डुमरांव में बाईपास सड़क निर्माण में आएगी तेजी, भू-अर्जन पदाधिकारी व एसडीएम ने की बैठक

नये वित्तीय वर्ष में डुमरांव में बाईपास निर्माण में तेजी आएगी। बुधवार को जिला भू-अर्जन पदाधिकारी विनित कुमार व डुमरांव एसडीएम राकेश कुमार बाईपास निर्माण के संबंध में एक बैठक की। बैठक में बाईपास निर्माण पर चर्चा की गई तथा इस मामले में आने वाले अड़चनों को दूर करने की दिशा में विचार विमर्श किया गया।

डुमरांव में बाईपास सड़क निर्माण में आएगी तेजी, भू-अर्जन पदाधिकारी व एसडीएम ने की बैठक

- रैयतों को फिर भेजा जाएगा नोटिस, मुआवजा के लिए आवेदन नहीं देने पर होगी कार्रवाई

- रैयतों की उदासीनता से लटका है डुमरांव में बाईपास सड़क का निर्माण

केटी न्यूज/डुमरांव

नये वित्तीय वर्ष में डुमरांव में बाईपास निर्माण में तेजी आएगी। बुधवार को जिला भू-अर्जन पदाधिकारी विनित कुमार व डुमरांव एसडीएम राकेश कुमार बाईपास निर्माण के संबंध में एक बैठक की। बैठक में बाईपास निर्माण पर चर्चा की गई तथा इस मामले में आने वाले अड़चनों को दूर करने की दिशा में विचार विमर्श किया गया।

इस संबंध में एसडीएम ने बताया कि बाईपास सड़क निर्माण में रैयतों की उदासीनता आड़े आ रही है। उन्होंने बताया कि डुमरांव बाईपास निर्माण के लिए चिन्हित भू-भाग के रैयतधारियों को बार-बार नोटिस के बावजूद वे मुआवजे के लिए आवेदन नहीं दे रहे है। जिस कारण भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है। एसडीएम ने कहा कि इसके लिए पूर्व में कई बार कैंप भी लगाया जा चुका है, लेकिन रैयतदार कैंप में भी नहीं आए, जिस कारण अभी तक भू-अर्जन की प्रकिया पूरी नहीं हो सकी है। 

502 रैयतों में मात्र नौ ने दिया है आवेदन

एसडीएम ने बताया कि बाईपास निर्माण के लिए जो भूमि चिन्हित की गई है वह चार मौजा डुमरांव, बनकट खिरौली व भोजपुर कदीम में फैली है तथा कुल 502 रैयतदारों की जमीन पड़ रही है। एसडीएम ने बताया कि इन 502 रैयतदारों में अबतक मात्र नौ किसानों ने ही मुआवजे के लिए आवेदन दिया है। शेष 493 किसानों ने इस मामले में भू-अर्जन विभाग के कई बार की नोटिस का कोई जबाव नहीं दिया है। उनकी उदासीनता व अड़ियल रवैया ही बाईपास निर्माण की सबसे बड़ी बाधा बन गई है। जिस कारण बाईपास सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही है।

रैयतदारों को फिर से भेजा जाएगा नोटिस

एसडीएम ने बताया कि बैठक में यह निर्णय लिया गया कि रैयतदारों को फिर से नोटिस भेजा जाएगा तथा निर्धारित समय तक नोटिस का जबाव या मुआवजे के लिए आवेदन नहीं देने पर प्रशासन अपने स्तर से चिन्हित भू-भाग पर बाईपास सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू कराएगी। उन्होंने कहा कि डुमरांव में हर हाल में बाईपास सड़क का निर्माण कराया जाएगा। एसडीएम ने कहा कि इस मामले में लापरवाही करने तथा अड़ियल रूख अख्तियार करने वाले किसानों पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बोले किसान सर्किल रेट का रिव्यू कर करें भुगतान

इधर, जिन किसानों की जमीन को बाईपास निर्माण के लिए चिन्हित किया गया है उनका कहना है कि मुआवजे का जो रेट तय किया गया है वह बहुत कम है, जबकि उनकी जमीन की कीमत उससे कई गुना अधिक है। दरअसल बाईपास निर्माण के लिए चिन्हित जमीन का सीमांकन कृषि योग्य जमीन के रूप में हुआ है। जिस कारण उसके मुआवजे का भुगतान भी उसी रेट से किया जाना है, जबकि भू-धारी किसानों को कहना है कि उनकी जमीन वर्तमान में आवासीय कटेगरी में है

तथा नगर परिषद की सीमा में आती है। सरकार को जमीन का सर्किल रेट अपडेट करना चाहिए। खिरौली के भू-धारी किसान रिंकू चौबे, आलोक चौबे, अनिल चौबे, कौशलेन्द्र चौबे आदि ने बताया कि सरकार द्वारा 2014-15 के सर्किल रेट से भुगतान किया जा रहा है, जबकि वर्तमान में सर्किल रेट का रिव्यू करने पर उनकी जमीन की कीमत सरकार के वर्तमान रेट से दुगना से तिगुना हो जाएगी। किसानों ने कहा कि यदि सरकार जबरन उनकी जमीन को अधिगृहित करेगी तो हमलोग इसके खिलाफ कोर्ट में जाएंगे। 

डुमरांव के लिए बेहद जरूरी है बाईपास सड़क

बता दें कि डुमरांव के टैªफिक व्यवस्था को दुरूस्त करने के लिए बाईपास सड़क का निर्माण ही एकमात्र विकल्प है। पिछले एक दशक के दौरान न सिर्फ शहर की आबादी बढ़ी है बल्कि वाहनों की संख्या भी चार से पांच गुनी अधिक हो गई है। जबकि इस दौरान शहर की सड़क एक इंच चौड़ी भी नहीं हुई है। जिस कारण शहर में जाम की समस्या काफी गंभीर हो गई है। जाम से निजात दिलाने के लिए शहर में मौखिक तौर नो इंट्री लगा दिन में भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई है।

बावजूद पूरे दिन लोगों का जाम का दंश झेलना पड़ता है। कई बार तो यह जाम काफी नासूर बन जाता है। जानकारोें का कहना है कि बाईपास सड़क के निर्माण के बाद ही जाम की समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है। इधर भू-अर्जन का पेंच बाईपास निर्माण में रूकावट बना हुआ है। देखना है नये वित्तीय वर्ष में इस पेंच को सुलझाने के लिए प्रशासन व भू-अर्जन विभाग द्वारा क्या विकल्प निकाला जा रहा है।