बक्सर शिक्षा विभाग में सक्रिय माफिया तंत्र के खुलासे के बाद मच गया है हड़कंप

बक्सर जिले का शिक्षा विभाग एक बार फिर विवादों और आरोपों के घेरे में है। जिले में लंबे समय से सक्रिय कथित शिक्षा माफिया अजय सिंह और अरविंद सिंह पर यह आरोप लग रहा है कि वे शिक्षा विभाग में अपने प्रभाव और नेटवर्क के बूते विभिन्न अनुबंधों, टेंडरों और एजेंसियों को मनमुताबिक नियंत्रित कर रहे हैं। इन दोनों के संरक्षण में संचालित हाउसकीपिंग एजेंसी फर्स्ट आइडिया का नाम हाल ही में तेज़ी से चर्चाओं में आया है।

बक्सर शिक्षा विभाग में सक्रिय माफिया तंत्र के खुलासे के बाद मच गया है हड़कंप

-- केशव टाइम्स द्वारा तथाकथित माफियाओ, हाउसकीपिंग एजेंसी और विभागीय अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका की खबरों पर हो रही है चर्चा

केटी न्यूज़/बक्सर।

बक्सर जिले का शिक्षा विभाग एक बार फिर विवादों और आरोपों के घेरे में है। जिले में लंबे समय से सक्रिय कथित शिक्षा माफिया अजय सिंह और अरविंद सिंह पर यह आरोप लग रहा है कि वे शिक्षा विभाग में अपने प्रभाव और नेटवर्क के बूते विभिन्न अनुबंधों, टेंडरों और एजेंसियों को मनमुताबिक नियंत्रित कर रहे हैं। इन दोनों के संरक्षण में संचालित हाउसकीपिंग एजेंसी फर्स्ट आइडिया का नाम हाल ही में तेज़ी से चर्चाओं में आया है।

शिक्षा विभाग में माफियागिरी, हाउस कीपिंग एजेंसी के चयन, अवैध भुगतान, अधिकारियों की भूमिका तथा तथाकथित माफियाओं के आगे विभागीय कर्मियों की परेशानी से जुड़ी खबरे “केशव टाइम्स” द्वारा लगातार चलाए जाने से शिक्षा विभाग के साथ ही तथाकथित माफियाओं तथा उनके करीबियों के बीच हड़कंप मच गया है। खासकर शनिवार के अंक में स्थापना डीपीओ विष्णुकांत राय के तबादले के बावजूद बक्सर में जमे रहने की खबर प्रकाशित होने के बाद पूरे दिन शिक्षा विभाग के कार्यालय से लेकर शिक्षकों तक में चर्चाएं होते रही। एक तरफ जहां आम शिक्षकों व कर्मियों में केशव टाइम्स के इस अभियन से खुशी देखी गई, वहीं तथाकथित माफियाओं, उनके करीबियों तथा माफियाओं से तालमेल रखने वाले अधिकारियों की मुश्किलें बढ़ी दिखी। विभागीय सूत्रों का कहना है कि शनिवार को पूरे दिन बक्सर के जिला शिक्षा कार्यालय में केशव टाइम्स की खबर पर चर्चा होते रही।

वहीं, जानकारों का कहना है कि केशव टाइम्स के अभियान के दौरान हाउस कीपिंग एजेंसी फर्स्ट आइडिया का संबंध तथाकथिम माफियाओं से जुड़ते ही मामले ने और भी तूल पकड़ लिया है। शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। लोग कई तरह की चर्चाए भी कर रहे है। लोगों का कहना है कि आखिर सबकुछ जानते हुए भी शिक्षा विभाग के अधिकारी आखिर क्यों नहीं अजय व अरविंद सिंह के खिलाफ मुंह खोल पा रहे हैं। वहीं, जानकारों का कहना है कि तथाकथित माफियाओं के पास शिक्षकों से लेकर अधिकारियों तक की कुंडली है, जिस कारण कोई उनके खिलाफ मुंह खोलने को तैयार नहीं हो रहा है। यही कारण है कि केशव टाइम्स के इस अभियान की सराहना भी आम शिक्षक तथा कर्मी खुलेआम नहीं कर पा रहे है, बावजूद अंदखाने तथाकथित माफियाओं से परेशान तथा खार खाए शिक्षकों व कर्मियों में इस बात की उम्मीद जगी है कि अब जल्दी ही शिक्षा विभाग को माफियागिरी के कलंक से मुक्ति मिल जाएगी, क्योंकि केटी न्यूज के इस अभियान के बाद जहां दिशा की बैठक में यह मुद्दा उठ चुका है वहीं, इमानदार छवि के व तेजतर्रार माने जाने वाले जिले के उपविकास आयुक्त आकाश चौधरी के जिम्मे जांच के दौरान फर्स्ट आइडिया को अवैध भुगतान के जांच का जिम्मा मिला है।

