ट्रेन में मां से बिछड़ा 10 वर्षीय कौशल पहुंचा डुमरांव, डायल 112 बना सहारा

कभी-कभी कुछ पल की अनजानी घबराहट जिंदगी की दिशा बदल देती है। ऐसा ही हुआ 10 वर्षीय मासूम कौशल कुमार के साथ, जो अपनी मां से बिछड़कर ट्रेन के रास्ते भटकते हुए डुमरांव पहुंच गया। पिछले कई दिनों से वह नगर में अकेले इधर-उधर भटक रहा था, लेकिन शुक्रवार को उसकी किस्मत ने करवट ली, जब डुमरांव थाने की डायल 112 टीम की नजर उस पर पड़ी।

ट्रेन में मां से बिछड़ा 10 वर्षीय कौशल पहुंचा डुमरांव, डायल 112 बना सहारा

-- आरा स्टेशन पर छूटा साथ, गलत ट्रेन में बैठकर पहुंचा बक्सर की ओर, पुलिस की संवेदनशीलता से जगी परिवार से मिलन की उम्मीद

केटी न्यूज/डुमरांव

कभी-कभी कुछ पल की अनजानी घबराहट जिंदगी की दिशा बदल देती है। ऐसा ही हुआ 10 वर्षीय मासूम कौशल कुमार के साथ, जो अपनी मां से बिछड़कर ट्रेन के रास्ते भटकते हुए डुमरांव पहुंच गया। पिछले कई दिनों से वह नगर में अकेले इधर-उधर भटक रहा था, लेकिन शुक्रवार को उसकी किस्मत ने करवट ली, जब डुमरांव थाने की डायल 112 टीम की नजर उस पर पड़ी।नगर के डुमरेजनी मंदिर के समीप गश्ती के दौरान टीम ने बच्चे को संदिग्ध हालात में देखा। डायल 112 के प्रभारी छविलाल मंडल ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए उसे अपने साथ लिया। शुरुआत में सहमा और डरा हुआ कौशल, प्यार और भरोसा मिलने पर धीरे-धीरे खुलने लगा।

नाश्ता-पानी कराने और समझाने के बाद उसने अपनी आपबीती सुनाई।कौशल ने बताया कि वह अपनी मां कोमल देवी के साथ 11 फरवरी को आरा घूमने आया था। आरा रेलवे स्टेशन पर उसकी मां उसे बैठाकर टिकट लेने गईं। इंतजार लंबा हुआ तो मासूम को लगा कि उसकी मां किसी ट्रेन से पटना चली गई हैं। घबराहट में वह भी एक ट्रेन पर चढ़ गया, लेकिन वह ट्रेन पटना नहीं बल्कि बक्सर की ओर जा रही थी। डुमरांव स्टेशन पर उतरने के बाद से वह यहीं भटकता रहा।प्रारंभिक पूछताछ में उसने अपना पैतृक गांव जमुई जिले के मंजवे गांव बताया है। साथ ही ननिहाल लखीसराय जिले के तेतरहार थाना क्षेत्र में होने की जानकारी दी।

उसने अपने मामा पप्पू पंडित, रिंकू पंडित, गोरे पंडित, मंटू पंडित, मिंटू कुमार और नाना महेंद्र पंडित का नाम बताया है। हालांकि वह अपने पिता का नाम स्पष्ट रूप से नहीं बता सका।प्रभारी छविलाल मंडल ने बताया कि जमुई और लखीसराय के स्थानीय थानों से संपर्क किया गया है और बच्चे की तस्वीर भी भेजी गई है। जब तक परिजन नहीं मिल जाते, तब तक बच्चे को सुरक्षित रखा जाएगा।डायल 112 टीम की इस संवेदनशील पहल की चर्चा पूरे डुमरांव में हो रही है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पुलिस के प्रयास कब रंग लाते हैं और यह मासूम कब अपनी बिछड़ी मां की गोद में लौट पाता है।