हिंदी को व्यवहार और संस्कार से जोड़ने का लिया संकल्प, विद्यार्थियों ने जाना भाषा का गौरव
हिंदी महज संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक चेतना, संवेदना और पहचान से जुड़ी भाषा है। इसे दैनिक व्यवहार और जीवन-मूल्यों से जोड़ने की जरूरत है। इसी संदेश के साथ सोमवार को राजकीय डिग्री महाविद्यालय, चौगाईं में हिंदी दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया।

__ राजकीय डिग्री महाविद्यालय चौगाईं में हिंदी दिवस पर आयोजित हुआ कार्यक्रम, भाषा की उत्पत्ति से आधुनिक प्रासंगिकता तक हुई चर्चा
केटी न्यूज/चौगाईं।
हिंदी महज संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक चेतना, संवेदना और पहचान से जुड़ी भाषा है। इसे दैनिक व्यवहार और जीवन-मूल्यों से जोड़ने की जरूरत है। इसी संदेश के साथ सोमवार को राजकीय डिग्री महाविद्यालय, चौगाईं में हिंदी दिवस के अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति जागरूकता, रुचि और सम्मान की भावना विकसित करना रहा।कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। प्राचार्य प्रो. गुलाब फलहारी के मार्गदर्शन में आयोजित कार्यक्रम में शिक्षकों ने हिंदी के महत्व और वर्तमान समय में इसकी उपयोगिता पर अपने विचार रखे।

सहायक अध्यापक डॉ. विकास कुमार राणा, बबलू कुमार, मनीष कुमार, डॉ. अशोक यादव एवं मो. अर्शे आलम समेत शिक्षकेतर कर्मचारी उपस्थित रहे।वक्ताओं ने हिंदी भाषा की उत्पत्ति, विकास और साहित्यिक समृद्धि पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बदलते तकनीकी और सामाजिक परिवेश में हिंदी की भूमिका लगातार बढ़ रही है। विद्यार्थियों से हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग के साथ इसके साहित्य और इतिहास को समझने का आह्वान किया गया।इस दौरान उपस्थित लोगों ने एक स्वर में हिंदी को अपनी पहचान, संस्कृति और अस्मिता का महत्वपूर्ण आधार बताया। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने हिंदी के सम्मान, प्रचार-प्रसार और व्यवहार में अधिकाधिक प्रयोग का संकल्प लिया।

