प्रेम की पुकार पर उतरते हैं प्रभु: भागवत कथा में गूंजा अवतार का संदेश

शहर में उषा सिन्हा के सौजन्य से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पूरा पंडाल भक्ति रस में डूबा नजर आया। कथा के दौरान भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के अवतार प्रसंगों का ऐसा भावपूर्ण वर्णन हुआ कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे।

प्रेम की पुकार पर उतरते हैं प्रभु: भागवत कथा में गूंजा अवतार का संदेश

__ छठे दिन श्रीराम–श्रीकृष्ण की लीलाओं के साथ सामाजिक समरसता और भक्ति की महिमा का भावपूर्ण वर्णन

केटी न्यूज/बक्सर।

शहर में उषा सिन्हा के सौजन्य से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। पूरा पंडाल भक्ति रस में डूबा नजर आया। कथा के दौरान भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के अवतार प्रसंगों का ऐसा भावपूर्ण वर्णन हुआ कि श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे।कथावाचक अशोक मिश्र ने कहा कि ईश्वर का अवतार केवल दुष्टों के विनाश के लिए नहीं, बल्कि भक्तों के प्रेम की पुकार का उत्तर भी है। उन्होंने समझाया कि जब-जब पृथ्वी पर अधर्म बढ़ता है और सज्जन पीड़ित होते हैं, तब प्रभु अवतरित होते हैं।

लेकिन उनका साक्षात् आगमन भक्त के निष्कलुष प्रेम और समर्पण से ही संभव होता है। “असुरों का संहार तो प्रभु संकल्प मात्र से कर सकते हैं, परंतु भक्त के प्रेम से बंधकर ही वे धरती पर आते हैं,” यह कहते ही पंडाल तालियों से गूंज उठा।कथा में मनु जी के वैराग्य का प्रसंग भी सुनाया गया। कथावाचक ने बताया कि जब मनु जी को जीवन की नश्वरता का बोध हुआ, तब उन्होंने राज-पाट त्यागकर कठोर तप किया। उसी तपस्या का फल था कि अगले जन्म में वे दशरथ-कौशल्या बने और उनके आंगन में स्वयं नारायण ने श्रीराम के रूप में जन्म लिया।

अशोक मिश्र ने कहा कि श्रीराम केवल एक अवतार नहीं, बल्कि आदर्श जीवन की जीती-जागती मिसाल हैं। उन्होंने माता-पिता की आज्ञा, भ्रातृ प्रेम, मित्रता और समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े लोगों के प्रति अपनत्व का संदेश दिया। शबरी, निषादराज और वानर-भालुओं को गले लगाकर उन्होंने सामाजिक समरसता का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया।कथा के समापन पर महाआरती हुई, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दीप जलाकर पुण्य अर्जित किया। पूरा वातावरण ‘जय श्रीराम’ और ‘राधे-राधे’ के जयघोष से गुंजायमान रहा।