पुलिस की तत्परता से बच सकता है भूमि विवाद के कई गंभीर मामले
केटी न्यूज़ / डुमरांव
हत्या के दो दिन पहले राहुल सिंह ने डुमरांव थाना को आवेदन देकर अपनी जान पर खतरा की आशंका जताते हुए जान माल की रक्षा की गुहार थानाध्यक्ष से लगाई थी। लेकिन पुलिस ने इस मामले को हल्के में लिया। डुमराव पुलिस की इस लापरवाही की कीमत राहुल को महज 48 घंटे में अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। भूमि विवाद के मामले में पुलिस की उदासीनता के किस्से सिर्फ यही तक सीमित नहीं है। पिछले दिनों खिरिया ब्रह्म बाबा के पास एक जमीन पर हुई गोलीबारी मामले में भी डुमरांव पुलिस की लापरवाही सामने आई थी। इस जमीन विवाद मामले गोलीबारी से पूर्व एक पक्ष के संतोष चौबे थाना में बैठकर अपना फरियाद कर रहे हैं। उधर जमीन पर गोलीबारी का मामला हुआ और पुलिस ने थाना में बैठे संतोष चौबे को ही गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। शहर के रमेश केसरी का कहना है कि बरसो पूर्व खरीदे गए जमीन पर एक अपराधी चरित्र के भू माफिया ने गलत ढंग से रजिस्ट्री करा कर पुलिस से सांठगांठ कर न सिर्फ जमीन पर कब्जा जमा लिया बल्कि उस जमीन पर अपराधी चरित्र के लोगों के साथ पिस्टल भी लहराया।
शहर में ऐसे मामले चंद उदाहरण मात्र है। अंदर की स्थिति बेहद भयावह है। शहर में अपराधी और पुलिस गठजोड़ भूमि विवाद के आग में घी का काम कर रहा है। शहर में सक्रिय अपराधी गिरोह कुछ अपने तो उससे भी अधिक पुलिस व प्रशासन के दम पर बेखौफ होकर विवादित जमीन में अपने कदम बढ़ाते हैं। आश्चर्य की बात यह कि पुलिस और प्रशासन के जिम्मेदार पदाधिकारी इन अपराधी चरित्र के भू माफियाओं के एक इशारे पर अपना कर्तव्य भूल कर आगे पीछे चलने को तैयार रहते हैं। यही वजह है कि स्थानीय थाना के इर्द गिर्द हर समय भू माफिया सक्रिय रहते हैं। सक्रिय भू माफिया पुलिस प्रशासन के सहयोगी की भूमिका में नजर आते हैं।
पुलिस को होती है भू माफियाओं से मोटी कमाई : जमीन का विवाद शहर की पुलिस की मोटी कमाई का जरिया है। पुलिस को जमीन विवाद का बेसब्री से इंतजार रहता है। लाखों के कीमती जमीन पर जैसे ही विवाद का आवेदन प्राप्त होता है पुलिस की बांछें खिल जाती है। क्योंकि ऐसे मामले में पुलिस को दोनों तरफ से दोनों हाथ भरपूर बैटिंग करने का मौका मिलता है। यह स्थिति औद्योगिक थाना, मुफस्सिल थाना, नगर थाना बक्सर, डुमरांव पुलिस के अलावे नया भोजपुर ओपी पुलिस के साथ भी है।