-- हाउसकीपिंग एजेंसी और शिक्षा विभाग का गठजोड़

सूत्र बताते हैं कि फर्स्ट आइडिया नामक एजेंसी, जिसे कागज़ों पर हाउसकीपिंग और सपोर्टिव स्टाफ की सेवा उपलब्ध कराने के लिए अनुबंधित किया गया है, वास्तव में शिक्षा विभाग की कई योजनाओं और अभियानों से सीधे तौर पर आर्थिक लाभ ले रही है। आरोप यह भी है कि इस एजेंसी के माध्यम से फर्जी बिलिंग, मनमाने भुगतान और व्यक्तिगत खातों पर लाखों के ट्रांजेक्शन जैसी गड़बड़ियां की जा रही हैं। शक्षा विभाग के भीतर फैली इस कथित गड़बड़ी की डोर सीधे अजय सिंह और अरविंद सिंह से जुड़ती बताई जा रही है। दोनों पर पहले भी शिक्षा विभाग में मनमानी, अधिकारियों से मारपीट, भयादोहन और ठेकेदारी पर दबाव बनाने के आरोप लग चुके हैं।

-- विभागीय अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका

इन सबके बीच शिक्षा विभाग के कुछ शीर्ष अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। खासकर स्थापना डीपीओ विष्णु कांत राय और पूर्व जिला शिक्षा पदाधिकारी अनिल द्विवेदी, पूर्व डीपीओ नाजिश अली आदि पर संदेह की परतें गहराती जा रही हैं।आरोप है कि इन अधिकारियों ने टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बजाय विशेष एजेंसियों और व्यक्तियों को लाभ पहुंचाने का काम किया है। कई ठेकेदारों ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि तथाकथित माफियाओं के दबाव के बिना फर्स्ट आइडिया जैसी एजेंसी को अनुबंधित करना संभव ही नहीं था। स्थापना डीपीओ विष्णु कांत राय पर आरोप है कि उन्होंने जांच के दौरान भुगतान प्रक्रिया में इस एजेंसी को लाभ पहुंचाया है। वहीं पूर्व जिला शिक्षा पदाधिकारी अनिल द्विवेदी के कार्यकाल में फर्स्ट आइडिया का चयन मनमाने तरीके से करने के आरोप लगे है। 

-- राजनीतिक संरक्षण की चर्चा

इस पूरे प्रकरण के पीछे राजनीतिक संरक्षण की भी चर्चा तेज़ है। अजय सिंह और अरविंद सिंह के संबंध सत्ता और विपक्ष के कई स्थानीय नेताओं से जोड़े जाते रहे हैं। यही वजह है कि शिकायतों के बावजूद कभी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।बता दें कि अरविंद सिंह को बक्सर सांसद अपना सहयोगी बनाए है, जिनका काम शिक्षा व्यवस्था में गुणात्मक सुधार तथा मॉनिटरिंग तक ही है, लेकिन ये शिक्षा व्यवस्था में सुधार व मॉनिटरिंग के बदले हाउस कीपिंग एजेंसियों से जुड़ लाखों रूपए की कमाई कर रहे है। जिसका प्रमाण फर्स्ट आइडिया द्वारा उनके तथा उनके पत्नी व बेटी के खातें में ट्रांजेक्शन से मिलता है। इसके अलावे इनके पुत्र की कंपनी साईं इंटरप्राइजेज से भी बड़ा लाभ मिला है। हालांकि, अब देखना है कि जिला प्रशासन इनके खिलाफ कब और क्या कार्रवाई कर रहा है। वैसे प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि जल्दी ही बक्सर के शिक्षा विभाग से माफियागिरी का कलंक मिटने वाला है।  

वहीं, स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षा सुधार के लिए काम कर रहे संगठनों का कहना है कि विभाग में जमे इन “कथित माफियाओं” का नेटवर्क इतना मज़बूत है कि आम कर्मचारी या छोटे अधिकारी इनके खिलाफ आवाज़ उठाने से डरते हैं।

-- अभिभावकों और छात्रों में नाराज़गी

जिले के अभिभावकों और छात्रों में भी इस तरह की खबरों को लेकर रोष है। उनका कहना है कि अगर शिक्षा विभाग ही ठेकेदारी और कमीशनखोरी के दलदल में फंसा रहेगा तो शिक्षा की गुणवत्ता कैसे सुधरेगी?

एक अभिभावक ने नाराज़गी जताते हुए कहा, “हमारे बच्चों के लिए भवन सुधार, सफाई और सुविधाओं का पैसा दिया जाता है। लेकिन अगर यह भी माफिया और अधिकारियों की जेब में चला गया तो आने वाली पीढ़ी को क्या मिलेगा। 

बक्सर जिले में लगातार उठ रहे इन आरोपों ने प्रशासन और सरकार की जवाबदेही पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली की जांच कराने और कथित माफियाओं के नेटवर्क को ध्वस्त करने की मांग जोर पकड़ रही है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों ने सरकार से यह अपील की है कि फर्स्ट आइडिया जैसी एजेंसियों की भूमिका और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत की निष्पक्ष जांच हो।

बक्सर शिक्षा विभाग का यह पूरा प्रकरण इस बात का जीवंत उदाहरण बन गया है कि कैसे शिक्षा जैसी संवेदनशील व्यवस्था में भी ठेकेदारी, दलाली और कथित माफिया तंत्र सक्रिय है। अजय सिंह और अरविंद सिंह जैसे लोगों के नाम सामने आने, फर्स्ट आइडिया एजेंसी की भूमिका उजागर होने और विभागीय अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका के चलते अब यह मामला केवल एक विभागीय अनियमितता नहीं रहा, बल्कि यह पूरे शिक्षा तंत्र की साख पर चोट है।

यदि समय रहते पारदर्शी जांच और कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो यह गड़बड़ी आने वाले दिनों में और गहरा संकट बन सकती है।