डुमरांव पश्चिमी रेल फाटक पर ओवरब्रिज निर्माण को मिली रफ्तार, पाइलिंग का अहम चरण पूरा

डुमरांव के बहुप्रतीक्षित पश्चिमी रेलवे फाटक पर प्रस्तावित रोड ओवरब्रिज (आरओबी) निर्माण कार्य ने अब गति पकड़ ली है। लंबे समय से जाम और दुर्घटनाओं की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए यह परियोजना राहत की उम्मीद बनकर सामने आई है। करीब 57.44 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस ओवरब्रिज का निर्माण कार्य नीरज सीमेंट कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को सौंपा गया है, और अब इसके तकनीकी चरण तेजी से पूरे किए जा रहे हैं।

डुमरांव पश्चिमी रेल फाटक पर ओवरब्रिज निर्माण को मिली रफ्तार, पाइलिंग का अहम चरण पूरा

__ 57.44 करोड़ की परियोजना में 11 पाइल तैयार, लोड टेस्ट सफल; 2027 तक निर्माण पूरा करने का लक्ष्य

केटी न्यूज/डुमरांव

डुमरांव के बहुप्रतीक्षित पश्चिमी रेलवे फाटक पर प्रस्तावित रोड ओवरब्रिज (आरओबी) निर्माण कार्य ने अब गति पकड़ ली है। लंबे समय से जाम और दुर्घटनाओं की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए यह परियोजना राहत की उम्मीद बनकर सामने आई है। करीब 57.44 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे इस ओवरब्रिज का निर्माण कार्य नीरज सीमेंट कंस्ट्रक्शन लिमिटेड को सौंपा गया है, और अब इसके तकनीकी चरण तेजी से पूरे किए जा रहे हैं।निर्माण कार्य के तहत सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया मानी जाने वाली पाइलिंग की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। अब तक 11 लोहे के पाइलिंग स्ट्रक्चर तैयार कर लिए गए हैं, जबकि अन्य पाइलों पर काम जारी है।

इंजीनियरों के अनुसार, पाइलिंग से पहले की जाने वाली जरूरी तकनीकी जांच—लोड टेस्ट पाइलिंग—सफलतापूर्वक पूरी कर ली गई है। इस परीक्षण के दौरान एक पाइल को जमीन में डालकर उसकी भार वहन क्षमता की जांच की गई, जिसमें संतोषजनक परिणाम प्राप्त हुए हैं। इससे यह सुनिश्चित हुआ है कि जमीन पुल निर्माण के लिए उपयुक्त है।इंजीनियरिंग टीम ने बताया कि निर्माण शुरू करने से पहले स्टैंडर्ड पेनिट्रेशन टेस्ट (एसपीटी) के माध्यम से मिट्टी की गुणवत्ता का आकलन किया गया। इसके बाद लोड टेस्ट और सर्वे लेवल की प्रक्रिया पूरी की गई। सर्वे लेवल के जरिए यह तय किया गया कि पुल की नींव कितनी गहराई तक और किस संरचना में बनाई जाएगी।

इस दौरान मिट्टी की प्रकृति, स्थल की ढाल, ऊंचाई और आसपास के ढांचे का गहन अध्ययन किया गया।तकनीकी मानकों को अंतिम रूप देने के बाद अब मुख्य पाइलिंग कार्य शुरू होने की तैयारी है। इसके बाद कंक्रीटिंग की जाएगी, जिससे पाइलों को स्थायी मजबूती मिलेगी। आगे राफ्ट निर्माण के जरिए सभी पाइलों को जोड़ा जाएगा, जिससे नींव संतुलित और मजबूत बने। इसके बाद शाफ्ट, पीयर कैप और पेडिस्टल निर्माण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अंतिम चरण में गार्डर लॉन्चिंग और एप्रोच रोड का निर्माण होगा।डुमरांव का पश्चिमी रेलवे फाटक डीडीयू–पटना रेलखंड पर स्थित एक अत्यंत व्यस्त क्रॉसिंग है, जहां प्रतिदिन करीब 2200 वाहनों का आवागमन होता है।

इनमें स्कूली बसें, एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाएं भी शामिल हैं। यहां हर कुछ मिनट पर फाटक बंद होने के कारण लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है, जिससे जाम की स्थिति बनी रहती है। कई बार ट्रेनों को भी आउटर पर रुकना पड़ता है, जिससे रेल परिचालन प्रभावित होता है।स्थानीय लोगों की मांग पर इस ओवरब्रिज परियोजना को स्वीकृति मिली थी, जिसे अब जमीन पर उतारने का काम तेज हो गया है। ओवरब्रिज बनने के बाद फाटक पर लगने वाला जाम पूरी तरह समाप्त होने की उम्मीद है। इससे न केवल यातायात सुगम होगा, बल्कि स्कूली बच्चों, मरीजों और आम लोगों को सुरक्षित और निर्बाध आवागमन की सुविधा मिलेगी। साथ ही व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को भी गति मिलेगी।सरकार ने इस परियोजना को वर्ष 2027 के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

यदि वर्तमान गति बरकरार रही, तो निर्धारित समय सीमा के भीतर कार्य पूरा होने की संभावना जताई जा रही है। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन से निर्माण कार्य की लगातार निगरानी करने और किसी भी प्रकार की देरी से बचने की अपील की है।इस परियोजना को लेकर पूर्व विधायक डॉ. अजित कुमार ने कई बार विधानसभा में आवाज उठाई थी, वहीं वर्तमान विधायक राहुल कुमार सिंह ने भी संबंधित अधिकारियों से मिलकर कार्य में तेजी लाने की मांग की थी। अब इसका असर जमीन पर साफ दिखाई देने लगा है।लोगों को उम्मीद है कि यह ओवरब्रिज न केवल उनकी रोजमर्रा की परेशानियों को खत्म करेगा, बल्कि क्षेत्र के समग्र विकास में भी मील का पत्थर साबित होगा।