मौत के सौदागरों पर प्रशासन का वार: अवैध अस्पताल-मेडिकल स्टोर सील, एफआईआर की तैयारी
बक्सर जिले में निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोरों की मनमानी अब प्रशासन के रडार पर है। लगातार सामने आ रही मौतों और इलाज में गंभीर लापरवाही के मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। इसी पृष्ठभूमि में जिला प्रशासन ने सख्त संदेश देते हुए मंगलवार की देर शाम शहर के सिविल लाइन मठिया मोहल्ला में संचालित एक निजी अस्पताल और उससे जुड़े मेडिकल स्टोर पर छापेमारी कर पूरे अवैध सिस्टम को बेनकाब कर दिया।
-- निजी स्वास्थ्य व्यवस्था पर कसा शिकंजा, बक्सर में लापरवाह इलाज और एक्सपायरी दवाओं के नेटवर्क का पर्दाफाश
केटी न्यूज/बक्सर
बक्सर जिले में निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोरों की मनमानी अब प्रशासन के रडार पर है। लगातार सामने आ रही मौतों और इलाज में गंभीर लापरवाही के मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। इसी पृष्ठभूमि में जिला प्रशासन ने सख्त संदेश देते हुए मंगलवार की देर शाम शहर के सिविल लाइन मठिया मोहल्ला में संचालित एक निजी अस्पताल और उससे जुड़े मेडिकल स्टोर पर छापेमारी कर पूरे अवैध सिस्टम को बेनकाब कर दिया।अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) बक्सर अविनाश कुमार के नेतृत्व में की गई इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया कि बिना पंजीकरण, बिना लाइसेंस और बिना मानक के चल रहे अस्पताल अब नहीं बच पाएंगे।

छापेमारी के दौरान जब अस्पताल संचालक से वैध पंजीकरण, संचालन अनुमति, चिकित्सकीय मानकों से जुड़े दस्तावेज मांगे गए, तो वह एक भी कागजात प्रस्तुत नहीं कर सका। यह स्थिति प्रशासन के लिए बेहद गंभीर और चिंताजनक मानी गई।अस्पताल परिसर में संचालित ओम मेडिकल स्टोर की जांच में हालात और भी चौंकाने वाले निकले। जांच टीम को बड़ी मात्रा में एक्सपायरी दवाएं मिलीं, जिनका इस्तेमाल मरीजों की जान पर सीधा खतरा बन सकता था। इतना ही नहीं, दवा दुकान संचालक ड्रग लाइसेंस तक नहीं दिखा सका और न ही वहां कोई प्रशिक्षित फार्मासिस्ट मौजूद था।

नियमों की इस खुली धज्जियां उड़ाने पर प्रशासन ने बिना देर किए अस्पताल और मेडिकल स्टोर दोनों को सील कर दिया।एसडीएम अविनाश कुमार ने बताया कि मेडिकल स्टोर के संचालक रंजन कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। वहीं सील किए गए अस्पताल का संचालन डॉ. ज्ञान प्रकाश के नाम से सामने आया है, जहां डॉ. कमलेश तिवारी भी सेवाएं दे रही थीं। प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि इन चिकित्सकों की डिग्री, पंजीकरण और कार्यक्षेत्र से जुड़ी वैधानिक स्थिति क्या है।एसडीएम ने दो टूक कहा कि निजी अस्पतालों में हो रही मौतें महज हादसा नहीं, बल्कि लापरवाही और लालच का नतीजा हैं। प्रशासन इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगा।

आने वाले दिनों में शहर और जिले भर के सभी निजी अस्पतालों और मेडिकल स्टोरों की सघन जांच की जाएगी और दोषियों पर कठोर कार्रवाई तय है।गौरतलब है कि बीते एक सप्ताह में डुमरांव, नया बाजार स्थित बनारसी अस्पताल और गोलंबर स्थित एशिया पैसिफिक हेल्थ केयर में इलाज के दौरान मरीजों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं। इन घटनाओं ने प्रशासन को झकझोर दिया है।प्रशासन की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई से निजी अस्पताल संचालकों और दवा विक्रेताओं में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं आम जनता को उम्मीद जगी है कि अब स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा और मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त लगाम लगेगी।

