शिक्षकों के मंथन से तय हुई नई शैक्षणिक दिशा
शहर के नया बाजार स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में आयोजित तीन दिवसीय आचार्य कार्यशाला का समापन बुधवार को विचारमंथन और नई शैक्षणिक योजनाओं के निर्धारण के साथ हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 को अधिक प्रभावी, मूल्यपरक और प्रगतिशील बनाना रहा।
__ तीन दिवसीय कार्यशाला में राष्ट्रीय शिक्षा नीति, स्वच्छता और संस्कार आधारित शिक्षा पर बनी रणनीति
केटी न्यूज/बक्सर
शहर के नया बाजार स्थित सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में आयोजित तीन दिवसीय आचार्य कार्यशाला का समापन बुधवार को विचारमंथन और नई शैक्षणिक योजनाओं के निर्धारण के साथ हुआ। कार्यशाला का उद्देश्य आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 को अधिक प्रभावी, मूल्यपरक और प्रगतिशील बनाना रहा।कार्यक्रम का शुभारंभ विभाग प्रमुख लाल बाबू प्रसाद यादव, जगदीश पांडेय और राकेश दूबे द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन एवं मां शारदे के समक्ष पुष्प अर्पित कर किया गया। विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रमोद कुमार ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यशाला के उद्देश्य और रूपरेखा पर प्रकाश डाला।

तीनों दिनों तक चले सत्रों में शिक्षकों ने नई शिक्षा नीति के अनुरूप शिक्षण पद्धति, विद्यार्थियों के समग्र विकास, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और संस्कार आधारित शिक्षा पर विस्तार से चर्चा की। शिक्षकों ने इस बात पर जोर दिया कि शिक्षा केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रहकर बच्चों के व्यक्तित्व विकास और नैतिक मूल्यों को भी सशक्त बनाए।कार्यशाला के दौरान आगामी सत्र के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई, जिसमें संस्कृति ज्ञान परीक्षा, आधारभूत विषयों की मजबूती, अभिभावक गोष्ठी और अभिभावक सम्मेलन जैसे कार्यक्रमों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया। शिक्षकों ने यह भी तय किया कि विद्यालय और अभिभावकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर छात्रों के सर्वांगीण विकास को सुनिश्चित किया जाएगा।

मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में शिक्षकों को सकारात्मक सोच अपनाने और विद्यार्थियों में सत्यनिष्ठा, सहिष्णुता, नेतृत्व क्षमता, देशभक्ति तथा शारीरिक व मानसिक विकास जैसे गुणों को विकसित करने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि शिक्षक ही समाज के निर्माण की आधारशिला हैं, इसलिए उनका दृष्टिकोण व्यापक और प्रेरणादायक होना चाहिए।कार्यक्रम के समापन अवसर पर उपेंद्र सिंह, देवेंद्र वर्मा, अभय पांडेय, संजीव सिन्हा, रोहिणी कुमारी, द्विजेश सिंह, पूनम सिन्हा, सुशील कुमार, श्वेती सिन्हा सहित कई शिक्षक उपस्थित रहे। कार्यशाला को शिक्षकों के लिए नई ऊर्जा और दिशा देने वाला मंच माना गया।

