संत रविदास जयंती पर जिले में चलेगा समरसता संकल्प अभियान
संत शिरोमणि गुरु रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर जिले में समरसता संकल्प अभियान का आयोजन किया जा रहा है। जिला कल्याण पदाधिकारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अभियान के तहत जिले के अनुसूचित जाति एवं जनजाति टोलों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

__ 21 अगस्त को जिला स्तर पर निकलेगी भव्य कलश यात्रा, 27 अगस्त से अनुसूचित जाति टोलों में लगेंगे संत रविदास विकास शिविर
केटी न्यूज/बक्सर।
संत शिरोमणि गुरु रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर जिले में समरसता संकल्प अभियान का आयोजन किया जा रहा है। जिला कल्याण पदाधिकारी से प्राप्त जानकारी के अनुसार, अभियान के तहत जिले के अनुसूचित जाति एवं जनजाति टोलों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य संत रविदास के सामाजिक समरसता और समानता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के साथ ही पात्र परिवारों को सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाना है।अभियान की शुरुआत कलश यात्रा से होगी। जिला से लेकर पंचायत स्तर तक घर-घर कलश का भ्रमण कराया जाएगा। इसके लिए सभी प्रखंडों में प्रखंड विकास पदाधिकारी, प्रखंड कल्याण पदाधिकारी समेत अन्य पदाधिकारियों के नेतृत्व में टोलों में कलश यात्राएं निकाली जाएंगी।

इन यात्राओं के माध्यम से संत गुरु रविदास की 650वीं जयंती का संदेश लोगों तक पहुंचाया जाएगा।21 अगस्त को जिला मुख्यालय में भव्य कलश यात्रा आयोजित की जाएगी। इसमें जिले और राज्य स्तर के गणमान्य लोग भी शामिल होंगे। आयोजन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।वहीं, अभियान के दूसरे चरण में 27 अगस्त से 15 फरवरी तक संत रविदास विकास शिविर आयोजित किए जाएंगे। ये शिविर प्रत्येक सप्ताह गुरुवार को जिले के विभिन्न अनुसूचित जाति टोलों में लगाए जाएंगे। जिला कल्याण पदाधिकारी की ओर से शिविरों के आयोजन को लेकर माइक्रो प्लान तैयार किया जा रहा है।शिविरों में विभिन्न विभागों की योजनाओं का लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाने के लिए विशेष व्यवस्था की जाएगी।

इसमें राशन कार्ड, उज्ज्वला योजना, आंगनबाड़ी सेवाएं, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, कौशल विकास, विभिन्न पेंशन योजनाएं, आयुष्मान कार्ड, प्रधानमंत्री आवास योजना, वास भूमि, हर घर नल-जल और बिजली कनेक्शन समेत अन्य योजनाओं से परिवारों को आच्छादित किया जाएगा।प्रशासन का प्रयास है कि अनुसूचित जाति एवं जनजाति परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए अनावश्यक परेशानी न हो और शिविर के माध्यम से उन्हें एक ही स्थान पर अधिक से अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इसे सामाजिक समरसता के साथ कल्याणकारी योजनाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

