डीईओ बनाम जिला अपीलीय प्राधिकार, एक लिपिक की प्रतिनियुक्ति ने खोली शिक्षा कार्यालय की अंदरूनी खींचतान

जिला शिक्षा कार्यालय बक्सर एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन वजह शैक्षणिक सुधार नहीं बल्कि अफसरशाही की आपसी खींचतान है। एक साधारण लिपिक की प्रतिनियुक्ति का मामला अब जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) संदीप रंजन और जिला अपीलीय प्राधिकार के बीच टकराव का कारण बन गया है। यह विवाद अब सिर्फ प्रशासनिक निर्णय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अधिकार क्षेत्र और नियमों की व्याख्या की जंग में तब्दील हो चुका है।

डीईओ बनाम जिला अपीलीय प्राधिकार, एक लिपिक की प्रतिनियुक्ति ने खोली शिक्षा कार्यालय की अंदरूनी खींचतान

-- नियमों की दुहाई या अधिकारों की जंग, डीईओ के फैसले पर अपीलीय प्राधिकार का सीधा ऐतराज

केटी न्यूज/बक्सर।

जिला शिक्षा कार्यालय बक्सर एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन वजह शैक्षणिक सुधार नहीं बल्कि अफसरशाही की आपसी खींचतान है। एक साधारण लिपिक की प्रतिनियुक्ति का मामला अब जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) संदीप रंजन और जिला अपीलीय प्राधिकार के बीच टकराव का कारण बन गया है। यह विवाद अब सिर्फ प्रशासनिक निर्णय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अधिकार क्षेत्र और नियमों की व्याख्या की जंग में तब्दील हो चुका है।मामला लिपिक हिमाद्री कुमार से जुड़ा है, जो पूर्व में बक्सर जिले में कार्यरत थे। स्थानांतरण के बाद वर्ष 2024 में उनकी पुनः जिले में वापसी हुई और उन्हें जिला अपीलीय प्राधिकार में प्रतिनियुक्त किया गया।सब कुछ सामान्य चल रहा था, लेकिन इसी बीच डीईओ को हिमाद्री कुमार के विरुद्ध शिकायत प्राप्त हुई।

शिकायत के आलोक में डीईओ ने 14 जनवरी को बड़ा कदम उठाते हुए उनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त कर दी और उन्हें राजकीय कन्या उच्च विद्यालय, चक्की में योगदान देने का आदेश जारी कर दिया।डीईओ यहीं नहीं रुके बल्कि कार्य में बाधा न हो, इसके लिए जिला शिक्षा कार्यालय में पदस्थ एक प्रशाखा पदाधिकारी को जिला अपीलीय प्राधिकार में भेज दिया गया। लेकिन यही फैसला अब विवाद की जड़ बन गया है। जिला अपीलीय प्राधिकार डॉ. अजय कुमार पांडेय ने डीईओ को पत्र भेजकर स्पष्ट किया कि हिमाद्री कुमार की प्रतिनियुक्ति तत्काल प्रभाव से रद्द की जाए, यानी उन्हें दोबारा अपीलीय प्राधिकार में बहाल किया जाए।इस पत्र के बाद शिक्षा विभाग के गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

सवाल उठ रहे हैं कि क्या डीईओ को अर्द्ध न्यायिक संस्था में तैनाती बदलने का एकतरफा अधिकार है, या फिर अपीलीय प्राधिकार की सहमति अनिवार्य है।इस पूरे विवाद पर डीईओ संदीप रंजन ने साफ कहा कि जिला अपीलीय प्राधिकार एक अर्द्ध न्यायिक व्यवस्था है और विभागीय नियमों के तहत वहां लिपिक उपलब्ध कराना उनकी जिम्मेदारी है। उन्होंने दो टूक कहा कि नियमों में कहीं यह नहीं लिखा कि किसी एक विशेष व्यक्ति को ही वहां प्रतिनियुक्त किया जाए। उनके अनुसार लिया गया निर्णय पूरी तरह विभागीय नियमों के अनुरूप है।फिलहाल एक लिपिक की कुर्सी ने पूरे जिला शिक्षा कार्यालय की कार्यप्रणाली और अधिकारों की सीमाओं पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब देखना यह होगा कि यह टकराव पत्राचार तक सीमित रहता है या किसी बड़े प्रशासनिक फैसले की ओर बढ़ता है।