हाउसकीपिंग घोटाले की जांच से पीछे हटी टीम, बाहरी एजेंसी से जांच की सिफारिश
केटी न्यूज/बक्सर। जिला शिक्षा कार्यालय में हाउसकीपिंग एजेंसी के चयन और भुगतान को लेकर सामने आए कथित घोटाले की जांच अब और पेचीदा हो गई है। तीन सदस्यीय जांच टीम ने खुद इस मामले की जांच करने में असमर्थता जताते हुए इसकी जांच किसी दूसरे विभाग के वरीय अधिकारी या स्वतंत्र एजेंसी से कराने की सिफारिश कर दी है। इसके बाद पूरे प्रकरण में करोड़ों रुपये के गड़बड़ी की चर्चा तेज हो गई है।
दरअसल, शिक्षा विभाग द्वारा हाउसकीपिंग एजेंसी के रूप में फर्स्ट आइडिया डिजिटल एप्लीकेशन का चयन किया गया था, जबकि विभागीय स्तर पर कार्य आवंटन फर्स्ट आइडिया डिजिटल्स एप्लीकेशंस नाम की दूसरी कंपनी को दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इसी दूसरी कंपनी को विभाग की ओर से मोटी रकम का भुगतान भी कर दिया गया। जानकारों का कहना है कि एजेंसी चयन से लेकर भुगतान तक की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितता हुई है और इसमें करोड़ों रुपये के गबन की आशंका जताई जा रही है।

इस मामले के सामने आने के बाद जिला शिक्षा पदाधिकारी संदीप रंजन ने दिसंबर माह में डीपीओ स्थापना रजनीश उपाध्याय, डीपीओ चंदन द्विवेदी और सदर बीईओ अजय कुमार की तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की थी। लेकिन करीब तीन महीने बीत जाने के बाद भी टीम ने जांच पूरी नहीं की और अब डीईओ को पत्र लिखकर किसी स्वतंत्र एजेंसी या दूसरे विभाग से जांच कराने की अनुशंसा कर दी है।
सूत्रों के अनुसार इस मामले में कथित रूप से प्रभावशाली लोगों का दबाव भी जांच टीम पर लगातार बना हुआ था। बताया जा रहा है कि विभाग में अपना प्रभाव रखने वाले कुछ लोगों की ओर से जांच को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही थी। यहां तक कि जांच टीम के अधिकारियों से लगातार संपर्क किए जाने की भी चर्चा है।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि यदि जांच टीम के मोबाइल कॉल डिटेल और कार्यालयों में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच कराई जाए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। वहीं इस प्रकरण को दबाने में कुछ वरीय अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किस एजेंसी से कराई जाए। जिला शिक्षा पदाधिकारी के सामने भी यही चुनौती है कि इस गंभीर मामले की पारदर्शी जांच के लिए किस स्तर पर पत्राचार किया जाए, ताकि हाउसकीपिंग एजेंसी चयन और भुगतान में हुई कथित गड़बड़ी की सच्चाई सामने आ सके।
