रेल फाटक बंद, अधूरे ओवरब्रिज के भरोसे हजारों लोगों की आवाजाही
चौसा रेलवे क्रॉसिंग स्थित 78-ए समपार फाटक सोमवार से इतिहास बन गया। रेल प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के बीच लोहे के गाटर जोड़कर फाटक को पूरी तरह बंद कर दिया। इसके साथ ही वर्षों से लोगों और वाहनों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग रहा यह रेलवे फाटक अब स्थायी रूप से बंद हो गया है।


__ पैदल पथ और स्ट्रीट लाइट के अभाव पर ग्रामीणों ने जताई चिंता, 20 प्रतिशत निर्माण कार्य अब भी बाकी
केटी न्यूज/चौसा
चौसा रेलवे क्रॉसिंग स्थित 78-ए समपार फाटक सोमवार से इतिहास बन गया। रेल प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के बीच लोहे के गाटर जोड़कर फाटक को पूरी तरह बंद कर दिया। इसके साथ ही वर्षों से लोगों और वाहनों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग रहा यह रेलवे फाटक अब स्थायी रूप से बंद हो गया है। प्रशासन की ओर से समपार बंद होने संबंधी सूचना बोर्ड और बैनर भी लगाए गए हैं, ताकि लोगों को वैकल्पिक मार्ग की जानकारी मिल सके।फाटक बंद होने के बाद अब क्षेत्र के लोगों के लिए रेल ओवरब्रिज ही आवागमन का एकमात्र साधन रह गया है। हालांकि आम जनता की सुविधा को देखते हुए ओवरब्रिज पर यातायात शुरू कर दिया गया है, लेकिन पुल का निर्माण कार्य अभी पूरी तरह पूरा नहीं हुआ है।

ऐसे में लोगों को राहत के साथ-साथ कई नई चुनौतियों का भी सामना करना पड़ रहा है।निर्माण एजेंसी के अनुसार ओवरब्रिज का लगभग 15 से 20 प्रतिशत कार्य अभी शेष है। फिलहाल लोगों की परेशानी को कम करने के उद्देश्य से पुल को चालू किया गया है, जबकि बचे हुए कार्यों को चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा। एजेंसी ने बताया कि पुल पर अंतिम कालीकरण, सर्विस रोड का निर्माण, नाला निर्माण, रेलिंग की फिनिशिंग, पेंटिंग और अन्य तकनीकी कार्य अभी बाकी हैं। इन कार्यों को पूरा करने में करीब 20 दिनों का समय लग सकता है। इस दौरान कुछ स्थानों पर निर्माण गतिविधियों के कारण यातायात प्रभावित होने की भी संभावना बनी रहेगी।

इधर, ओवरब्रिज चालू होते ही स्थानीय ग्रामीणों ने बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर चिंता जतानी शुरू कर दी है। ग्रामीणों का कहना है कि पुल तो बन गया, लेकिन पैदल चलने वालों की सुरक्षा और सुविधा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। आसपास बसे कई गांवों के लोग प्रतिदिन इस मार्ग का उपयोग करते हैं। ऐसे में बुजुर्ग, महिलाएं, छात्र-छात्राएं और छोटे बच्चे सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं।ग्रामीण भगवान उपाध्याय, महेंद्र चौबे, वकील चौबे और सुरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि रेलवे क्रॉसिंग के आसपास तीन से चार गांवों की बड़ी आबादी निवास करती है। इन गांवों के लोगों का रोजाना बाजार, विद्यालय, अस्पताल और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए आना-जाना लगा रहता है।

बावजूद इसके ओवरब्रिज पर पैदल यात्रियों के लिए अलग से सुरक्षित पथ की व्यवस्था नहीं की गई है। तेज रफ्तार वाहनों के बीच पैदल चलना भविष्य में दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है।ग्रामीणों ने रात के समय प्रकाश व्यवस्था को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि पुल पर पर्याप्त स्ट्रीट लाइट नहीं होने से अंधेरा छाए रहने की आशंका है। ऐसे में दुर्घटनाओं के साथ-साथ असामाजिक गतिविधियों का खतरा भी बढ़ सकता है। लोगों ने प्रशासन और निर्माण एजेंसी से मांग की है कि अधूरे कार्यों को शीघ्र पूरा किया जाए तथा पैदल पथ, स्ट्रीट लाइट और अन्य सुरक्षा उपायों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।क्षेत्रवासियों का मानना है कि ओवरब्रिज से जाम और रेल फाटक पर लगने वाली लंबी कतारों से राहत मिलेगी, लेकिन जब तक बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षा इंतजाम पूरी तरह नहीं होते, तब तक यह राहत अधूरी ही मानी जाएगी।

