चौसा में शिक्षा सुधार की नई पहल: विद्यालय प्रबंधन में समुदाय की बढ़ेगी सीधी भागीदारी

सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर चौसा में आयोजित तीन दिवसीय गैर आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम बुधवार को संपन्न हो गया। बिहार शिक्षा परियोजना, बक्सर के तत्वावधान में चौसा उच्च विद्यालय परिसर में आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यालय प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और सामुदायिक सहभागिता को व्यवहारिक रूप देना रहा।

चौसा में शिक्षा सुधार की नई पहल: विद्यालय प्रबंधन में समुदाय की बढ़ेगी सीधी भागीदारी

-- तीन दिवसीय प्रशिक्षण के समापन पर जवाबदेही, निगरानी और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया को मजबूत करने पर दिया गया जोर

केटी न्यूज/चौसा

सरकारी विद्यालयों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर चौसा में आयोजित तीन दिवसीय गैर आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम बुधवार को संपन्न हो गया। बिहार शिक्षा परियोजना, बक्सर के तत्वावधान में चौसा उच्च विद्यालय परिसर में आयोजित इस प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यालय प्रबंधन में पारदर्शिता, जवाबदेही और सामुदायिक सहभागिता को व्यवहारिक रूप देना रहा।प्रशिक्षण में संबंधित सीआरसी के अंतर्गत आने वाले 12 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों एवं विद्यालय शिक्षा समिति के सदस्यों ने भाग लिया। प्रतिभागियों को विद्यालय संचालन की प्रक्रियाओं, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, संसाधनों के समुचित उपयोग तथा वित्तीय पारदर्शिता के व्यावहारिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी दी गई।

इसके साथ ही बच्चों के नामांकन, नियमित उपस्थिति और सीखने के स्तर में सुधार के लिए समुदाय की भूमिका पर विशेष चर्चा की गई।प्रशिक्षण सत्रों में बताया गया कि विद्यालय शिक्षा समिति केवल औपचारिकता भर नहीं है, बल्कि यह स्थानीय स्तर पर शिक्षा व्यवस्था की निगरानी और सुधार की मजबूत कड़ी है। समिति की सक्रियता से न सिर्फ योजनाओं का सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है, बल्कि विद्यालय और अभिभावकों के बीच विश्वास का वातावरण भी मजबूत होता है।समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी हृषिकेश कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए निर्णय प्रक्रिया में सामूहिकता अनिवार्य है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यालय से जुड़े विकास कार्यों, निर्माण गतिविधियों और शैक्षणिक कार्यक्रमों में समिति की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और किसी भी प्रकार की अनियमितता की संभावना कम होगी।उन्होंने प्रधानाध्यापकों से अपील की कि वे विद्यालय को समुदाय से जोड़ने की दिशा में पहल करें और अभिभावकों को नियमित रूप से विद्यालय गतिविधियों से अवगत कराएं। उनके अनुसार जब स्थानीय लोग विद्यालय के कामकाज से जुड़ेंगे, तभी शिक्षा की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार संभव हो सकेगा।