जिले के सभी पंचायतों में एचडब्ल्यूसी स्तर पर होगी सीवाई टीबी जांच - डॉ. शालिग्राम

जिले के सभी पंचायतों में एचडब्ल्यूसी स्तर पर होगी सीवाई टीबी जांच - डॉ. शालिग्राम

- जिला मुख्यालय स्थित जीएनएम स्कूल के सभागार में सीवाई टीबी जांच पर एक दिवसीय प्रशिक्षण संपन्न

- जिले के सभी एचडब्ल्यूसी/एचएससी पर पदस्थापित सीएचओ व स्टाफ नर्स को दिया गया प्रशिक्षण

- टीबी मुक्त पंचायत पहल कार्यक्रम की दी गई जानकारी

केटी न्यूज/बक्सर 

जिला यक्ष्मा केंद्र ने अब जिले के सभी 136 पंचायतों को टीबी मुक्त पंचायत बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। जिसके तहत जिला यक्ष्मा केंद्र ने तैयारी शुरू कर दी गई। इस क्रम में जिला मुख्यालय स्थित जीएनएम स्कूल के सभागार में सीवाई टीबी जांच पर एक दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया।

इसमें जिले के सभी एचडब्ल्यूसी/एचएससी पर पदस्थापित सीएचओ व स्टाफ नर्स को सीवाई टीबी जांच और टीबी मुक्त पंचायत पहल कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी दी गई। इस क्रम में जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. शालिग्राम पांडेय ने बताया कि जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल के निर्देश पर अब जिले के सभी पंचायतों को टीबी मुक्त बनाना है। उन्होंने बताया कि फिलवक्त जिले के 57 पंचायत को टीबी मुक्त घोषित किया गया है।

इनमें तीन पंचायत लगातार दूसरे साल टीबी मुक्त घोषित हुए हैं। शेष 54 पंचायत पहली बार टीबी मुक्त घोषित हुए हैं। वहीं, अब शेष 79 पंचायतों को टीबी मुक्त बनाना है। इसमें एचडब्ल्यूसी/एचएससी के सीएचओ व स्टाफ नर्स की भूमिका सबसे अहम होगी। इसलिए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। ताकि, पंचायत स्तर पर स्थित एचडब्ल्यूसी/एचएससी पर टीबी के लक्षण वाले में मरीजों में सीवाई टीबी की जांच सुनिश्चित हो सके।

निर्धारित किए गए हैं कुछ लक्ष्य 

जिला यक्ष्मा पदाधिकारी ने बताया कि सभी पंचायतों को टीबी मुक्त बनाने के लिए जिला यक्ष्मा केंद्र ने कुछ लक्ष्य निर्धारित किए हैं। इनमें सबसे प्रमुख यह कि सभी पंचायतों की। आशा कार्यकर्ता प्रत्येक सप्ताह में अपने अपने क्षेत्र के कम से कम टीबी के लक्षण वाले एक मरीज की जांच के लिए एचडब्ल्यूसी या एचएससी से लाएंगी। वहीं, प्रत्येक ओपीडी से 10 से 20 प्रतिशत लक्षण वाले मरीजों को टीबी जांच के लिए रेफरल किया जाए।

वहीं, जिले के सभी पंचायतों में स्थित सभी वल्नरेबल पॉपुलेशन (असुरक्षित जनसंख्या) का टीबी स्क्रीनिंग सुनिश्चित हो सके। इसमें सभी सीएचओ व स्टाफ नर्स अपने अपने सेंटर के अंतर्गत जनसंख्या के आधार पर असुरक्षित जनसंख्या की मैपिंग करनी होगी। ताकि, सभी लक्षित लोगों की जांच सुनिश्चित की जा सके। 

टीबी मुक्त पंचायत की दी गई जानकारी 

प्रशिक्षण के दौरान सभी सीएचओ व स्टाफ नर्स को माह में टीबी के लक्षण वाले कम से कम 30 मरीजों की जांच का लक्ष्य रखें। इनमें आशा द्वारा लाए गए मरीज भी शामिल रहेंगे। सबसे जरूरी यह कि जिस दिन आपके सेंटर पर बलगम लाने के लिए कुरियर जाएगा, मरीजों से उसी दिन बलगम लाने को कहें। साथ ही, मरीजों से दो घंटे के अंतराल में दो बलगम लाने की हिदायत दें।

इसके लिए आप प्रत्येक मरीज को दो फाल्कन ट्यूब उपलब्ध कराएं। मरीज का निक्षय आईडी बनाते हुए ट्यूब पर उसको अंकित करना अनिवार्य होगा। जिससे उनकी मॉनिटरिंग आसान हो। इस क्रम में सभी को टीबी मुक्त पंचायत पहल कार्यक्रम के सभी छह इंडिकेटर की जानकारी दी गई। जिनको पूरा करने पर ही उनका पंचायत टीबी मुक्त घोषित हो पाएगा।

18 साल से ऊपर के लक्षण वाले मरीजों की होगी सीवाई टीबी जांच

प्रशिक्षण के क्रम में विश्व स्वास्थ्य संगठन के एनटीईपी कंसलटेंट डॉ. विजयेंद्र कुमार सौरभ ने सीवाई टीबी जांच की प्रक्रिया से सभी को अवगत कराया। उन्होंने बताया कि यह जांच टीबी के संदिग्ध मरीजों और असुरक्षित जनसंख्या के लोगों में करनी है। साथ ही, टीबी के इलाजरत मरीजों के कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग लिस्ट में शामिल लोगों में भी इसकी जांच होगी। ताकि, पता चल की किसी में टीबी से संक्रमित होने संभावना है

या नहीं। उन्होंने डेमो दिलाते हुए बताया कि यह जांच त्वचा पर छोटे से इंजेक्शन के माध्यम से की जाती है। 48 से 72 घंटे के अंदर यदि इंड्यूरेशन 5 मिमी से अधिक होता है तो मरीज को टीबी संक्रमित मानकर टीपीटी दवा दी जाएगी। यदि इंड्यूरेशन 5 मिमी से कम हो, तो मरीज को असंक्रमित मानकर छह सप्ताह बाद दोबारा जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि सीवाई की जांच से जिले में टीबी जांच का प्रतिशत भी बढ़ेगा।

प्रशिक्षण के दौरान डीटीसी के हेड क्लर्क मनीष श्रीवास्तव, डीपीसी कुमार गौरव, एसटीएस राहुल कुमार, डीपीएस उत्तम कुमार, डाटा ऑपरेटर विजय प्रताप यादव, सीएफएआर के एसपीए अमित सिंह समेत सभी सीएचओ व स्टाफ नर्स मौजूद रहे।