मनरेगा से छेड़छाड़ पर कांग्रेस का गांधीवादी वार, बक्सर में उपवास से केंद्र सरकार को ललकारा

केंद्र सरकार की नीतियों और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम व मूल स्वरूप में बदलाव की चर्चाओं के विरोध में बक्सर जिला कांग्रेस कमेटी ने शनिवार को एकदिवसीय शांतिपूर्ण उपवास कार्यक्रम आयोजित कर सियासी तापमान बढ़ा दिया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी एवं बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर आयोजित इस कार्यक्रम को कांग्रेस ने “गरीबों के अधिकार की रक्षा का संघर्ष” करार दिया।

मनरेगा से छेड़छाड़ पर कांग्रेस का गांधीवादी वार, बक्सर में उपवास से केंद्र सरकार  को ललकारा

-- रोजगार अधिकार है, आस्था नहीं, मनरेगा के नाम व स्वरूप में बदलाव के खिलाफ जिला कांग्रेस का एकदिवसीय उपवास

केटी न्यूज/बक्सर

केंद्र सरकार की नीतियों और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के नाम व मूल स्वरूप में बदलाव की चर्चाओं के विरोध में बक्सर जिला कांग्रेस कमेटी ने शनिवार को एकदिवसीय शांतिपूर्ण उपवास कार्यक्रम आयोजित कर सियासी तापमान बढ़ा दिया। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी एवं बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर आयोजित इस कार्यक्रम को कांग्रेस ने “गरीबों के अधिकार की रक्षा का संघर्ष” करार दिया।उपवास कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. मनोज पांडेय ने की। मंच पर पूर्व विधायक संजय कुमार तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी, पूर्व विधायक विश्वनाथ राम, डॉ. प्रमोद ओझा सहित वरिष्ठ कांग्रेस नेता मौजूद रहे।

जबकि बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और मनरेगा मजदूरों की भागीदारी ने कार्यक्रम को जन-आंदोलन का रूप दे दिया।उपवास के समापन पर डॉ. मनोज पांडेय ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि मनरेगा किसी सरकार की कृपा नहीं, बल्कि देश के गरीब और श्रमिक वर्ग का कानूनी अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि नाम और स्वरूप बदलने की कोशिश संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के खिलाफ है। “धर्म आस्था का विषय है, रोजगार नागरिक का अधिकार,” कहते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी मनरेगा के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं करेगी।डॉ. पांडेय ने याद दिलाया कि वर्ष 2005 में यूपीए सरकार ने मनरेगा लागू कर ग्रामीण भारत को रोजगार की गारंटी दी, जिससे पलायन, भुखमरी और बेरोजगारी पर अंकुश लगा।

लेकिन आज बजट में कटौती, काम के अवसरों में कमी और मजदूरी भुगतान में देरी से यह योजना कमजोर की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि मजदूरी समय पर क्यों नहीं मिल रही। काम मांगने पर काम क्यों नहीं दिया जा रहा। बजट हर साल क्यों घटाया जा रहा है।पूर्व विधायक संजय कुमार तिवारी और विश्वनाथ राम ने कहा कि महात्मा गांधी के नाम पर राजनीतिक प्रयोग लोकतंत्र के लिए खतरा है। उनका आरोप था कि केंद्र सरकार गरीबों की योजनाओं को कमजोर कर उनके अधिकार छीनना चाहती है, जिसे कांग्रेस कभी स्वीकार नहीं करेगी। डॉ. प्रमोद ओझा ने मनरेगा को पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह की दूरदर्शी सोच का परिणाम बताते हुए कहा कि इस योजना ने गरीबों को काम के साथ सम्मान दिया।

कार्यक्रम में कांग्रेस ने केंद्र सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखींकृ मनरेगा का नाम व मूल स्वरूप यथावत रखा जाए, योजना को कमजोर करने के प्रयास बंद हों, मजदूरों को समय पर पूरी मजदूरी मिले, काम मांगने पर काम देने की कानूनी व्यवस्था सख्ती से लागू हो और बजट में पर्याप्त वृद्धि की जाए।आगे की रणनीति की घोषणा करते हुए डॉ. पांडेय ने बताया कि 12 से 29 जनवरी 2026 तक जिले की हर ग्राम पंचायत में चौपाल कार्यक्रम होंगे और राष्ट्रपति के नाम पोस्टकार्ड अभियान चलाया जाएगा। चेतावनी भरे लहजे में उन्होंने कहा कि यदि मनरेगा से छेड़छाड़ जारी रही तो कांग्रेस सड़क से संसद तक निर्णायक संघर्ष करेगी।