ताज्जूब, दलसागर के महादलित परिवारों को नहीं है पीएम आवास योजना की जानकारी
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में कमीशनखोरी की चर्चाएं अक्सर सुनने को मिलती है। इस योजना का लाभ पाने के लिए अक्सर ग्रामीण प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाते है। यह योजना गरीब परिवारों को अपना छत मुहैया कराती है, लेकिन जिले के एक महादलित समुदाय के टोले के निवासियों को इस योजना की जानकारी ही नहीं है और उक्त टोले के निवासी अबतक इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ पाने से वंचित भी है।

- डीएम के निरीक्षण में खुली ग्रामीण आवास योजना समेत अन्य विकास योजनाओं की कलई, आवास सहायक व विकास मित्र से शो-कॉज का डीएम ने दिया निर्देश
केटी न्यूज/बक्सर
प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना में कमीशनखोरी की चर्चाएं अक्सर सुनने को मिलती है। इस योजना का लाभ पाने के लिए अक्सर ग्रामीण प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाते है। यह योजना गरीब परिवारों को अपना छत मुहैया कराती है, लेकिन जिले के एक महादलित समुदाय के टोले के निवासियों को इस योजना की जानकारी ही नहीं है और उक्त टोले के निवासी अबतक इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ पाने से वंचित भी है।
गुरूवार को जिलाधिकारी अंशुल अग्रवाल के समक्ष खुद ग्रामीणों ने यह बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना समेत कई अन्य योजनाओं के बारे में नहीं बताया गया है। इसके बाद डीएम सख्त हो गए तथा तुरंत संबंधित पंचायत के आवास सहायक व विकास मित्र से शो-कॉज करने का निर्देश देने के साथ ही अनुसूचित जाति बस्तियों में कैंप लगा सरकारी योजनाओं की जानकारी देने का फरमान सुनाया है।
अब पूरा मामला समझिए
दरअसल गुरूवार को जिलाधिकारी ने सदर बक्सर के दलसागर पंचायत के वार्ड संख्या आठ के महादलित टोले का भ्रमण किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने इस टोला में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) सर्वेक्षण के बारे में इस बस्ती निवासी नंदजी, अनिता देवी, सुनीता देवी, निर्जला देवी, बियफी देवी एवं अन्य लोगों के घर घर जाकर आवास योजना सर्वेक्षण के बारे में पूछताछ की। इस दौरान बस्ती वालों ने उन्हें बताया कि उन्हें न तो इस योजना की जानकारी है और न ही योजना के तहत कितनी राशि मिलती है इसकी जानकारी उन्हें है। जाहिर है, सर्वेक्षण के दौरान आवास सहायक या अन्य कर्मी बस्ती में जाकर कुछ जानकारी नहीं दिए है। जबकि अभी आवास योजना के सर्वेक्षण का काम चल रहा है तथा राज्य सरकार द्वारा इसकी अवधि भी विस्तारित की गई है। जिलाधिकारी ने इसे आवास सहायक के दायित्वों के प्रति घोर लापरवाही बताया और इस संबंध में संबंधित आवास सहायक से शो-कॉज पूछने का निर्देश दिया।
कच्चे मकान दे रहे थे आवास सहायक के मनमानी के पक्के सबूत
इस बस्ती के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने पाया कि अनुसूचित जाति समुदाय के अधिकांश घर कच्चे है तथा मिट्टी, टिन के शेड व फूस आदि से बनाए गए है। जबकि प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत उन्हें पक्का मकान बनाने के लिए पैसा दिया जाता है। बस्ती के कच्चे मकान आवास सहायक के मनमानी के पक्के सबूत दे रहे थे। यही कारण है कि डीएम उक्त आवास सहायक के खिलाफ शो-कॉज पूछने और संतोषजनक जबाव नहीं देने पर कार्रवाई का निर्देश दिए है।
बस्ती वालों को आवास समेत अन्य योजनाओं की नहीं थी जानकारी
इस बस्ती में भ्रमण के क्रम में जिलाधिकारी ने बस्तीवालों से अन्य सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी हासिल करनी चाही, लेकिन वे किसी भी अन्य लाभकारी सरकारी योजनाओं की जानकारी जिलाधिकारी को नहीं दे सकें। जिलाधिकारी ने कहा कि इन टोलों में सरकारी योजनाओं की जानकारी का अभाव है। यह विकास मित्र के दायित्वों के प्रति लापरवाही प्रदर्शित करता है। उन्होंने इस लापरवाही पर संबंधित विकास मित्र से स्पष्टीकरण पूछने का निर्देश दिया।
अनुसूचित जाति टोलों में कैंप लगा सरकारी योजनाओं की दें जानकारी
इस बस्ती में निरीक्षण के दौरान सरकारी योजनाओं की जानकारी के अभाव की पर जिलाधिकारी काफी नाराज हुए। उन्होंने जिला कल्याण पदाधिकारी को निर्देश दिया कि अनुसूचित जाति टोलों में कैम्प आयोजित कर सरकार द्वारा चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी उपलब्ध कराएं। जिससे लोगों के बीच सरकार की कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी हो सके एवं उन्हें उसका लाभ दिया जा सकें।
इस दौरान जिला कल्याण पदाधिकारी, सदर प्रखंड विकास पदाधिकारी एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।
2016 में इंदिरा आवास का नाम बदल रखा गया था पीएम आवास योजना
बता दें कि एक अपै्रल 2016 से ही प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना चलाई जा रही है। इसके तहत बीपीएल श्रेणी मे आने वाले वैसे गरीब जिनका पक्का मकान नहीं है, उन्हें इस योजना का लाभ दिया जाता है, ताकि वे पक्का मकान बना अपना जीवन सुविधाजनक गुजार सकें। बाद में इस योजना का लाभ शहरी क्षेत्र के गरीबों को भी दिया जाने लगा। 2016 के पहले यह योजना इंदिरा आवास योजना के नाम से संचालित होती थी।
ग्रामीण क्षेत्र में घर बनाने के लिए मिलता है 1.20 लाख रूपए
बता दें कि ग्रामीण आवास योजना के तहत बीपीएल श्रेणी के गरीबों को पक्का मकान बनाने के लिए तीन किश्तों में कुल 1.20 लाख रूपए मिलते है। इसके अलावे घर में शौचालय निर्माण के लिए अलग से 12 हजार रूपए तथा मनरेगा योजना के तहत बतौर मजदूरी 22 हजार 500 रूपए दिया जाता है।