रेंका की मुस्कान बनी बिहार की शान: मैथ में 100 लाकर हासिल किया 8वां रैंक

“परिंदों को तालीम नहीं दी जाती उड़ानों की, वे खुद ही छू लेते हैं बुलंदिया आसमानों की ...” इस कहावत को सच कर दिखाया है नावानगर अंचल के रेंका गांव की होनहार बेटी मुस्कान कुमारी ने। साधारण परिवार में जन्मी इस प्रतिभाशाली छात्रा ने अपने अद्भुत प्रदर्शन से न सिर्फ अपने माता-पिता बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया है।

रेंका की मुस्कान बनी बिहार की शान: मैथ में 100 लाकर हासिल किया 8वां रैंक

__ बिना कोचिंग, ग्रामीण माहौल में पढ़ाई कर रेंका की बेटी ने रचा इतिहास, पूरे गांव में जश्न का माहौल

केटी न्यूज/डुमरांव

“परिंदों को तालीम नहीं दी जाती उड़ानों की, वे खुद ही छू लेते हैं बुलंदिया आसमानों की ...”  इस कहावत को सच कर दिखाया है नावानगर अंचल के रेंका गांव की होनहार बेटी मुस्कान कुमारी ने। साधारण परिवार में जन्मी इस प्रतिभाशाली छात्रा ने अपने अद्भुत प्रदर्शन से न सिर्फ अपने माता-पिता बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया है।रविवार को घोषित बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा परिणाम में मुस्कान ने 480 अंक (96 प्रतिशत) प्राप्त कर पूरे राज्य में 8वां स्थान हासिल किया। उसकी सफलता की सबसे खास बात यह रही कि उसने गणित जैसे कठिन विषय में शत-प्रतिशत यानी पूरे 100 अंक हासिल किए।

वहीं विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में 99-99 अंक तथा हिन्दी और संस्कृत में 91-91 अंक प्राप्त कर अपनी मेधा का लोहा मनवाया।कोरानसराय गर्ल्स हाई स्कूल की छात्रा मुस्कान ने यह उपलब्धि बिना किसी कोचिंग के हासिल की है। उसने गांव में रहकर ही स्वअध्ययन के जरिए अपनी तैयारी पूरी की। उसकी प्रारंभिक शिक्षा भी गांव के मध्य विद्यालय से ही हुई, जहां से उसकी प्रतिभा की नींव मजबूत हुई।मुस्कान के पिता सुभाष यादव और माता पुष्पा देवी अपनी बेटी की इस सफलता से बेहद गर्वित हैं। परिजनों के अनुसार, मुस्कान बचपन से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर और अनुशासित रही है।

वह रोजाना नियमित समय पर पढ़ाई करती थी और कठिन विषयों को भी धैर्य के साथ समझती थी।मुस्कान की इस ऐतिहासिक सफलता से रेंका गांव में खुशी की लहर दौड़ गई है। ग्रामीणों ने मिठाई बांटकर और बधाइयां देकर अपनी खुशी जाहिर की। हर कोई उसकी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास की सराहना कर रहा है।मुस्कान अब आगे चलकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने सपनों को साकार करना चाहती है। उसकी सफलता उन तमाम ग्रामीण छात्रों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।