नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैंया लाल की... से गूंजते रहा किला मैदान, भाव विभोर हुए श्रद्धालु

नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैंया लाल की... से गूंजते रहा किला मैदान, भाव विभोर हुए श्रद्धालु
- विजयादशमी महोत्सव के तीसरे दिन नन्द महोत्सव, मनु सतरूपा व रावण तपस्या का हुआ मंचन
केटी न्यूज/बक्सर
सोमवार को बक्सर का ऐतिहासिक किला मैदान नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की... के सुमधुर गायन से गंूज उठा। अवसर था 21 दिवसीय विजयादशमी महोत्सव के तीसरे दिन श्रीकृष्ण के जन्म के बाद बाबा नंद के घर उत्सव के मंचन का। वृंदावन के कलाकारों ने जैसे ही यह लोकप्रिय बधाई गीत का मंचन शुरू किया श्रद्धालुओं से खचाखच भरा किला मैदान तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजने लगा। लोग समवेत स्वर में इस गीत को गाने लगे। जिससे कलाकारों का उत्साह बढ़ गया था।
लोग देर तक उत्साह व आनंद के सागर में गोते लगाते रहे। वहीं देर रात्रि मंचित रामलीला प्रसंग के दौरान मनु शतरूपा व रावण के तपस्या का मंचन किया गया। इस दौरान भी पूरा किला मैदान श्रद्धालुओं से भरा था। देर रात तक रामलीला देखने वाले श्रद्धालुओं का जमावड़ा लगा रहा। रामलीला में दिखाया गया कि महाराज मनु अपने सभा कक्ष में बैठे हुए मन में विचार करते हैं कि मुझे राज करते-करते काफी समय हो चुका है। अब अपने पुत्र उत्तानपाद को सिंहासन सौंप कर भगवत भजन करते हुए तपस्या में समय व्यतीत करना चाहिए। ऐसा निर्णय करके महाराज मनु अपनी महारानी शतरूपा के साथ नेमिसारण क्षेत्र वन प्रदेश को तपस्या के लिए चल पड़ते हैं। वहां पहुंचकर महाराज मनु एवं शतरूपा घोर तप करते हैं। उनके कठोर तप को देखकर भगवान प्रसन्न होकर महाराज मनु से वरदान मांगने को कहते हैं।
तब महाराज मनु नारायण से उन्हीं के समान पुत्र का वर मांगते हैं। यही महाराज मनु आगे चलकर दशरथ के रूप में और शतरूपा कौशल्या के रूप में जन्म लेती है। इधर रावण व कुंभकरण भी तपस्या करते हैं। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मदेव उन्हें वरदान देते हैं। रावण का विवाह मंदोदरी के साथ होता है। लंका का राजा बनने के बाद रावण घोर अत्याचार करने लग जाता है। रावण के पुत्रों एवं पौत्रों की गणना कोई नहीं कर सकता था। एक-एक योद्धा जगत को जीतने की क्षमता रखता था। यह देखकर रावण राक्षस दल को गाय और ब्राह्मणों पर अत्याचार करने का आदेश देता है और राक्षस दल घोर अत्याचार करने लगते हैं।
उक्त लीला को देखकर श्रद्धालुगण भाव विभोर हो जाते हैं। वहीं दिन में रासलीला के दौरान नंद महोत्सव प्रसंग का मंचन किया गया जिसमें दिखाया गया कि जब ब्रजमंडल में बृजवासियों को नंद बाबा के यहां 85 वर्ष के उम्र में बच्चंे ने जन्म लिया है, इस बात की खबर लगते ही सभी बृजवासी अपने-अपने घरों से बधाई सामग्रियां लेकर नंद बाबा के घर पहुंचते हैं और सभी खुशियां मनाते हुए बधाई गीत गाते हैं। कलाकारों के बेहतर प्रस्तुति से श्रद्धालुओं के बीच भक्ति रस की अविरल धारा प्रवाहित हो रही थी। रासलीला व रामलीला के दौरान श्रद्धालु अपने जगह से टस से मस नहीं हो रहे थे। जैसे जैसे यह आयोजन आगे बढ़ते जा रहा है, वैसे वैसे श्रद्धालुओं की संख्या व उत्साह भी बढ़ रहा है।