परामर्श से टूटा विवाद का सिलसिला, फिर साथ आए पति-पत्नी

कभी शराब की लत तो कभी घरेलू विवाद और आर्थिक जिम्मेदारियों को लेकर होने वाली तकरार ने एक परिवार की खुशियों पर ग्रहण लगा दिया था। पति के व्यवहार से परेशान पत्नी मानसिक तनाव से गुजर रही थी और इसका असर बच्चों पर भी पड़ रहा था। ऐसे मुश्किल दौर में सखी वन स्टॉप सेंटर का परामर्श परिवार के लिए उम्मीद की किरण बना।

परामर्श से टूटा विवाद का सिलसिला, फिर साथ आए पति-पत्नी

__ शराब की लत, घरेलू हिंसा और आर्थिक तंगी से परेशान थी महिला, सखी वन स्टॉप सेंटर की पहल से परिवार में लौटा संवाद और भरोसा

केटी न्यूज/बक्सर।

कभी शराब की लत तो कभी घरेलू विवाद और आर्थिक जिम्मेदारियों को लेकर होने वाली तकरार ने एक परिवार की खुशियों पर ग्रहण लगा दिया था। पति के व्यवहार से परेशान पत्नी मानसिक तनाव से गुजर रही थी और इसका असर बच्चों पर भी पड़ रहा था। ऐसे मुश्किल दौर में सखी वन स्टॉप सेंटर का परामर्श परिवार के लिए उम्मीद की किरण बना। केंद्र के हस्तक्षेप और लगातार काउंसलिंग के बाद पति-पत्नी ने आपसी मतभेद दूर कर वैवाहिक जीवन को नए सिरे से आगे बढ़ाने पर सहमति जताई।मामला सुनीता कुमारी और उसके पति राकेश कुमार से जुड़ा है।

सुनीता ने वन स्टॉप सेंटर पहुंचकर बताया कि पति के शराब सेवन, घर में विवाद करने, मारपीट और मानसिक प्रताड़ना के कारण वह काफी परेशान थी। पति के किसी अन्य महिला से संबंध होने की आशंका को लेकर भी दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। वहीं, परिवार के भरण-पोषण और घरेलू खर्च को लेकर भी तनाव बना रहता था। लगातार विवाद के कारण सुनीता मानसिक रूप से परेशान रहने लगी थी और इसका प्रतिकूल असर बच्चों पर भी पड़ रहा था।

__पति को भी बुलाकर की गई काउंसलिंग

सखी वन स्टॉप सेंटर की टीम ने सुनीता की समस्या को गंभीरता से सुनते हुए उसे आवश्यक परामर्श और मनोसामाजिक सहयोग उपलब्ध कराया। इसके बाद पति को भी केंद्र पर बुलाया गया। प्रारंभ में पति के उपस्थित नहीं होने से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। बाद में उसके पहुंचने पर दोनों पक्षों की अलग-अलग और फिर संयुक्त काउंसलिंग की गई।काउंसलिंग के दौरान पति को शराब का सेवन छोड़ने या कम करने, पत्नी के साथ सम्मानजनक व्यवहार करने, किसी भी प्रकार की हिंसा से दूर रहने तथा परिवार की जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के लिए समझाया गया। वहीं, सुनीता को उसके अधिकारों और उपलब्ध सहायता सेवाओं की जानकारी दी गई।

लगातार परामर्श के बाद दोनों पक्षों ने गलतफहमियां दूर कर विवाद समाप्त करने तथा साथ रहकर वैवाहिक जीवन आगे बढ़ाने की इच्छा जताई। दोनों की सहमति से समझौता और शपथ-पत्र तैयार कराया गया। पति ने भविष्य में हिंसा नहीं करने और परिवार की जिम्मेदारियां निभाने पर सहमति दी।वन स्टॉप सेंटर के हस्तक्षेप से परिवार में दोबारा संवाद और आपसी समझ का माहौल बना। यह मामला बताता है कि समय पर मिला परामर्श, संवेदनशील सहयोग और अधिकारों की जानकारी पारिवारिक संकट को सुलझाने में अहम भूमिका निभा सकती है।