जूस बेचने वाले की बेटी बनी बिहार टॉप-10 में, थानाध्यक्ष खुद पहुंचे सम्मान देने

कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो हालात रास्ता नहीं रोक सकते—पुराना भोजपुर की पूजा कुमारी ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। गन्ने का जूस बेचकर परिवार चलाने वाले पिता की बेटी ने बिहार मैट्रिक परीक्षा में टॉप-10 में जगह बनाकर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे इलाके का नाम रोशन कर दिया।

जूस बेचने वाले की बेटी बनी बिहार टॉप-10 में, थानाध्यक्ष खुद पहुंचे सम्मान देने

__ आर्थिक तंगी को हराकर पूजा कुमारी ने रचा इतिहास, सिविल सेवा में जाने का सपना

केटी न्यूज/डुमरांव

कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो हालात रास्ता नहीं रोक सकते—पुराना भोजपुर की पूजा कुमारी ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। गन्ने का जूस बेचकर परिवार चलाने वाले पिता की बेटी ने बिहार मैट्रिक परीक्षा में टॉप-10 में जगह बनाकर न सिर्फ अपने परिवार, बल्कि पूरे इलाके का नाम रोशन कर दिया।पूजा की इस असाधारण उपलब्धि की गूंज जब स्थानीय प्रशासन तक पहुंची, तो नया भोजपुर थानाध्यक्ष चंदन कुमार खुद उसके घर पहुंच गए। तकिया मोहल्ला बिंद टोली स्थित उसके साधारण से घर में जाकर उन्होंने पूजा को सम्मानित किया और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

इस दौरान उन्होंने कहा कि सीमित संसाधन कभी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकते, अगर मेहनत और लगन सच्ची हो।पूजा कुमारी की सफलता की कहानी संघर्ष और संकल्प से भरी हुई है। उसके पिता बीरबल चौधरी रोजाना चौक पर गन्ने का जूस बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं, जबकि उसकी मां रीता देवी गृहिणी हैं। आर्थिक तंगी के बावजूद परिवार ने कभी उसकी पढ़ाई में कमी नहीं आने दी, और पूजा ने भी हर चुनौती को अवसर में बदल दिया।दिलचस्प बात यह है कि पूजा की पढ़ाई का सफर भी आसान नहीं रहा।

उसने नौवीं तक की पढ़ाई एक निजी स्कूल में की, लेकिन स्कूल की मान्यता रद्द होने के बाद उसे बीच में ही स्कूल बदलना पड़ा।यह स्थिति किसी भी छात्र के लिए बड़ा झटका हो सकती थी, लेकिन पूजा ने हिम्मत नहीं हारी। उसने उत्क्रमित उच्च विद्यालय, पुराना भोजपुर में दाखिला लिया और नई शुरुआत के साथ अपनी मेहनत जारी रखी।उसकी मेहनत का परिणाम सबके सामने है। मैट्रिक परीक्षा में उसने हिंदी में 96, संस्कृत में 90 और गणित में 99 अंक हासिल किए। सीरियल नंबर के आधार पर उसकी रैंकिंग भले 115 हो, लेकिन मेरिट लिस्ट में टॉप-10 में शामिल होकर उसने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया।

थानाध्यक्ष चंदन कुमार ने कहा कि पूजा जैसे छात्रों को सम्मानित करना जरूरी है, ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए और अन्य बच्चे भी प्रेरित हों। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि आगे की पढ़ाई में हर संभव सहयोग किया जाएगा।पूजा का सपना अब और बड़ा है। वह सिविल सेवा में जाकर देश की सेवा करना चाहती है। उसकी यह सोच और मेहनत उसे आने वाले समय में और ऊंचाइयों तक ले जा सकती है।पूजा कुमारी की कहानी उन हजारों छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी मान लेते हैं। उसने साबित कर दिया कि असली ताकत हालात नहीं, बल्कि हौसलों में होती है।