घरों के ढहने लगे हिस्से, फिर भी नहीं जागा प्रशासन; चूल्हा जलाकर महिलाओं ने किया प्रदर्शन
जलजमाव से घरों को नुकसान, संक्रामक बीमारियों का खतरा और जिम्मेदारों की कथित उदासीनता। इन समस्याओं से परेशान ग्रामीणों का धैर्य शुक्रवार को जवाब दे गया। प्रखंड अंतर्गत स्थानीय गांव के वार्ड संख्या 12 की खपरैला पट्टी और अनुसूचित बस्ती के लोगों ने जल निकासी की मांग को लेकर प्रखंड कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया।

__ जलजमाव से खपरैला पट्टी और अनुसूचित बस्ती के लोग बेहाल, प्रखंड प्रमुख के आश्वासन पर शांत हुए ग्रामीण
केटी न्यूज/चौगाईं।
जलजमाव से घरों को नुकसान, संक्रामक बीमारियों का खतरा और जिम्मेदारों की कथित उदासीनता। इन समस्याओं से परेशान ग्रामीणों का धैर्य शुक्रवार को जवाब दे गया। प्रखंड अंतर्गत स्थानीय गांव के वार्ड संख्या 12 की खपरैला पट्टी और अनुसूचित बस्ती के लोगों ने जल निकासी की मांग को लेकर प्रखंड कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान महिलाओं ने मुख्य गेट पर चूल्हा जलाकर भोजन बनाया और अपनी बदहाली के प्रति प्रशासन का ध्यान आकृष्ट कराया।ग्रामीणों का कहना है कि मोहल्ले में कई महीनों से जलजमाव की समस्या बनी हुई है। नालियों का पानी घरों के सामने जमा रहने से लोगों का आवागमन मुश्किल हो गया है। लगातार पानी जमा रहने के कारण मुन्ना यादव, राजेश यादव, विंध्याचल डोम और राजू डोम के घरों के कुछ हिस्से भी ढह गए हैं।

ग्रामीणों को आशंका है कि समय रहते जल निकासी की व्यवस्था नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। इसके साथ ही गंदे पानी से संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा भी बना हुआ है।ग्रामीणों के मुताबिक, इस समस्या से निजात दिलाने के लिए पहले भी कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। वार्ड सदस्य सोनू कुमार सिंह ने बताया कि नाला जाम होने और जल निकासी की समस्या को लेकर मुखिया समेत संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट कराया गया था। हालांकि, राशि उपलब्ध नहीं होने की बात कहकर जिम्मेदारों ने अपना पल्ला झाड़ लिया।

प्रदर्शन के दौरान सीओ गौतम कुमार और बीडीओ संजू कुमारी समेत अन्य अधिकारियों को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। काफी समझाने-बुझाने के बावजूद लोग हटने को तैयार नहीं थे। अंततः प्रखंड प्रमुख ऋषिकांत सिंह ने तत्काल जल निकासी की व्यवस्था कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद वे अधिकारियों के साथ प्रभावित मोहल्ले में पहुंचे और वहां की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण और आश्वासन के बाद ग्रामीण शांत हुए।अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि जल निकासी का आश्वासन धरातल पर उतरता है या मोहल्लेवासियों को एक बार फिर इंतजार करना पड़ेगा।

