श्रीमदभागवत कथा के अमृत पान करने से पापों का होता है नाश-कथावाचिका
श्रीमदभागवत कथा एक अमर कथा है। इस कथा के अमृत पान करने से संपूर्ण पापों का नाश हो जाता है। उक्त बातें स्थानीय गांव स्थित विश्वकर्मा मंदिर परिसर में छह दिवसीय महायज्ञ के प्रथम दिन रविवार को कथावाचिका किशोरी प्रज्ञा पांडेय साध्वी ने कही। उन्होंने कहा कि जन्म-जन्मांतर एवं युग-युगांतर में जब पुण्य का उदय होता है, तब ऐसा अनुष्ठान होता है।

केटी न्यूज़। नावानगर
श्रीमदभागवत कथा एक अमर कथा है। इस कथा के अमृत पान करने से संपूर्ण पापों का नाश हो जाता है। उक्त बातें स्थानीय गांव स्थित विश्वकर्मा मंदिर परिसर में छह दिवसीय महायज्ञ के प्रथम दिन रविवार को कथावाचिका किशोरी प्रज्ञा पांडेय साध्वी ने कही। उन्होंने कहा कि जन्म-जन्मांतर एवं युग-युगांतर में जब पुण्य का उदय होता है, तब ऐसा अनुष्ठान होता है।
इसे सुनने से पापी भी पाप मुक्त हो जाते है। उन्होंने कहा कि वेदों का सार युगों-युगों से मानवजाति तक पहुंचाता रहा है। श्रीमद्भागवत पुराण उसी सनातन ज्ञान की पयस्विनी है, जो वेदों से प्रवाहित होती चली आई है। उन्होंने कहा श्रीमद्भागवत महापुराण को वेदों का सार कहा गया है। उन्होंने श्रीमदभागवत महापुराण कथा में सुखदेव मुनि द्वारा राजा परीक्षित को भागवत कथा सुनाए जाने पर प्रवचन दिया।
कहा सात दिनों के अंदर तक्षक के दंश से मृत्यु का श्राप मिला था। श्रीमदभागवत कथा के अमृत पान करने से संपूर्ण पापों का नाश हो गया था। कथा शुरू होने से पूर्व आचार्य बड़क बाबा द्वारा आरती कर इस कथा की शुरुआत की गई। इस दौरान यज्ञ कमिटी द्वारा कथावाचक व अन्य सदस्यों को अंग वस्त्र से सम्मानित किया गया। कमिटी के सदस्यों ने बताया कि यह महायज्ञ 03 अप्रैल को भंडारे के साथ संपन्न होगा। साथ ही विश्वकर्मा मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी।