नववर्ष पर बसपा में भूचाल, अनुशासन के नाम पर बड़ी सियासी सर्जरी

नववर्ष की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के लिए बड़े सियासी धमाके के साथ हुई है। संगठनात्मक अनुशासन का हवाला देते हुए पार्टी ने एक साथ तीन प्रमुख नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाकर यह साफ कर दिया है कि अब बसपा में ढिलाई के लिए कोई जगह नहीं है। प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर जिला अध्यक्ष महावीर यादव ने कार्रवाई करते हुए सदर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी अभिमन्यु सिंह कुशवाहा, पूर्व प्रदेश महासचिव जे.पी. यादव और नेता रमेश राजभर को पार्टी से निष्कासित कर दिया है।

नववर्ष पर बसपा में भूचाल, अनुशासन के नाम पर बड़ी सियासी सर्जरी

--तीन दिग्गज नेताओं का निष्कासन, संगठन में सख्ती तो अंदरखाने सवाल भी तेज

केटी न्यूज/बक्सर

नववर्ष की शुरुआत बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के लिए बड़े सियासी धमाके के साथ हुई है। संगठनात्मक अनुशासन का हवाला देते हुए पार्टी ने एक साथ तीन प्रमुख नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाकर यह साफ कर दिया है कि अब बसपा में ढिलाई के लिए कोई जगह नहीं है। प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर जिला अध्यक्ष महावीर यादव ने कार्रवाई करते हुए सदर विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी अभिमन्यु सिंह कुशवाहा, पूर्व प्रदेश महासचिव जे.पी. यादव और नेता रमेश राजभर को पार्टी से निष्कासित कर दिया है।

जिला अध्यक्ष द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में इन नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। कहा गया है कि तीनों नेताओं ने पार्टी के भीतर अनुशासनहीनता बरती, गुटबाजी को बढ़ावा दिया और अन्य राजनीतिक दलों से साठगांठ कर पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त रहे। प्रदेश नेतृत्व ने इन गतिविधियों को पार्टी की विचारधारा, संगठनात्मक एकता और अनुशासन के लिए घातक मानते हुए तत्काल और कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए थे।बसपा ने साफ शब्दों में संदेश दिया है कि पार्टी की छवि से समझौता करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

नेतृत्व का कहना है कि चाहे नेता कितना ही बड़ा क्यों न हो, यदि वह पार्टी लाइन से हटकर काम करेगा तो कार्रवाई तय है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब पार्टी संगठन को फिर से मजबूत करने और जमीनी स्तर पर सक्रियता बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है।हालांकि, इस कार्रवाई को लेकर सवाल भी उठने लगे हैं। निष्कासित नेता जे.पी. यादव ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जिस वीडियो के आधार पर कार्रवाई की गई, उसमें कई लोग शामिल थे, लेकिन कार्रवाई सिर्फ कुछ चुनिंदा नेताओं पर ही क्यों की गई।

उन्होंने इसे अतिपिछड़े वर्ग को निशाना बनाए जाने से जोड़ते हुए फैसले की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।इस पूरे घटनाक्रम के बाद बक्सर जिले की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। जहां पार्टी समर्थक इसे अनुशासन स्थापित करने की दिशा में मजबूत कदम बता रहे हैं, वहीं विरोधी खेमे में इसे आंतरिक असंतोष और संगठनात्मक टकराव के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। साफ है कि नववर्ष की यह कार्रवाई आने वाले दिनों में बसपा की अंदरूनी राजनीति और समीकरणों को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है।