बक्सर शिक्षा विभाग में नियमों की खुली अनदेखी! फर्जी शिक्षक के आरोपी को बनाया कंप्यूटर ऑपरेटर, आरडीडी की जांच रिपोर्ट से मचा हड़कंप

शिक्षा विभाग, बक्सर में नियमों को ताक पर रखकर की जा रही कार्यप्रणाली का एक और बड़ा मामला सामने आया है। क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक (आरडीडी), पटना प्रमंडल की जांच रिपोर्ट ने जिला शिक्षा कार्यालय, बक्सर की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बक्सर शिक्षा विभाग में नियमों की खुली अनदेखी! फर्जी शिक्षक के आरोपी को बनाया कंप्यूटर ऑपरेटर, आरडीडी की जांच रिपोर्ट से मचा हड़कंप

__ निगरानी जांच में नाम आने के बावजूद आदित्य रंजन की तैनाती बरकरार, बेल्ट्रॉन से नियुक्ति के विभागीय आदेश की अवहेलना; मानदेय भुगतान और नियमों के उल्लंघन पर उठे गंभीर सवाल

केटी न्यूज/बक्सर। 

शिक्षा विभाग, बक्सर में नियमों को ताक पर रखकर की जा रही कार्यप्रणाली का एक और बड़ा मामला सामने आया है। क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक (आरडीडी), पटना प्रमंडल की जांच रिपोर्ट ने जिला शिक्षा कार्यालय, बक्सर की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि बुनियादी विद्यालय में फर्जी शिक्षक होने के आरोप और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की कार्रवाई के दायरे में रहे आदित्य रंजन को जिला शिक्षा पदाधिकारी द्वारा कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत रखना न केवल विभागीय निर्देशों के विपरीत है, बल्कि कार्यालय हित में भी कदापि उचित नहीं है।आरडीडी की जांच रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा विभाग के 3 मार्च 2025 के स्पष्ट निर्देश के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी, बक्सर ने पांच सदस्यीय समिति गठित की थी।

समिति की अनुशंसा पर आदित्य रंजन को कंप्यूटर ऑपरेटर तथा अन्य कर्मियों को एमटीएस सहित विभिन्न कार्यों में लगाए रखा गया। जबकि विभाग का स्पष्ट आदेश था कि कंप्यूटर ऑपरेटर की व्यवस्था केवल बेल्ट्रॉन अथवा विशेष परिस्थिति में समाहरणालय, बक्सर के पैनल से की जाएगी। इसके बावजूद तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी ने नियमों की अनदेखी करते हुए आदित्य रंजन समेत चार लोगों को कार्य पर बनाए रखा।जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि पटना उच्च न्यायालय के आदेश के बाद निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की जांच में बक्सर जिले के 27 कथित फर्जी शिक्षकों की सूची तैयार की गई थी, जिसमें आदित्य रंजन का भी नाम शामिल था।

वर्ष 2013 में शिक्षा विभाग ने ऐसे सभी चिन्हित फर्जी शिक्षकों के विरुद्ध कार्रवाई का निर्देश जारी किया था। अब तक न तो निगरानी की रिपोर्ट निरस्त हुई है और न ही विभागीय आदेश वापस लिया गया है। इसके बावजूद आदित्य रंजन की तैनाती जारी रहना कई सवाल खड़े करता है।सूत्रों के अनुसार, निगरानी के पत्र और आरडीडी के निर्देश के बाद एमटीएस के रूप में कार्यरत विनय कुमार और उत्तम कुमार को पद से हटा दिया गया है, लेकिन आदित्य रंजन अब भी कंप्यूटर ऑपरेटर के रूप में कार्यरत हैं। इसे लेकर विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब शिक्षा विभाग ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि आउटसोर्स कर्मियों के मानदेय के लिए कोई बजटीय प्रावधान उपलब्ध नहीं होगा, तो आदित्य रंजन का मानदेय आखिर किस मद से दिया जाएगा?

यदि किसी अन्य मद की राशि का विचलन कर भुगतान किया जाता है, तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?उल्लेखनीय है कि केशव टाइम्स पूर्व में भी आदित्य रंजन पर लगे आरोपों तथा बक्सर के 27 कथित फर्जी शिक्षकों से जुड़े मामले को प्रमुखता से प्रकाशित कर चुका है। इसके बावजूद संबंधित कर्मी के विरुद्ध कार्रवाई नहीं होना विभागीय अधिकारियों की कार्यशैली, पारदर्शिता और नियमों के पालन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। अब निगरानी रिपोर्ट और आरडीडी की जांच के बाद सबकी निगाहें शिक्षा विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।