एशिया पैसिफिक हेल्थ केयर में सर्दी-बुखार का इलाज कराने पहुंचे अधेड़ की मौत हंगामा, डा. राजेश मिश्रा पर परिजनों ने लगाये गंभीर आरोप
बक्सर में प्रशासनिक मौन के कारण निजी नर्सिंग होम बेलगाम होते जा रहे है। न उनके लिए कोई नियम है ना कानून एक बोर्ड लगा और खुल गया अस्पताल। कौन-डाक्टर कब आते है जिनका नाम है वो रहते भी है या नही। उनके नाम पर झोलाझाप डाक्टर अपना धंधा चमका रहे है।

केटी न्यूज/बक्सर
बक्सर में प्रशासनिक मौन के कारण निजी नर्सिंग होम बेलगाम होते जा रहे है। न उनके लिए कोई नियम है ना कानून एक बोर्ड लगा और खुल गया अस्पताल। कौन-डाक्टर कब आते है जिनका नाम है वो रहते भी है या नही। उनके नाम पर झोलाझाप डाक्टर अपना धंधा चमका रहे है। एक गंभीर सवाल खड़ा रहा है। इसे कोई देखने व जांचने वाला नही है। ऐसा नही की प्रवेक्षकों की टीम नही है। परन्तु उनकों अपनी जेब गर्म करने से फुरसत मिले तब तो जनता के स्वस्थ्य पर ध्यान देगें। एक ऐसा ही मामला सामने है गोलंबर- जासो रोड स्थित एशिया पैसिफिक हेल्थ केयर में इलाज के दौरान एक मरीज की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।

आक्रोशित लोगों ने अस्पताल प्रबंधन और इलाज करने वाले डॉक्टर राजेश मिश्रा पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। मृतक की पहचान अहिरौली गांव निवासी श्रीकृष्ण यादव (55) के रूप में हुई है। परिजनों ने बताया कि श्रीकृष्ण यादव खांसी, जुकाम और बुखार की शिकायत लेकर सोमवार सुबह करीब 9 बजे खुद रिक्शा से अस्पताल पहुंचे थे। आरोप है कि उस समय अस्पताल में कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था। इसके बावजूद मरीज को भर्ती कर लिया गया। परिजनों के अनुसार, पूरे दिन मरीज को भर्ती रखकर केवल इंतजार कराया गया और दोपहर बाद डॉक्टर राजेश मिश्रा ने मरीज को देखा। परिजनों का आरोप है कि शाम करीब 6 बजे मरीज की हालत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद डॉक्टरों ने उसे रेफर कर दिया। लेकिन रेफर किए जाने के बाद भी बिल भुगतान को लेकर मरीज को काफी देर तक अस्पताल में ही रोके रखा गया। इस दौरान इलाज में देरी होती रही और मरीज की स्थिति और गंभीर हो गई। परिजनों का दावा है कि जब मरीज को एंबुलेंस से दूसरे अस्पताल ले जाया जा रहा था, तभी रास्ते में उसकी मौत हो गई।

मरीज की मौत की खबर मिलते ही परिजन और आसपास के लोग अस्पताल परिसर में जुट गए और निजी अस्पतालों की कार्यशैली को लेकर हंगामा करने लगे। परिजनों ने आरोप लगाया कि आजकल कई निजी अस्पतालों में इलाज से पहले मोटी रकम जमा कराने की शर्त रखी जाती है। उसके बाद ही इलाज शुरू किया जाता है। नहीं तो मरीज को सीधे रेफर कर दिया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई अस्पताल केवल कमाई का जरिया बनकर रह गए हैं, जहां “पहले पैसा, फिर इलाज” की नीति अपनाई जा रही है। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि जिले में ऐसे कई अस्पताल चल रहे हैं, जहां डिग्रीधारी डॉक्टरों की कमी है, इसके बावजूद धड़ल्ले से इलाज किया जा रहा है।

घटना के बाद अस्पताल परिसर में कुछ देर के लिए तनावपूर्ण माहौल बन गया। सूचना मिलते ही नगर थाना और मुफस्सिल थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझा-बुझाकर स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने शव को अपने वाहन से परिजनों के साथ उनके घर तक पहुंचाया। फिलहाल परिजन अस्पताल प्रबंधन से मुआवजा देने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं पुलिस अधिकारियों ने कहा कि पूरे मामले की जांच की जा रही है। जांच के बाद यदि अस्पताल या इलाज में किसी तरह की लापरवाही पाई जाती है, तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत के कारणों पता चल सकेगा।

बोले एशिया पैसिफिक हेल्थ केयर के डा. राजेश मिश्रा

डाक्टर राजेश कुमार ने बताया कि मरीज की अस्पताल में इलाज के दौरान मौत नही हुई है। उनको रेफर किया गया था जहां रास्ते में मौत हो गयी। हमारे अस्पताल में मौत नही हुई है। मृतक के बेटे को सुबह से बताया जा रहा था कि आपके पिता जी की तबियत ज्यादा खराब है। आप बाहर लेकर पटना-वाराणसी चले जाइये। परन्तु वह नहीं मान रहा था। अनंत में लेकर गया उसी दौरान मौत हो गयी। पुरे मामले में राजनिति की जा रही है। इलाज में राजनिति नही होनी चाहिए।
