Sunday, 1 November 2026
ब्रेकिंग न्यूज़
नौ महीने में बदलेगी डुमरांव की बदहाल सड़क की तस्वीर, निर्माण की रेस में तीन एजेंसियां कड़ी निगरानी के बीच शुरू हुई स्नातक सेमेस्टर-तीन की परीक्षा, पहले दिन दो परीक्षार्थी रहे गैरहाजिर किसानों को समय पर मिले दलहनी बीज, वितरण व्यवस्था की एसडीएओ ने परखी हकीकत राष्ट्रीय एकता के संदेश के साथ सड़कों पर दौड़े विद्यार्थी, एसडीएम और एसडीपीओ ने दिखाई हरी झंडी 3.6 लीटर शराब के साथ पकड़े गए तस्कर को पांच साल की जेल सरदार पटेल की जयंती पर डुमरांव थाने में मना राष्ट्रीय एकता दिवस, पुलिसकर्मियों ने ली अखंडता की शपथ सरदार पटेल के आदर्शों को आत्मसात कर राष्ट्रीय एकता मजबूत करने का लिया संकल्प शिक्षक अभिषेक त्रिपाठी के निधन से डुमरांव में पसरा मातमी सन्नाटा, हर आंख हुई नम एनएच-922 की चाट में पलटा बालू लदा ट्रक, टला बड़ा हादसा ट्रेन की सीट बनी शराब तस्करी का ठिकाना, बक्सर में दो तस्कर गिरफ्तार नदी पार कर पहुंचाई जा रही थी शराब की खेप, पुलिस की घेराबंदी देख भागे तस्कर गंगा का जलस्तर घटा तो छठ घाटों पर बढ़ी चुनौती, कीचड़ और दलदल से निपटने की तैयारी
Keshav Times

नवरात्र के तीसरे दिन विधिवत हुई मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना, भक्तिमय रहा महौल

शारदीय नवरात्र में घर-आंगन से लेकर मंदिरों तक में सुबह पौ फटते ही भगवती की पूजा-अर्चना शुरू हो जा रही है और रात्रि आरती के बाद ही थम रही है

नवरात्र के तीसरे दिन विधिवत हुई मां चंद्रघंटा की पूजा-अर्चना, भक्तिमय रहा महौल

- अड़हुल का फूल, नारियल और चुनरी-सिंदूर चढ़ाकर भक्त होते रहे शरणागत

केटी न्यूज/डुमरांव 

शारदीय नवरात्र में घर-आंगन से लेकर मंदिरों तक में सुबह पौ फटते ही भगवती की पूजा-अर्चना शुरू हो जा रही है और रात्रि आरती के बाद ही थम रही है। लोग अपने घरों में कलश की पूजा व दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के बाद मंदिरों में मत्था टेकने व पूजा करने पहुंच रहे हैं।  इधर, शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन देवी मंदिरों में माता रानी के तीसरे स्वरुप मां चंद्रघंटा की विधि-विधान से शनिवार को पूजा-अर्चना की गई। सुबह से ही माता के दरबार में पहुंच रहे श्रद्धालु मां को अड़हुल का फूल, नारियल व चुनरी-सिंदूर चढ़ाकर शरणागत हो रहे थे। आचार्य आदित्य तिवारी बतातें हैं कि मां दुर्गा के तीसरे स्वरूप को चंद्रघंटा के नाम से जानते हैं। नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन इन्हीं के विग्रह की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन मां को अन्य भोग के अलावा शक्कर और पंचामृत का भोग लगाना चाहिए। मान्यता है कि यह भोग लगाने से मां दीर्घायु होने का वरदान देती हैं। इनके पूजन-अर्चन से व्यक्तित्व में वैराग्य, सदाचार और संयम बढ़ता है। मां चंद्रघंटा के वंदन से मन को परम सूक्ष्म ध्वनि सुनाई देती है जो मन को बहुत शांति प्रदान करती है। चूंकि इनका वर्ण स्वर्ण जैसा चमकीला है और यह हमेशा आसुरिक शक्तियों के विनाश के लिए सदैव तत्पर रहती हैं, इसलिए इनकी आराधना करने वाले को भी अपूर्व शक्ति का अनुभव होता है। मां चंद्रघंटा की पूजा करने से भक्तों को तेज और ऐशवर्य की प्राप्ति होती है। आचार्य ने बताया कि देवी चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत शांतिदायक और कल्याणकारी है। बाघ पर सवार मां चंद्रघंटा के शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। उनके माथे पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है, इसलिए उन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। दस भुजाओं वाली देवी प्रत्येक हाथ में अलग-अलग शस्त्र से सुशोभित हैं। उनके गले में सफेद फूलों की माला सुशोभित है। यद्यपि वह दुष्टों पर अत्याचार करने और उन्हें नष्ट करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं, फिर भी उनका रूप देखने वाले और उपासक के लिए सौम्यता और शांति से भरा रहता है। वे भक्तों के कष्टों का निवारण शीघ्र ही कर देती हैं। सिंह इनका वाहन है।

इससे जुड़ी खबरें

और देखें ›

टिप्पणियां 0

✍️

टिप्पणी एडमिन की मंज़ूरी के बाद सबको दिखेगी। अभद्र भाषा का प्रयोग न करें।