खेत की मेड़ से आसमान तक चंपा देवी की उड़ान, बनीं जिले की पहली ‘ड्रोन दीदी’
केसठ प्रखंड के शिवपुर गांव की रहने वाली चंपा देवी की कहानी ग्रामीण महिलाओं के बदलते आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई है। कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली चंपा देवी आज आधुनिक कृषि तकनीक की प्रशिक्षित ड्रोन पायलट हैं।


__ जीविका से जुड़कर बदली जिंदगी, स्वयं सहायता समूह के ऋण से कृषि की शुरुआत और अब आधुनिक तकनीक से किसानों को दे रहीं नई दिशा
केटी न्यूज/केसठ।
केसठ प्रखंड के शिवपुर गांव की रहने वाली चंपा देवी की कहानी ग्रामीण महिलाओं के बदलते आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई है। कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली चंपा देवी आज आधुनिक कृषि तकनीक की प्रशिक्षित ड्रोन पायलट हैं। जीविका से जुड़कर उन्होंने न केवल अपनी आर्थिक गतिविधियों को गति दी, बल्कि अब ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में गांव की दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही हैं।चंपा देवी संयुक्त परिवार में रहती हैं, जिसमें 11 सदस्य हैं। उनके पति खेती-बारी का काम करते हैं और परिवार के पास करीब दो बीघा कृषि भूमि है। लंबे समय तक परिवार की आय का मुख्य आधार खेती ही रही। ऐसे में जीविका के स्वयं सहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन का अहम मोड़ साबित हुआ।

चंपा देवी श्री हरि जीविका स्वयं सहायता समूह की सदस्य बनीं। समूह की बैठकों और गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के साथ उन्होंने आर्थिक रूप से आगे बढ़ने की दिशा में कदम बढ़ाया। समूह के माध्यम से उन्हें पहली बार 15 हजार रुपये का ऋण मिला, जिसका उपयोग उन्होंने कृषि कार्य में किया। इससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ा और आगे कुछ नया करने की राह खुली।इसी दौरान उन्हें नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत कृषि ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण लेने का अवसर मिला। जीविका के माध्यम से योजना की जानकारी मिलने के बाद चयन हुआ और उन्होंने विभिन्न स्थानों पर कृषि ड्रोन के संचालन तथा खेतों में इसके उपयोग का प्रशिक्षण प्राप्त किया।प्रशिक्षण पूरा करने के बाद चंपा देवी अपने जिले की पहली कृषि ड्रोन पायलट प्रशिक्षित महिला बनीं।

उनके लिए यह उपलब्धि सिर्फ तकनीकी प्रशिक्षण हासिल करना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवेश की महिलाओं के लिए नई संभावनाओं का द्वार खोलना है।वर्तमान में वह खेती के साथ जीविका की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। वह स्वयं आधुनिक कृषि तकनीक का उपयोग सीख रही हैं और आसपास की महिलाओं को भी नई कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक कर रही हैं।चंपा देवी की यह यात्रा बताती है कि अवसर, प्रशिक्षण और आत्मविश्वास मिले तो गांव की महिलाएं भी तकनीक के क्षेत्र में नई पहचान बना सकती हैं। घर की जिम्मेदारियों से निकलकर ‘ड्रोन दीदी’ तक का उनका सफर ग्रामीण महिला सशक्तीकरण की प्रेरणादायक कहानी है।

