32 घंटे बाद मिला गंगा के भागड़ में लापता हुई 10 वर्षीय नेहा का शव, स्वजनों के क्रंदन-चित्कार से गमगीन हुआ माहौल

गंगा के भागड़ में नाव पलटने के दर्दनाक हादसे के 32 घंटे बाद आखिरकार लापता 10 वर्षीय किशोरी नेहा कुमारी का शव बरामद कर लिया गया। बुधवार की शाम करीब चार बजे एनडीआरएफ की टीम ने अथक प्रयास के बाद पानी से शव को बाहर निकाला। जैसे ही मासूम का शव किनारे लाया गया, वहां मौजूद स्वजनों के क्रंदन-चीत्कार से पूरा माहौल गमगीन हो उठा।

32 घंटे बाद मिला गंगा के भागड़ में लापता हुई 10 वर्षीय नेहा का शव, स्वजनों के क्रंदन-चित्कार से गमगीन हुआ माहौल

-- एनडीआरएफ ने बुधवार शाम चार बजे बरामद किया शव, गांव में पसरा मातम, पीपा पुल की मांग तेज

-- मंगलवार की सुबह आठ बजे भागड़ में पलट गई थी नाव, हादसे के बाद से लापता किशोरी की हो रही थी तलाश

केटी न्यूज/सिमरी

गंगा के भागड़ में नाव पलटने के दर्दनाक हादसे के 32 घंटे बाद आखिरकार लापता 10 वर्षीय किशोरी नेहा कुमारी का शव बरामद कर लिया गया। बुधवार की शाम करीब चार बजे एनडीआरएफ की टीम ने अथक प्रयास के बाद पानी से शव को बाहर निकाला। जैसे ही मासूम का शव किनारे लाया गया, वहां मौजूद स्वजनों के क्रंदन-चीत्कार से पूरा माहौल गमगीन हो उठा।नेहा की पहचान नवरंग राय के डेरा गांव निवासी लालबाबू राम की इकलौती पुत्री के रूप में हुई है। बेटी का शव देखते ही पिता लालबाबू राम बेसुध हो गए, जबकि मां और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। गांव की महिलाएं भी इस हृदयविदारक दृश्य को देख अपने आंसू नहीं रोक सकीं।बताया जाता है कि मंगलवार की सुबह खेतों में फसल कटनी के लिए जा रही महिलाओं से भरी नाव गंगा के भागड़ में पलट गई थी। इस हादसे में एक दर्जन महिलाएं किसी तरह तैरकर बाहर निकल आईं, लेकिन नेहा गहरे पानी में समा गई थी। घटना के बाद से ही स्थानीय गोताखोरों के साथ एनडीआरएफ की टीम लगातार तलाश में जुटी थी।

-- गांव में पसरा मातमी सन्नाटा, हर आंख नम

नेहा की मौत की खबर से पूरे नवरंग राय के डेरा गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है। जिस घर में कभी बच्ची की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सिर्फ चीख-पुकार और सिसकियां सुनाई दे रही हैं। ग्रामीणों के अनुसार नेहा अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी, जिससे इस हादसे ने परिवार की पूरी दुनिया उजाड़ दी।

-- पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव

घटना की सूचना पर पहुंची स्थानीय पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा की प्रक्रिया पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।

-- मजबूरी में जोखिम, पेट पालने की कीमत जान से...

इस घटना ने एक बार फिर दियारा क्षेत्र की उस सच्चाई को उजागर कर दिया है, जहां किसान और खेतिहर मजदूर रोजी-रोटी के लिए अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं। गंगा और उसकी सहायक धाराओं को पार किए बिना खेती-बाड़ी संभव नहीं, और सुरक्षित साधनों के अभाव में नाव ही एकमात्र सहारा बन जाती है।ग्रामीणों का कहना है कि हर साल ऐसे हादसे होते हैं, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं होती। उन्होंने प्रशासन से दियारा क्षेत्र में स्थायी रूप से पीपा पुल निर्माण की मांग की है, ताकि लोगों को इस तरह की जोखिम भरी यात्राओं से मुक्ति मिल सके।नेहा की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक गरीब मजदूर अपनी जिंदगी दांव पर लगाकर दो जून की रोटी कमाने को मजबूर रहेंगे।