उड़ीसा में किसान नेताओं की गिरफ्तारी से बिहार में आक्रोश, रिहाई की मांग तेज
उड़ीसा में चल रहे किसान आंदोलन के दौरान प्रमुख किसान नेताओं की गिरफ्तारी के बाद बिहार में किसानों के बीच भारी आक्रोश देखा जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा, बिहार ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाया है।
केटी न्यूज/चौसा
उड़ीसा में चल रहे किसान आंदोलन के दौरान प्रमुख किसान नेताओं की गिरफ्तारी के बाद बिहार में किसानों के बीच भारी आक्रोश देखा जा रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा, बिहार ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करते हुए सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का आरोप लगाया है।जानकारी के अनुसार, पिछले 17 वर्षों से जनजातीय आजीविका और वन अधिकारों की मांगों को लेकर संघर्षरत नव निर्माण कृषक संघ के संयोजक अक्षय कुमार के नेतृत्व में 22 मार्च से उड़ीसा के कैंझर घाटागा तारिणी से भुवनेश्वर तक 5000 किसानों की पदयात्रा निकाली गई थी।

यह पदयात्रा शांतिपूर्ण ढंग से आगे बढ़ रही थी। नौवें दिन जब किसान नखरा पहुंचे, तब वहां एक विशाल सभा का आयोजन प्रस्तावित था।सभा को संबोधित करने के लिए देश के प्रसिद्ध किसान नेता राकेश टिकैत, सांसद सुधाकर सिंह तथा किसान नेता दिनेश कुमार उड़ीसा पहुंचे थे। आरोप है कि सभा स्थल पर बड़ी संख्या में किसानों के जुटने से घबराकर प्रशासन ने राजमार्ग अवरुद्ध होने की आशंका का हवाला देते हुए भारी पुलिस बल तैनात कर दिया।संयुक्त किसान मोर्चा के अनुसार, पुलिस ने सभा को विफल करने के उद्देश्य से बल प्रयोग करते हुए करीब 750 किसानों सहित उक्त नेताओं को जबरन गिरफ्तार कर लिया। इसे मोर्चा ने “अघोषित आपातकाल” करार देते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है।

इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए बिहार के किसान नेताओं अशोक प्रसाद सिंह, रामायण सिंह, भूप नारायण सिंह, प्रो. आनंद किशोर, जनक देव सिंह, आशीष रंजन सहित अन्य ने तीखी नाराजगी जताई है। नेताओं ने कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन को कुचलने की साजिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार से मांग की है कि सभी गिरफ्तार किसानों और नेताओं को अविलंब बिना शर्त रिहा किया जाए। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो बिहार और उड़ीसा के किसान संयुक्त रूप से सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।

