केसठ में रबी फसल तैयार, कटाई में जुटे किसान, खेतों में पहुंचने लगे हार्वेस्टर

प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों में रबी फसल अब पूरी तरह पककर तैयार हो चुकी है। गेहूं की फसल पकने के साथ ही किसान कटाई कार्य में जुट गए हैं। खेतों में इन दिनों सुबह से ही चहल-पहल देखी जा रही है और हार्वेस्टर मशीनों की आवाज गूंजने लगी है।किसानों का कहना है कि इस बार मौसम अनुकूल रहने के कारण फसल की गुणवत्ता अच्छी है, जिससे बेहतर उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है। कई किसान पारंपरिक तरीके से मजदूरों के सहारे कटाई कर रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में किसान समय और लागत बचाने के लिए हार्वेस्टर का सहारा ले रहे हैं।कटाई कार्य को लेकर गांवों में उत्साह का माहौल है।

केसठ में रबी फसल तैयार, कटाई में जुटे किसान, खेतों में पहुंचने लगे हार्वेस्टर

केटी न्यूज/केसठ। 

प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों में रबी फसल अब पूरी तरह पककर तैयार हो चुकी है। गेहूं की फसल पकने के साथ ही किसान कटाई कार्य में जुट गए हैं। खेतों में इन दिनों सुबह से ही चहल-पहल देखी जा रही है और हार्वेस्टर मशीनों की आवाज गूंजने लगी है।किसानों का कहना है कि इस बार मौसम अनुकूल रहने के कारण फसल की गुणवत्ता अच्छी है, जिससे बेहतर उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही है। कई किसान पारंपरिक तरीके से मजदूरों के सहारे कटाई कर रहे हैं, वहीं बड़ी संख्या में किसान समय और लागत बचाने के लिए हार्वेस्टर का सहारा ले रहे हैं।कटाई कार्य को लेकर गांवों में उत्साह का माहौल है। किसान जल्द से जल्द फसल को सुरक्षित घर तक पहुंचाने में जुटे हुए हैं, ताकि किसी प्रकार के मौसमीय नुकसान से बचा जा सके। यदि मौसम इसी तरह साफ रहा तो इस वर्ष गेहूं उत्पादन बेहतर रहने की संभावना है, जिससे किसानों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही है।

__ समय और अगलगी से बचाव को लेकर किसान हार्वेस्टर से करवा रहे फसल की कटाई:

प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न गांवों में रबी फसल की कटाई का कार्य तेज हो गया है। किसान समय की बचत और आग लगने जैसी संभावित घटनाओं से बचाव को लेकर अब तेजी से हार्वेस्टर मशीन का उपयोग कर रहे हैं। खेतों में सूखी फसल के कारण आग लगने का खतरा बना रहता है, ऐसे में किसान जल्द कटाई कर फसल को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने में जुटे हैं।किसानों का कहना है कि हार्वेस्टर से कटाई करने पर कम समय में अधिक क्षेत्र की फसल काटी जा सकती है, जिससे अचानक लगने वाली आग या खराब मौसम से होने वाले नुकसान की संभावना कम हो जाती है। यही वजह है कि इस बार बड़ी संख्या में किसान आधुनिक मशीनों का सहारा ले रहे हैं।