चार दिन में दुष्कर्म कांड का खुलासा, मुख्य आरोपित शिक्षक समेत चार गिरफ्तार, प्रभारी डीएसपी ने प्रेस वार्ता में दी जानकारी
कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र के एक सरकारी मध्य विद्यालय की नाबालिग पूर्व छात्रा से दुष्कर्म और घटना से जुड़े वीडियो के वायरल होने के मामले में बक्सर पुलिस ने महज चार दिनों के भीतर कार्रवाई करते हुए चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपितों में विद्यालय के प्रधानाध्यापक मोहम्मद इमाम अली अंसारी, शिक्षक अरविन्द कुमार, शिक्षक वीरेंद्र प्रसाद उर्फ वीरेंद्र पाल तथा वीरेंद्र का सहयोगी विकास कुमार शामिल हैं।

__ प्रधानाध्यापक, आरोपित शिक्षक और सहयोगी पुलिस की गिरफ्त में; स्टेशन से पकड़ा गया वीरेंद्र, वायरल वीडियो की फॉरेंसिक जांच में जुटी पुलिस
केटी न्यूज/डुमरांव।
कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र के एक सरकारी मध्य विद्यालय की नाबालिग पूर्व छात्रा से दुष्कर्म और घटना से जुड़े वीडियो के वायरल होने के मामले में बक्सर पुलिस ने महज चार दिनों के भीतर कार्रवाई करते हुए चार आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपितों में विद्यालय के प्रधानाध्यापक मोहम्मद इमाम अली अंसारी, शिक्षक अरविन्द कुमार, शिक्षक वीरेंद्र प्रसाद उर्फ वीरेंद्र पाल तथा वीरेंद्र का सहयोगी विकास कुमार शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, मामले में फरार चल रहे वीरेंद्र पाल को रविवार की रात बक्सर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म संख्या एक से गिरफ्तार किया गया। पुलिस का दावा है कि वह लगातार अपना ठिकाना बदलकर गिरफ्तारी से बचने का प्रयास कर रहा था।

मंगलवार को डुमरांव के प्रभारी डीएसपी समीर कुमार सिंह ने प्रेस वार्ता आयोजित कर मामले की जानकारी दी। प्रभारी डीएसपी के अनुसार, 3 सितंबर को छात्रा के यौन शोषण की सूचना मिलने के बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर डुमरांव एसडीपीओ के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। कृष्णाब्रह्म थाना कांड संख्या 162/26 दर्ज कर तकनीकी अनुसंधान, साक्ष्यों के सत्यापन और मानवीय सूचना के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई। जांच के क्रम में सबसे पहले विद्यालय के प्रधानाध्यापक को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद मुख्य आरोपी शिक्षक अरविन्द कुमार को भी पुलिस ने दबोच लिया।

__ वीरेंद्र को भगाने में सहयोग का आरोप
पुलिस के मुताबिक मामले का दूसरा प्रमुख आरोपी शिक्षक वीरेंद्र पाल गिरफ्तारी के डर से लगातार स्थान बदल रहा था। पुलिस टीम को सूचना मिली कि वह बक्सर से बाहर निकलने की तैयारी में है। इसके बाद तकनीकी अनुसंधान और मुखबिरों से मिली सूचना के आधार पर उसे बक्सर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में सामने आया कि उसका चचेरा भाई विकास कुमार उसे एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने और पुलिस से बचाने में सहयोग कर रहा था। इसके बाद विकास को भी गिरफ्तार कर लिया गया। प्रेस वार्ता में प्रभारी डीएसपी ने बताया कि मामले के सभी नामजद आरोपितों को गिरफ्तार किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि पुलिस जल्द ही अनुसंधान पूरा कर न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल करने की दिशा में काम कर रही है, ताकि मामले का स्पीडी ट्रायल कराया जा सके।

__ वायरल वीडियो की फॉरेंसिक जांच, कई और नाम सामने आने की संभावना
पुलिस अब वायरल वीडियो के स्रोत और उसकी सत्यता की जांच में जुटी है। पुलिस के अनुसार आरोपी शिक्षक अरविन्द कुमार का मोबाइल फोन फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि वायरल वीडियो किस डिवाइस से तैयार हुआ और उसके प्रसार में किन लोगों की भूमिका रही। डीएसपी ने कहा कि वीडियो को वायरल करने वालों की पहचान के लिए भी अनुसंधान जारी है और जांच में सामने आने वाले अन्य लोगों पर भी कार्रवाई की जाएगी।इस मामले में 29 अगस्त को विद्यालय पहुंचे छात्रा के गांव के ग्रामीणों द्वारा शिक्षकों के साथ मारपीट किए जाने की घटना को लेकर भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठे थे। इस पर प्रभारी डीएसपी ने कहा कि उस मामले की भी जांच चल रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।गौरतलब है कि वीडियो वायरल होने के बाद 3 सितंबर को छात्रा की मां की शिकायत पर कृष्णाब्रह्म थाने में पॉक्सो एक्ट सहित संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। घटना के बाद शिक्षा विभाग ने आरोपी प्रधानाध्यापक और शिक्षकों के निलंबन की कार्रवाई भी की थी। पुलिस की ताजा कार्रवाई से मामले में अब आगे की कानूनी प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है।

__ वीरेंद्र पाल का पुराना आपराधिक मामला भी सामने आया
पुलिस की विज्ञप्ति के अनुसार गिरफ्तार आरोपी वीरेंद्र पाल के खिलाफ कृष्णाब्रह्म थाने में वर्ष 2020 में एससी/एसटी एक्ट समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज था। उक्त मामले का उल्लेख उसके आपराधिक इतिहास में किया गया है। इससे आरोपी शिक्षक के पूर्व रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, उस पुराने मामले में उसकी गिरफ्तारी, जेल में रहने की अवधि और विभागीय कार्रवाई से जुड़ी विस्तृत जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है।

