-निबंधन कर की कथित चोरी से संबंधित खबरें प्रमुखता से प्रकाशित की गईं।वादी पक्ष का कहना है कि किसी कर का बकाया होना अपने आप में जानबूझकर कर चोरी करने का प्रमाण नहीं है। दोनों स्थितियों के बीच कानूनी और तथ्यात्मक अंतर है। ऐसे में पर्याप्त तथ्यों और आधिकारिक पुष्टि के बिना किसी व्यक्ति के संबंध में ‘टैक्स चोरी’ जैसे निष्कर्षात्मक शब्दों का इस्तेमाल उसकी सार्वजनिक छवि को प्रभावित कर सकता है। अधिवक्ता के मुताबिक, ‘फोन पर दी गई धमकी’ जैसे शीर्षकों पर भी आपत्ति जताई गई है।

__ नोटिस के बाद न्यायालय पहुंचा मामला

अधिवक्ता द्विवेदी ने बताया कि कथित आपत्तिजनक खबरों के संबंध में विपक्षी पक्ष को कानूनी नोटिस भेजा गया था। उनके अनुसार, नोटिस का संतोषजनक जवाब नहीं मिलने के बाद मानहानि का मुकदमा दाखिल करने का निर्णय लिया गया। वादी पक्ष का आरोप है कि संबंधित प्रकाशनों से पाठकों के बीच उनके मुवक्किल की ऐसी छवि बनी, मानो वह गंभीर अनियमितताओं में संलिप्त हों। हालांकि, इन आरोपों की सत्यता का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में ही होगा।

__ पत्रकारिता की जवाबदेही पर बहस

मामले ने एक बार फिर प्रेस की स्वतंत्रता और व्यक्ति की प्रतिष्ठा के अधिकार के बीच संतुलन का सवाल खड़ा किया है। जनहित में अनियमितताओं को उजागर करना पत्रकारिता की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है, लेकिन खबरों में तथ्यात्मक सटीकता, आरोपों की उचित पुष्टि और शब्दों का सावधानीपूर्वक चयन भी जरूरी है। वहीं, मानहानि के आरोपों पर संबंधित समाचार पत्र का पक्ष और न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्य भी महत्वपूर्ण होंगे।अधिवक्ता ने दावा किया कि उपलब्ध जानकारी के अनुसार, बक्सर न्यायालय के सौ वर्ष से अधिक के इतिहास में यह अपनी तरह का पहला मानहानि मुकदमा है। हालांकि, इस ऐतिहासिक दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल, एक करोड़ रुपये के इस मुकदमे को लेकर शहर में चर्चा तेज है और आगे की न्यायिक प्रक्रिया पर लोगों की निगाहें टिकी हैं।